रेलवे, एयरपोर्ट पर पब्लिक वाई-फाई इस्तेमाल करना हो सकता है खतरनाक, इस सरकारी एजेंसी ने चेताया
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अगर आप रेलवे स्टेशन या फिर एयरपोर्ट पर इंटरनेट चलाने के लिए पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खतरे से खाली नहीं है। आपका स्मार्टफोन या फिर लैपटॉप पर साइबर हमला आसानी से हो सकता है। सरकार की तरफ से भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी इन) ने इस तरह की चेतावनी जारी की है।
एजेंसी ने कहा कि पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करने वाले लोग की पर्सनल जानकारी को हैकर आसानी से हैक कर सकते हैं। जिन चीजों को हैकर हैक करने का प्रयास करते हैं उनमें, क्रेडिट कार्ड, पासवर्ड, चैट मैसेज, ईमेल,पैन, आधार नंबर की डिटेल सहित अन्य जानकारी शामिल हैं। इसे आम भाषा में आइडेंटिटी थेफ्ट कहते हैं।
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क्या होता है आइडेंटिटी थेफ्ट
आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, ई-मेल, बैंक अकाउंट नंबर और क्रेडिट-डेबिट कार्ड की डिटेल्स आपकी पर्सनल आइडेंटिटी में शुमार होती है। इन चीजों को संभालकर रखना होता है, लेकिन कई बार ये डिटेल्स चोरी हो जाती हैं। ऐसे में इन डॉक्यूमेंट्स को सेफ रखना बेहद जरूरी है। इसे आइडेंटिटी थेफ्ट के नाम से जाना जाता है।
रजिस्टर कराएं एफआईआर
अगर आपको अपनी आईडी डिटेल्स चोरी होने के बारे में पता चले तो सबसे पहले एफआईआर दर्ज कराएं। साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट एडवोकेट पवन दुग्गल के मुताबिक आइडेंटिटी थेफ्ट का शिकार हुआ व्यक्ति अपनी शिकायत आईटी एक्ट के तहत दर्ज करा सकता है। इसके लिए पुलिस स्टेशन में मौजूद इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी आपकी एफआईआर को रजिस्टर्ड करेगा।
स्टेट पुलिस की वेबसाइट पर भी दर्ज करा सकते हैं एफआईआर
दुग्गल ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने पास के पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज नहीं करा सकता है तो वह स्टेट पुलिस की वेबसाइट पर जाकर भी कंप्लेंट लिखा सकता है। वेबसाइट पर कंप्लेंट करने के बाद उसका प्रिंटआउट जरूर अपने पास रखें। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर भविष्य में आप किसी तरह से पकड़े जाते हैं तो आपको पुलिस परेशान नहीं करेगी।
गूगल पर लगाएं अपने नाम का अलर्ट
दुग्गल ने बताया कि गूगल पर ऐसे लोग अपने नाम को एलर्ट के रूप में सेव कर सकते हैं। इससे यह पता चल जाएगा कि आपके नाम का प्रयोग इंटरनेट पर कहीं कोई गलत तरीके से तो इस्तेमाल नहीं कर रहा है।
अगर ऐसा है तो आप उसको आसानी से पकड़ सकते हैं। इसके साथ ही आप गूगल पर या किसी अन्य क्लाउड सर्विस पर अपने डाटा का बैकअप रख सकते हैं। सरकार की तरफ से भी डिजिलॉकर दिया गया है जहां पर डॉक्युमेंट्स की डिटेल्स को सुरक्षित तरीके से सेव किया जा सकता है।
साइबर क्राइम होती है आइडेंटिटी की चोरी
दुग्गल ने बताया कि आइडेंटिटी की चोरी साइबर क्राइम के अंतर्गत आती है। यह तब होता है जब कोई और व्यक्ति आपके डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल लोन, क्रेडिट कार्ड, बैंक अकाउंट, मोबाइल या गैस का कनेक्शन लेने के लिए करता है।
इसके अलावा इन डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल ऑनलाइन शॉपिंग के लिए भी किया जाता है। आईटी एक्ट 66सी के अंतर्गत आईडेंटी चोरी करने वाले व्यक्ति को 3 साल तक की सजा हो सकती है और 1 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।