गूगल पर फ्रांस ने फिर से लगाया 1185 करोड़ रुपये का जुर्माना
सर्च इंजन कंपनी गूगल पर फ्रांस सरकार के प्रतिस्पर्धा आयोग ने 150 करोड़ यूरो (1185 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है। फ्रांससी प्रतिस्पर्धा आयोग ने कहा है कि गूगल ने अपने विज्ञापन पेज पर गलत तरीके से सूचनाएं पेश की थीं।
अमेरिकी टेक कंपनियां यूरोपियन देशों के निशाने पर
ज्यादातर अमेरिकी टेक कंपनियां जैसे कि गूगल, फेसबुक, एप्पल और अमेजन फ्रांस सहित अन्य यूरोपियन देशों के कम टैक्स देने के कारण निशाने पर हैं। इसी साल सितंबर में गूगल ने फ्रांस को 100 करोड़ यूरो (7600 करोड़ रुपये) का जुर्माना देना पड़ा था। यह जुर्माना कंपनी ने चार साल पुराने चल रहे फिस्कल फ्रॉड की जांच के बाद दिया था।
पिछले साल भी कंपनी पर 34 हजार करोड़ रुपये का जुर्माना लगा था। 2011 से 2014 के बीच टैक्स संबंधी धोखाधड़ी के मामले में कोर्ट में यह समझौता हुआ। पेरिस के कोर्ट ऑफ अपील ने गूगल को 50 करोड़ यूरो का भुगतान और 46.5 करोड़ यूरो अतिरिक्त चुकाने के आदेश दिए। 2015 में गूगल के खिलाफ जांच शुरू हुई थी।
फ्रांस प्रतिस्पर्धा आयोग की अध्यक्ष ईसाबेला डि सिल्वा ने कहा कि गूगल की ऑनलाइन विज्ञापन में काफी मजबूत पकड़ है। कंपनी की इस फील्ड में 90 फीसदी हिस्सेदारी है। इस वजह से उसे अपनी विज्ञापन पॉलिसी में देशों के कानून के हिसाब से बदलाव करना चाहिए। गूगल ने कहा है कि वो आयोग के फैसले के खिलाफ अपील दायर करेगा।
टैक्स चोरी करने का लगा था आरोप
गूगल पर फ्रांस में टैक्स चोरी करने का आरोप लगा था। उसने कारोबारी गतिविधियों की जानकारी न देते हुए कहा था कि उसका सारा बिजनेस आयरलैंड से चलता है। हालांकि पहले से समझौता होने के कारण कंपनी पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होगा। कई अन्य कंपनियों के खिलाफ भी इसी तरह की सख्ती बरती जा सकती है। कुछ कंपनियों से बातचीत चल रही है।
फ्रांस ने गूगल और फेसबुक जैसी दिग्गज इंटरनेट कंपनियों पर नया टैक्स लगाने को मंजूरी दे दी है। इस इंटरनेट टैक्स को गाफा (गूगल, अमेजन, फेसबुक और एपल) नाम दिया गया है। हालांकि, अमेरिका ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए अपने नाटो सहयोगी फ्रांस से इस विचार को त्यागने का आग्रह किया था।
यूरोपीय संघ ने लगाया था 117 अरब का जुर्माना
यूरोपीय संघ ने प्रतिस्पर्धा कानून के उल्लंघन को लेकर गूगल पर 1.49 अरब यूरो यानि करीब 117 अरब रुपये का जुर्माना लगाया है। गूगल पर यह जुर्माना ऑनलाइन विज्ञापन में पक्षपात को लेकर लगा है। बता दें कि इससे पहले भी पिछले साल जुलाई में यूरोपीय आयोग गूगल पर इसी बात को लेकर 344 अरब रुपये का जुर्माना लगाया था जो कि गूगल पर लगने वाला सबसे बड़ा जुर्माना था।
दरअसल गूगल पर हर बार यह आरोप लगता रहा है कि वह अपने मोबाइल डिवाइस रणनीति के तहत गूगल सर्च इंजन को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है। साथ ही आपको याद दिलाते चलें कि साल 2017 के बाद अभी तक गूगल पर लगने वाला यह तीसरा बड़ा जुर्माना है।