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अगर गूगल नहीं करता यह काम तो नहीं शुरू होती फ्लिपकार्ट, बिन्नी बंसल ने खोला राज

Fri, 10 Aug 2018 11:43 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 10 Aug 2018 11:43 AM IST
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binni bansal states how flipkart was opened after google rejected him twice

देश की प्रमुख ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट की शुरुआत कैसे हुई यह बहुत सारे लोगों को पता नहीं है। कंपनी के को-फाउंडर में से एक बिन्नी बंसल ने इस राज से भी पर्दा उठा दिया है।

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सैप लैब द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बिन्नी बंसल ने कहा कि अगर 2005 व 2006 में गूगल उनके नौकरी के आवेदन को रिजेक्ट नहीं करता, तो फिर इसकी शुरुआत नहीं होती। वहीं अमेजन जैसी कंपनी से टक्कर लेने से पहले वो और सचिन इसी में काम करते थे।
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अमेजन में की थी सचिन ने बिन्नी की पैरवी

गूगल में नौकरी नहीं मिलने के बाद सचिन बंसल ने बिन्नी के लिए अमेजन में पैरवी की थी। 2006 में बिन्नी को अमेजन में सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर नौकरी मिली, जिसके बाद सचिन को काफी तगड़ा बोनस भी मिला।
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लेकिन आठ महीने बाद ही बिन्नी ने नौकरी छोड़ दी, जिसका खामियाजा सचिन को भुगतना पड़ा था। ऐसा इसलिए क्योंकि सचिन को बोनस में मिला सारा पैसा वापस करना पड़ा था। 

बीवी को मनाना सबसे बड़ी चुनौती

बिन्नी ने कहा कि आज भी अपनी बीवी को फ्लिपकार्ट से सामान खरीदने के लिए मनवाना सबसे बड़ी चुनौती है। बीवी घर के लिए सब्जी और फल मंगाने के लिए अभी भी फ्लिपकार्ट के बजाए दूसरी ई-कॉमर्स वेबसाइट से शॉपिंग करती है।

आईआईटी दिल्ली में बिताए गए लम्हें सबसे यादगार

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बिन्नी ने कहा आईआईटी दिल्ली में बिताया गया समय जीवन का सबसे यादगार पल है। दिल्ली स्थित आईआईटी में एक अलग तरह का हॉस्टल में माहौल है। आप अपने डिपार्टमेंट, कोर्स और बैचमेट से ज्यादा हॉस्टल के साथियों के साथ ज्यादा वफादार रहते हैं।

दूसरे हॉस्टल के साथियों से हमेशा प्रतिद्वंदता रहती थी। यह सब खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा दिखती थी। यहां पर जो दोस्त बने वो अभी भी जीवन से जुड़े हुए हैं। बंगलूरू में कई साल तक इन्हीं दोस्तों के पास फ्लिपकार्ट शुरू करने से पहले रहा था।

कस्टमर को खुद करते थे सामान की डिलीवरी

बिन्नी ने कहा कि वो और सचिन कई बार सामान की खुद ही डिलीवरी करते थे, ताकि कस्टमर का फीडबैक जान सकें। कई बार लोग उन्हें पहचाने नहीं थे, लेकिन कुछ थे जो पहचान कर सेल्फी व ऑटोग्रॉफ लेते थे। एक कस्टमर और उसके परिवार ने पहचान कर चाय और मिठाई का जो दौर शुरू किया, वो कही घंटों तक चला, क्योंकि ग्राहक हमेशा भगवान के समान होता है। 

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