अब दस करोड़ तक सर्राफा कारोबार पर टैक्स नहीं
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वित्त मंत्रालय में सोने और हीरे आदि से बने जेवरातों के कारोबार सीमा संशोधित कर दी है। साथ ही केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग से कोई भी इंस्पेक्टर कारोबार की जांच करने नहीं जाएगा। सराफा व्यापार एसोसिएशन अध्यक्ष संदीप अग्रवाल ने बताया कि सरकार ने कारोबार सीमा बढ़ाकर व्यापारियों का मान बढ़ाया है, लेकिन मांग इस टैक्स व्यवस्था को पूरी तरह वापस लेना था।
सेंट्रल एक्साइज विभाग ने नई टैक्स व्यवस्था के तहत कुछ खास संशोधन किए हैं। इसमें कहा गया है कि 10 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने पर ही उत्पाद शुल्क लगेगा। यह सीमा पहले छह करोड़ रुपया थी।
सहायक आयुक्त मनोज प्रभाकर ने बताया कि दस करोड़ से अधिक यानी 11 करोड़ रुपये का कारोबार होने पर सिर्फ एक करोड़ रुपये पर ही टैक्स देय होगा। यह क्रम 15 करोड़ रुपये कारोबार तक मान्य होगा।
प्रभाकर ने बताया कि अगर किसी वर्ष में 10 करोड़ से नीचे कारोबार होता है तो कारोबारी टैक्स व्यवस्था से बाहर हो जाएगा। जबकि 15 करोड़ रुपये से अधिक गहने निर्माण आदि का कारोबार पर कोई छूट नहीं है। बता दें कि पहली अप्रैल से आभूषण निर्माण कारोबार पर एक प्रतिशत टैक्स लागू किया गया है।
सहायक आयुक्त ने बताया कि विभाग से यह भी निर्देश मिले हैं कि कारोबारी का सर्वे नहीं किया जाएगा।