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भारतीय रेलवे की बदलेगी सूरत, चलाई जाएंगी मांग आधारित ट्रेनें
Sat, 19 Dec 2020 02:12 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 19 Dec 2020 02:12 AM IST
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भारतीय रेल
- फोटो : शटरस्टॉक्स
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भारतीय रेलवे ने एक मसौदा (ड्राफ्ट ) तैयार किया है जिसमें पूरे भारतीय रेलवे का आधारभूत ढांचा बदलने की योजना है। नेशनल रेल प्लान के तहत साल 2030 तक माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाकर 45 फीसदी करने का लक्ष्य है। साथ ही मांग पर आधारित यात्री गाड़ियों को चलाने की योजना भी बन रही है।
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रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए रेलवे बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की दिशा में मसौदा तैयार किया गया है। इस मसौदे में 2030 तक साल-दर-साल आधार पर 100 से अधिक स्थानों और यातायात वृद्धि के पूर्वानुमान का मांग मूल्यांकन किया गया है।
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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय रेल योजना का अंतिम मसौदा तैयार है और जल्द ही इसे संबद्ध पक्षों को उनके विचार जानने के लिए भेज दिया जाएगा। इसके बाद एक माह के समय में हम इसे अंतिम रूप दे सकेंगे। योजना के तहत माल ढुलाई में हम अपनी हिस्सेदारी को 2030 तक मौजूदा 27 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
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रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कहा कि रेलवे कोयला खदानों से संपर्क वाली 20 अतिरिक्त परियोजनाओं को पूरा करने वाला है और दिसंबर 2023 तक रेलवे विद्युतीकरण की 146 परियोजनाओं को पूरा कर लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि कोरोना काल में रेलवे को बड़ा नुकसान हुआ है। पिछले साल लगभग 53 हजार करोड़ रुपये पैसेंजर ट्रेनों से कमाई हुई थी, वहीं इस बार अभी तक केवल 4500 करोड़ की कमाई हुई है। पैसेंजर ट्रेनों से कमाई में 87 फीसदी की गिरावट आई है।
साथ ही माल ढ़ुलाई में रेलवे को 9000 करोड़ रुपये कम मुनाफा हुआ है। दरअसल, कोरोना वायरस के कारण रेलवे ने इस साल भारी नुकसान उठाया है, क्योंकि अधिकतर पैसेंजर गाड़ियां बंद रहीं और माल ढुलाई भी लॉकडाउन में बहुत ज्यादा प्रभावित रही थी।