फरवरी में सिप के जरिए 5.2 फीसदी बढ़ा निवेश: रिपोर्ट
- 8,513 करोड़ रुपये सिप के जरिए हुआ निवेश पिछले महीने
- एम्फी ने कहा बाजार जोखिम घटाने को सिप निवेश का पसंदीदा साधन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना वायरस महामारी के कारण बाजार में भारी उथल-पुथल के बीच सिप (सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट योजना) के जरिए निवेश फरवरी, 2020 में 5.2 फीसदी बढ़कर 8,513 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 8,095 करोड़ रुपये था।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के शुरुआती 11 महीने में सिप का योगदान बढ़कर 91,443 करोड़ रुपये हो गया। इससे पहले 2018-19 में अप्रैल-फरवरी के दौरान यह आंकड़ा 84,638 करोड़ रुपये रहा था।
उद्योग निकाय एम्फी ने कहा कि मौजूदा बाजार जोखिमों को कम करने के लिए सिप खुदरा निवेशकों के लिए निवेश का पसंदीदा साधन बना हुआ है। हालांकि, म्यूचुअल फंड की 44 कंपनियों की सिप से जुटाई गई रकम में जनवरी, 2020 के मुकाबले फरवरी में मामूली गिरावट आई है।
जनवरी में इन कंपनियों ने सिप से 8,532 करोड़ रुपये जुटाए थे। दिसंबर, 2019 में यह आंकड़ा 8,518 करोड़ और नवंबर में 8,273 करोड़ रुपये रहा था। एम्फी के मुताबिक, 12 महीनों के लिए फरवरी तक सिप में औसतन निवेश 8,200 करोड़ रुपये रहा।
सिप के जरिए मजबूत आमदनी ने फरवरी में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश को 10,730 करोड़ रुपये तक बढ़ाने में मदद की है, जो मार्च, 2019 के बाद 11 महीने का उच्चस्तर है। उस दौरान इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 11,756 करोड़ रुपये था।
छोटे निवेशकों का भरोसा बरकरार
एम्फी के मुख्य कार्यकारी एनएस वेंकटेश ने कहा, हम मार्च में भी सिप के जरिए निवेश में तेजी की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि, बाजार की स्थितियों को देखते हुए कुछ संस्थागत निवेशक अपनी निवेश रणनीति में बदलाव कर सकते हैं। छोटे निवेशकों का इक्विटी बाजार में भरोसा बना हुआ है और वे सिप के जरिए म्यूचुअल फंडों में निवेश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, मुझे यह जानकार खुशी है कि लगातार 15 महीने से सिप के जरिए मासिक निवेश 8,000 करोड़ रुपये के स्तर से अधिक रहा है। वेंकटेश के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों से सिप के जरिए निवेश लगातार बढ़ा है। 2018-19 में इसके जरिए निवेश 92,693 करोड़ रुपये रहा था। इससे पहले 2017-18 में यह आंकड़ा 67,000 करोड़ और 2016-17 में 43,900 करोड़ रुपये रहा था।