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अगले साल तक 7.3 फीसदी रहेगी भारत की विकास दर
Sat, 02 Mar 2019 05:33 AM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आसिम खान
Updated Sat, 02 Mar 2019 05:33 AM IST
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सरकारी आंकड़ों में चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर के नीचे जाने के बावजूद मूडीज का कहना है कि 2019 और 20 में देश की विकास दर 7.3 फीसदी रहने का अनुमान है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने शुक्रवार को कहा कि भारत के समक्ष अन्य विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में जोखिम काफी कम है।
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केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने एक दिन पहले बताया था कि दिसंबर में समाप्त तीसरी तिमाही में विकास दर 6.6 फीसदी रही है, जो पांच तिमाहियों में सबसे कम है। इन आंकड़ों से इतर मूडीज का अनुमान है कि भारत अगले दो साल स्थिर गति से वृद्धि करेगा। 2019 में चुनाव को देखते हुए सरकार द्वारा खर्च बढ़ाने के बावजूद भविष्य में आर्थिक वृद्घि को समर्थन मिलेगा।
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रेटिंग एजेंसी ने कहा कि अंतरिम बजट में किसानों के लिए खर्च बढ़ाने से सरकार के राजकोषीय घाटे पर असर पड़ने के बावजूद जीडीपी वृद्धि में 0.45 फीसदी का इजाफा हो सकता है। इससे निकट भविष्य में खपत बढ़ेगी जो विकास दर के लिए मददगार होगी।
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बना रहेगा आरबीआई का नरम रुख
मूडीज ने कहा कि नीतिगत दरों को लेकर आरबीआई का नरम रुख आगे भी कायम रहेगा। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से सुधार आ रहा है और सरकारी बैंकों का एनपीए सितंबर, 2018 में घटकर 10.8 फीसदी पर आ गया जो मार्च में 11.5 फीसदी था। बैंकिंग सुधार का लाभ देश की जनता को भी मिलेगा और इससे आर्थिक वृद्धि दर मजबूत हो सकेगी।
निर्माण गतिविधियां 14 महीने के उच्च स्तर पर
फरवरी में देश की विनिर्माण गतिविधियां 14 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। बिक्री, उत्पादन और रोजगार में बढ़ोतरी आने से यह उछाल दिखा है। कंपनियों के पर्चेजिंग मैनेजर्स के बीच किए जाने वाले मासिक सर्वे में फरवरी का विनिर्माण पीएमआई 54.3 अंक रहा, जो जनवरी में 53.9 अंक रहा था। यह लगातार 19वां महीना है जब विनिर्माण पीएमआई 50 अंक से ऊपर रहा है, जो इस क्षेत्र में वृद्धि को दर्शाता है। दिसंबर, 2017 से देश के कारोबारी माहौल में लगातार सुधार आया है।
रोजगार का सबसे अच्छा दौर
इस सर्वे रिपोर्ट की लेखिका पॉलियना डी लीमा ने कहा कि रोजगार में वृद्धि के लिहाज यह पिछले साढ़े छह साल में सबसे अच्छा दौर है। इसकी वजह घरेलू और विदेशी ग्राहकों की ओर से बड़ी मांग के चलते विनिर्माण इकाईयों द्वारा अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाना है। विनिर्माण पीएमआई में आया उछाल अंतिम तिमाही में विकास दर को मजबूत करने में मददगार होगा, क्योंकि जीडीपी वृद्घि में इसकी बड़ी भूमिका होती है।