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मोटर और पीसीबी के उपकरणों पर आयात शुल्क घटाए सरकारः घरेलू उपकरण कंपनी

Fri, 31 Jan 2020 06:15 AM IST
संजीव कुमार झा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Fri, 31 Jan 2020 06:15 AM IST
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Government to reduce import duty on motor and PCB equipment
निर्मला सीतारमण - फोटो : Twitter

घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि सरकार बजट के जरिये देश में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) गतिविधियों को बढ़ावा दे। साथ ही मोटर और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों के निर्माण में काम आने वाली वस्तुओं पर आयात शुल्क भी घटाए, ताकि इनकी खपत बढ़ाई जा सके।  

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पैनासोनिक इंडिया के अध्यक्ष एवं सीईओ (भारत-दक्षिण एशिया) मनीष शर्मा ने कहा कि यदि देश की अर्थव्यवस्था को 50 खरब डॉलर तक पहुंचाना है, तो सभी को मिलकर तेजी से काम करना होगा। इस क्रम में सरकार को लगातार सुधार की ओर कदम बढ़ाने होंगे। इस समय घरेलू उपकरणों के निर्माण उद्योग में भी सुस्ती का माहौल है।
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पिछले दो वर्षों के दौरान इसमें बिलकुल भी वृद्धि नहीं दिखी है। यह उद्योग तभी विकास की ओर बढ़ सकेगा, जब सरकार उद्योग के हित में नई नीतियों की घोषणा करेगी। लिहाजा सरकार से अपील है कि वह वाशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर के निर्माण में काम आने वाले साजो-सामान पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में घटाए।
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अभी इन वस्तुओं पर 7.5 से 10 फीसदी तक शुल्क लग रहा है। इसके अलावा घटिया उपकरणों के आयात पर भी रोक लगाना जरूरी है और इन वस्तुओं पर बीआईएस मानक को अनिवार्य किया जाए। 

आरएंडडी से वैश्विक शक्ति का केंद्र बनेगा भारत

देश में प्रतिभा की कमी नहीं है और आरएंडडी गतिविधियों को बढ़ावा देने से भारत एयर कंडीशनिंग और रेफ्रिजरेशन के क्षेत्र में वैश्विक शक्ति का केंद्र बन सकता है। इन दोनों उत्पादों के उपकरणों पर वर्ष 2018 और 2019 में आयात शुल्क बढ़ाया गया था। भारत में इसका बाजार 60 लाख यूनिट से भी कम का है, जबकि चीन का बाजार आठ करोड़ यूनिट सालाना खपत का है।

यही कारण है कि घरेलू कंपनियां इसके लिए विदेशी वेंडरों पर निर्भर रहती हैं। साथ ही यदि आम आदमी को आयकर में राहत मिलेगी तो वह नई वस्तुएं खरीदने के लिए प्रोत्साहित होगा। लिहाजा सरकार को उन्हें राहत देने के साथ रियल एस्टेट क्षेत्र को भी बढ़ावा देना चाहिए।
-बी. त्यागराजन, प्रबंधन निदेशक, ब्लू स्टार लिमिटेड

 पीएम-किसान योजना को लग सकता है झटका

किसानों को सालाना 6 हजार रुपये की निश्चित राशि देने के लिए शुरू की गई पीएम-किसान योजना के मद में आवंटन राशि पर राज्यों की बेरुखी की वजह से आगामी बजट में कैंची चल सकती है। माना जा रहा है कि इस बार केंद्र सरकार इस मद में 20 फीसदी कम राशि का आवंटन करेगी।

बजट 2019-20 में जहां योजना को 75 हजार करोड़ रुपये मिले थे, वहीं 2020-21 के लिए 60 हजार करोड़ मिलने का ही अनुमान लगाया जा रहा है। इस साल पश्चिम बंगाल ने योजना को लागू ही नहीं किया, जबकि अन्य कई राज्यों ने किसानों को इसका व्यापक लाभ नहीं पहुंचाया। 

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