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GST दरों के स्लैब में हो सकती है कटौती, वित्त मंत्री बोले- विकास चाहिए तो चुकानी होगी कीमत
amarujala.com- Presented By: अनंत पालीवाल
Updated Sun, 01 Oct 2017 04:24 PM IST
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दिवाली से पहले या फिर उसके ठीक बाद जीएसटी दरों की स्लैब में सरकार कटौती कर सकती है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को एक कार्यक्रम में संकेत दिया है कि राजस्व बढ़ने के बाद माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत स्लैब में कटौती की जा सकती है और इसके लिए सरकार के पास काफी स्कोप है। जेटली ने कहा, ‘हमारे पास इसमें दिन के हिसाब से सुधार करने की गुंजाइश है। हमारे पर सुधार की गुंजाइश है और अनुपालन का बोझ कम किया जा सकता है खासकर छोटे टैक्सपेयर्स के मामले में।’
इसके साथ ही जेटली ने कहा है कि जिनको विकास चाहिए, उनको इसके लिए कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि विकास के लिए पैसों की जरूरत होती है, हालांकि इसे ईमानदारी से खर्च किया जाना चाहिए। जेटली ने कहा कि किसी भी सरकार के लिए आय होना लाइफलाइन है। इसके जरिए ही देश को विकासशील से विकसित राष्ट्र में तब्दील किया जा सकता है।
पढ़ें- GDP में भारी गिरावट, जेटली बोले- अर्थव्यवस्था के लिए बेहद चिंता की बात
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उन्होंने कहा, 'ऐसे समाज में करदाता न होने की ज्यादा चिंता नहीं की जाती, वहां अब लोग समय के साथ टैक्स के लिए आगे आ रहे हैं। इसी के चलते करों को एक कर दिया गया है। एक बार बदलाव स्थापित हो जाएंगे, फिर हमारे पास सुधार के लिए जगह होगी।'
उन्होंने कहा, ‘हमारे पास सुधार की गुंजाइश है। एक बार हम राजस्व की दृष्टि से तटस्थ बनने के बाद बड़े सुधारों के बारे में सोचेंगे। मसलन कम स्लैब। लेकिन इसके लिए हमें राजस्व की दृष्टि से तटस्थ स्थिति हासिल करनी होगी।’’ फिलहाल जीएसटी की चार स्लैब हैं जो शून्य से 28 प्रतिशत के बीच हैं।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करना शुरुआती चरण में उम्मीद से अधिक सरल रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच शीर्ष पर फैसला लेने की प्रक्रिया काफी संस्थागत रही है और रोजमर्रा के मुद्दों से निपटने के लिए बनाई गई प्रणाली अच्छी तरह से काम कर रही है।
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इसके साथ ही जेटली ने कहा है कि जिनको विकास चाहिए, उनको इसके लिए कीमत चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि विकास के लिए पैसों की जरूरत होती है, हालांकि इसे ईमानदारी से खर्च किया जाना चाहिए। जेटली ने कहा कि किसी भी सरकार के लिए आय होना लाइफलाइन है। इसके जरिए ही देश को विकासशील से विकसित राष्ट्र में तब्दील किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा, 'ऐसे समाज में करदाता न होने की ज्यादा चिंता नहीं की जाती, वहां अब लोग समय के साथ टैक्स के लिए आगे आ रहे हैं। इसी के चलते करों को एक कर दिया गया है। एक बार बदलाव स्थापित हो जाएंगे, फिर हमारे पास सुधार के लिए जगह होगी।'
उन्होंने कहा, ‘हमारे पास सुधार की गुंजाइश है। एक बार हम राजस्व की दृष्टि से तटस्थ बनने के बाद बड़े सुधारों के बारे में सोचेंगे। मसलन कम स्लैब। लेकिन इसके लिए हमें राजस्व की दृष्टि से तटस्थ स्थिति हासिल करनी होगी।’’ फिलहाल जीएसटी की चार स्लैब हैं जो शून्य से 28 प्रतिशत के बीच हैं।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करना शुरुआती चरण में उम्मीद से अधिक सरल रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच शीर्ष पर फैसला लेने की प्रक्रिया काफी संस्थागत रही है और रोजमर्रा के मुद्दों से निपटने के लिए बनाई गई प्रणाली अच्छी तरह से काम कर रही है।
जीएसटी लागू करना उम्मीद से अधिक सरल रहा
जेटली ने कहा कि वैकल्पिक कर प्रणाली को लागू करने के ये शुरुआती दिन हैं। अभी तक तो सबकुछ उम्मीद से अधिक सरल प्रतीत हो रही है। नेटवर्क में खुद ही आने वाले लोगों की संख्या अब धीरे-धीरे बढ़ते रहने की उम्मीद है। भारत की आर्थिक विकास दर अप्रैल-जून तिमाही में 5.7 फीसदी रही, जो मोदी सरकार के तीन साल में सबसे कम है और यह लगातार दूसरी तिमाही है, जब भारत की विकास दर चीन से कम रही है। इस गिरावट का कारण यह है कि नोटबंदी का प्रभाव लंबे समय तक कायम रहा और जीएसटी लाॉन्च होने से पहले विनिर्माण क्षेत्र में सुस्ती आ गई।
जेटली ने हाल में विकास दर कम रहने के लिए जीएसटी से पहले वस्तुओं की डिस्टॉकिंग को जिम्मेदार ठहराया था और उम्मीद जताई थी कि आर्थिक विकास दर सात फीसदी रहेगी, क्योंकि विनिर्माण क्षेत्र ने निचला स्तर छू लिया है और इसमें आगे तेजी आने की उम्मीद है।
जेटली ने कहा कि आप एक अर्थव्यवस्था में लगातार खर्च करते हैं। लगातार अपने बैंकों की मदद करते हैं और राजकोषीय समझदारी को बनाए रखने में किस प्रकार तालमेल बिठाते हैं यह महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि राजकोषीय समझदारी बनाए रखना सबसे चुनौतीपूर्ण है, जिसका हम सामना कर रहे हैं।
उन्होंने इस बात को दोहराया कि सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है। हालांकि उन्होंने बेलआउट पैकेज देने पर चुप्पी साध ली।
जेटली ने हाल में विकास दर कम रहने के लिए जीएसटी से पहले वस्तुओं की डिस्टॉकिंग को जिम्मेदार ठहराया था और उम्मीद जताई थी कि आर्थिक विकास दर सात फीसदी रहेगी, क्योंकि विनिर्माण क्षेत्र ने निचला स्तर छू लिया है और इसमें आगे तेजी आने की उम्मीद है।
जेटली ने कहा कि आप एक अर्थव्यवस्था में लगातार खर्च करते हैं। लगातार अपने बैंकों की मदद करते हैं और राजकोषीय समझदारी को बनाए रखने में किस प्रकार तालमेल बिठाते हैं यह महत्वपूर्ण है। मुझे लगता है कि राजकोषीय समझदारी बनाए रखना सबसे चुनौतीपूर्ण है, जिसका हम सामना कर रहे हैं।
उन्होंने इस बात को दोहराया कि सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है। हालांकि उन्होंने बेलआउट पैकेज देने पर चुप्पी साध ली।