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भारत में 2023 तक 20 लाख करोड़ बढ़ जाएगा डिजिटल लेनदेन
Wed, 25 Nov 2020 05:51 AM IST
Jeet Kumar
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 25 Nov 2020 05:51 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
डिजिटलीकरण की तरफ बढ़ रही भारतीय अर्थव्यवस्था को कोविड-19 महामारी ने और तेज कदम बढ़ाने के लिए मजबूर कर दिया है। बदलते हालात में अधिकतर बैंक डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने वाले तंत्र विकसित कर रहे हैं। अनुमान है कि 2023 तक डिजिटल भुगतान में करीब 20 लाख करोड़ का और इजाफा हो जाएगा।
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असेंचर ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में बताया कि अगले तीन साल में डिजिटल लेनदेन में करीब 66.6 अरब ट्रांजेक्शन का इजाफा होगा और 270 अरब डॉलर (19.98 लाख करोड़ रुपये) का नकद लेनदेन कार्ड व डिजिटल रूप में बदल जाएगा। इतना ही नहीं 2030 तक डिजिटल लेनदेन में 856 अरब डॉलर (64.08 लाख करोड़ रुपये) का इजाफा होने का अनुमान है।
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इसका सबसे बड़ा कारण महामारी है, जिसने बैंकों ने डिजिटलीकरण अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है। डिजिटल भुगतान कंपनियों के 120 से भी ज्यादा कार्यकारी अधिकारियों से बातचीत पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, बैंक भी दशकों बाद नए तरह के नियमों को अपनाने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
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वैश्विक स्तर पर तीन साल में 51.8 लाख करोड़ बढ़ेगा डिजिटल लेनदेन
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर भी डिजिटलीकरण में तेजी आएगी और 2023 तक डिजिटल ट्रांजेक्शन में 420 का इजाफा होगा। इससे करीब 51.8 लाख करोड़ रुपये का नकदी लेनदेन डिजिटल प्लेटफॉर्म में बदल जाएगा।
इतना ही नहीं 2030 तक यह राशि बढ़कर 3,552 लाख करोड़ रुपये पहुंच जाएगी। असेंचर ने सर्वे में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, नॉर्वे, सिंगापुर, थाईलैंड, भारत, ब्रिटेन और अमेरिका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया है।
75 फीसदी बैंक बना रहे नया भुगतान तंत्र
सर्वे में शामिल 75 फीसदी बैंकों ने डिजिटल भुगतान के लिए नया तंत्र विकसित करना शुरू कर दिया है। असेंचर में भुगतान सेवाओं की अगुवाई करने वाले सुलभ अग्रवाल का कहना है कि फिनटेक कंपनियां डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए नए-नए प्लेटफॉर्म ला रही हैं। इनसे मुकाबला करने के लिए बैंकों को भी बदलाव करने होंगे। अभी सरकारी बैंकों के बड़ी संख्या में डिजिटल लेनदेन फेल हो रहे हैं।
कॉरपोरेशन बैंक के 14 फीसदी डिजिटल लेनदेन असफल रहे हैं। इसके अलावा केनरा बैंक में 9.8 और बैंक ऑफ इंडिया में 4.2 फीसदी डिजिटल लेनदेन असफल साबित हुए हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए बैंकों को अपनी तकनीक और बेहतर बनानी होगी।