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नोटबंदी और मंदी से कम हो रहे नौकरियों के अवसर: एसोचैम
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Mon, 11 Dec 2017 09:51 PM IST
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नोटबंदी, व्यापार के लिए प्रतिकूल माहौल और नई परियोजनाओं के रुकने को उद्योग एवं वाणिज्य संगठन एसोचैम ने बी-कैटेगरी के बिजनेस स्कूलों में कम हो रहे नौकरी के अवसरों के लिए जिम्मेदार बताया है। एसोचैम का कहना है कि बी-कैटेगरी के बिजनेस स्कूलों को केवल 20 फीसदी छात्रों को नौकरियों के ऑफर आ रहे हैं।
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एसोचैम का कहना है कि बी-कैटेगरी के बिजनेस स्कूलों को अपने छात्रों के प्लेसमेंट के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ रहा है क्योंकि उनके केवल 20 फीसदी छात्रों को नौकरियों के ऑफर आ रहे हैं। एसोचैम के अनुसार, हाल के समय में यह साल उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रहा।
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उसका कहना है कि पिछले साल की तुलना में कैंपस प्लेसमेंट 10 फीसदी घटकर 20 फीसदी हो गया। वहीं उसका यह भी कहना है कि इन बिजनेस स्कूलों और इंजीनियरिंग के छात्रों को जो सैलरी पैकेज ऑफर किया जाता है उनमें भी पिछले साल की तुलना में 40-45 फीसदी कमी आई है।
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एसोचैम शिक्षा परिषद (एईसी) ने कहा कि बहुत से छात्र तीन से चार साल के इस कोर्स में दाखिला लेकर लाखों रुपये खर्च करने के बारे में दोबारा सोचने पर मजबूर हो गए हैं। वहीं चैंबर ने कहा कि 400 से अधिक संस्थान पर्याप्त छात्र न मिलने के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं।
दिल्ली सहित बड़े शहरों में बंद हो गए 250 संस्थान
एसोचैम के अनुसार अधिकतर बिजनेस स्कूल और इंजीनियरिंग कॉलेज छात्रों को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं। 2015 से अब तक दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बंगलूरू, अहमदाबाद, कोलकाता, लखनऊ, देहरादून आदि बड़े शहरों में 250 से अधिक बिजनेस स्कूल बंद हो चुके हैं। वहीं अन्य 99 टिके रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
समस्या और समाधान
एसोचैम ने कहा कि असली समस्या यह है कि सारा ध्यान केवल सीटें भरने पर है ना कि छात्रों की गुणवत्ता पर। उसने बुनियादी ढांचे का सुधारने, फैकल्टी को प्रशिक्षित करने, औद्योगिक संबंधों पर काम करने और शोध और ज्ञान सृजन पर पैसे खर्च करने के साथ छात्रों को नौकरी योग्य बनाने का सुझाव दिया है।