{"_id":"60663c525cd01661444a2cde","slug":"decision-on-cut-small-interest-rates-withdrawn-even-before","type":"story","status":"publish","title_hn":"यू-टर्न :पहले भी वापस लिया गया है छोटी ब्याज दरों में कटौती का फैसला","category":{"title":"Business","title_hn":"कारोबार","slug":"business"}}
यू-टर्न :पहले भी वापस लिया गया है छोटी ब्याज दरों में कटौती का फैसला
Fri, 02 Apr 2021 06:51 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 02 Apr 2021 06:51 AM IST
सार
- मार्च 2016 में तत्कालीन वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कम कराई थी कटौती
- तभी से ब्याज दरों में कटौती के फैसले में वित्तमंत्री की सहमति जरूरी बना दी गई
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर...
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र सरकार द्वारा छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती का फैसला वापस लेने का यह पहला मामला नहीं है। पांच साल पहले भी इसे वापस लिया गया था और उस वक्त भी मोदी सरकार ही सत्ता में थी।
विज्ञापन
सरकार ने 16 मार्च 2016 को छोटी बचत योजनाओं में बड़ी कटौती की घोषणा की थी। उस समय भी पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और असम में विधानसभा चुनाव हो रहे थे। इन योजनाओं में एक से लेकर 1.5 प्रतिशत तक की कमी की गई थी।
विज्ञापन
इस कटौती की गणना 2011 में पेश की गई श्यामला गोपीनाथ समिति की सिफारिशों के अनुरूप वित्त मंत्रालय ने की थी। हालांकि तत्कालीन वित्तमंत्री अरुण जेटली ने इतने बड़े फैसले की उन्हें पूर्व सूचना न होने पर कड़ी आपत्ति जताई थी और अगले ही दिन उन्होंने कई योजनाओं की ब्याज दरों में की गई कटौती को वापस ले लिया था।
विज्ञापन
18 मार्च को एक अन्य अधिसूचना जारी कर नई ब्याज दरों की घोषणा की गई थी। इनमें बचत खाते की ब्याज दरों में कटौती नहीं की गई थी जबकि एक वर्ष के सावधि जमा की दर 8.4 प्रतिशत से घटाकर पर 7.1 कर दी गई थी और पीपीएफ की ब्याज दर 8.7 से घटाकर 8.1 की गई थी।
इसी घटना के बाद वित्त मंत्रालय में एक अघोषित नियम बना दिया गया था कि छोटी बचत योजनाओं ब्याज दरों में कटौती की घोषणा पर वित्तमंत्री की सहमति अवश्य होनी चाहिए।
श्यामला गोपीनाथ समिति तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने 13वें वित्तीय आयोग की सिफारिशों के अनुरूप 8 जुलाई 2010 को छोटी बचत योजनाओं में सुधार के लिए बनाई थी।
रिजर्व बैंक की तत्कालीन डिप्टी गवर्नर श्यामला गोपीनाथ के नेतृत्व में बनी इस समिति में वित्त मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव शक्तिकांत दास (जो अब आरबीआई के गवर्नर है), स्टेट बैंक के एमडी आर श्रीधरण, फिक्की के सेक्रेटरी जनरल राजीव कुमार, वित्त मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार अनिल बिसेन के अलावा पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के वित्त सचिव सुधीर श्रीवास्तव और सीएम बछावत शामिल थे।
इसी समिति द्वारा बनाए फार्मूले से ही छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों की गणना की जाती है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार 2004 से 2014 के बीच छोटी बचत योजनाओं की दरों में केवल तीन बार बदलाव किए गए जबकि उसके बाद से अभी तक इनमें 21 बार बदलाव किया जा चुका है। अब हर तिमाही इनकी समीक्षा की जाती है।