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Cryptocurrency: एल सल्वाडोर के क्लब में शामिल हुआ ये देश, बिटक्वाइन को बनाया लीगल टेंडर, जानें क्यों उठाया यह कदम
Fri, 29 Apr 2022 11:08 AM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Fri, 29 Apr 2022 11:08 AM IST
सार
सबसे पहले एल सल्वाडोर ने बिटक्वाइन को आधिकारिक करेंसी के रूप में मान्यता दी, तो अब एक और देश इस क्लब में शामिल हो गया है। सोने और हीरे के भंडार होने के बावजूद गरीब देशों में गिना जाने वाले अफ्रीकी देश सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक ने भी इसे करेंसी के तौर पर अपना लिया है।
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बिटकॉइन
- फोटो : iStock
विस्तार
दुनिया में क्रिप्टोकरेंसी के प्रति लोगों की दीवानगी बढ़ती जा रही है, तो दूसरी ओर इस लीगल टेंडर के रूप में मान्यता देने के मामले में कई देश रुचि दिखा रहे हैं। सबसे पहले एल सल्वाडोर ने बिटक्वाइन को आधिकारिक करेंसी के रूप में मान्यता दी, तो अब एक और देश इस क्लब में शामिल हो गया है। सोने और हीरे के भंडार होने के बावजूद गरीब देशों में गिना जाने वाले अफ्रीकी देश सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक ने भी इसे करेंसी के तौर पर अपना लिया है।
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नागिरकों के हित में लिया फैसला
रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक की सरकार ने बीते बुधवार को बिटक्वाइन को आधिकारिक करेंसी के रूप में अपनी मंजूरी दे दी। गौरतलब है कि क्रिप्टोकरेंसी को करेंसी के रूप में अपनाने के लिए यहां की संसद में एक बिल पेश किया गया था, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। देश के राष्ट्रपति फॉस्टिन अर्चेंज टौडेरा के कार्यालय की ओर से जारी किए गए बयान के अनुसार, देश के नागरिकों का जीवन सुधारने के उद्देश्य से ये फैसला लिया गया है। लंबे समय तक हिंसा की मार झेलने वाले देश के राष्ट्रपति ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा है कि ये कदम देश के नागरिकों का जीवन स्तर सुधारने में मदद करेगा और सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक के लिए बड़े अवसरों का द्वार खोलेगा।
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2021 में एल सल्वाडोर ने उठाया था कदम
बिटक्वाइन को करेंसी के रूप में मान्यता देने के मामले में दुनिया का पहला देश एल साल्वाडोर है। यहां बीते साल सात सितंबर 2021 को अपना लिया गया था। यहीं नहीं देश में बिटक्वाइन सिटी बनाने की चर्चाएं भी सामने आई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले को रोलआउट करने के लिए एल साल्वाडोर ने 400 बिटकॉइन खरीदे थे, उस समय इसकी कीमत ट्रेडिंग प्राइस के हिसाब से करीब 21 मिलियन डॉलर थी। वहीं अब इसकी कीमत गिरावट के बावजूद भी आसमान छू रही है।
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क्यूबा भी इस सूची में हुआ शामिल
एल सल्वाडोर के बाद क्यूबा भी ऐसा देश बना था जिसने अपने यहां क्रिप्टोकरेंसी को कानूनी रूप से मान्यता देने का फैसला किया है। एक ओर जहां एल सल्वाडोर में दक्षिणपंथी सरकार है। क्यूबा सरकार के मुताबिक, क्यूबा का सेंट्रल बैंक अब क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल को सामाजिक-आर्थिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए अधिकृत कर सकता है।
कनाडा-इजरायल भी पक्ष में
एक रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा राजस्व प्राधिकरण (सीआरए) आम तौर पर देश के आयकर अधिनियम के प्रयोजनों के लिए क्रिप्टोकरेंसी को एक वस्तु की तरह मानता है। इजरायल ने अपने वित्तीय सेवा कानून के तहत वित्तीय परिसंपत्तियों के तौर पर आभाषी करेंसी को शामिल कर लिया है.। इजरायल में क्रिप्टोकरेंसी को वित्तीय परिसंपत्ति मानते हुए उसपर 25 फीसदी कैपिटल गेन टैक्स लगाया गया है। जर्मनी ने क्रिप्टोकरेंसी को फाइनैंशियल इंस्ट्रूमेंट माना है।
थाइलैंड में लेना होता है लाइसेंस
इन देशों की फेहरिस्त में थाइलैंड भी शामिल है। यहां डिजिटल एसेट्स में कारोबार करने के लिए लाइसेंस लेना होता है। यहां बता दें कि इनमें से ज्यादातर देशों ने क्रिप्टोकरेंसी को लीगल टेंडर तो नहीं माना गया है, लेकिन ये देश इस बात से वाकिफ हैं कि आज इनकी कितनी वैल्यू है। इसलिये ये इन्हें एक्सचेंज का माध्यम या फिर यूनिट्स ऑफ अकाउंट मानते हैं।