सिक्का ने दिया Infosys के सीईओ पद से इस्तीफा, एन मूर्ति के दखल को बताया वजह

amarujala.com- Written by: अनंत पालीवाल Updated Fri, 18 Aug 2017 04:55 PM IST
vishal sikka
vishal sikka
विज्ञापन
ख़बर सुनें
देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार इन्फोसिस के सीईओ पद से विशाल सिक्का के इस्तीफे के बाद कंपनी की अंदरूनी लड़ाई बाहर आ गई है। बता दें कि सिक्का ने इस्तीफे के बाद दिए बयान में इसके लिए देश की इस दिग्‍गज आईटी कंपनी के पूर्व चेयरमैन और फांउडर रहे एनआर नारायणमूर्ति के अनावश्यक हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि कंपनी ने सिक्का के पद का ख्याल रखते हुए उन्हें एक्यजीक्यूटिव वाइस चेयरमैन बनाया था। जबकि उनकी जगह कंपनी के सीओओ यूबी प्रवीण राव को सीईओ की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी। 
विज्ञापन


इस्तीफे के बाद सिक्का ने तीन पेज का खत लिखते हुए कंपनी के कर्मचारियों और अधिकारियों को संबोधित किया था। जिसमें उन्होंने अपने काम में नारायणमूर्ति के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर आरोप लगाया था कि इसके कारण काम करना अब मुश्किल होता जा रहा है। वहीं सिक्का के यह आरोप सामने आने के बाद कंपनी ने भी इस संबंध में अपना बयान जारी कर दिया। कंपनी के को चेयरमैन आर वेंकटेशन ने कहा हमें काफी दुख के साथ उनका इस्तीफा स्वीकार करना पड़ रहा है।

 


वहीं नारायणमूर्ति ने सिक्का के आरोपों के संबंध में कहा कि मैं उचित मंच और उचित वक्त पर इन बेबुनियाद आरोपों का जवाब दूंगा।
 


बता दें कि यह सारा विवाद उस समय शुरू हुआ था जब कुछ समय पहले कंपनी की परफारमेंस खराब रहने पर इंफोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायणमूर्ति ने नाराजगी जताई थी। उनकी नाराजगी इस बात को लेकर ज्यादा थी कि खराब परफारमेंस में जहां कंपनी के बाकी कर्मचारियों के वेतन में मात्र 6-7 फीसदी तक की वृद्िध की गई वहीं कंपनी के सीओओ प्रवीण राव का वेतन बेतहाशा बढ़ाया गया। इसके अलावा कंपनी के सीईओ विशाल सिक्का के वेतन में भी अच्छी खासी वृद्धि हुई थी। नारायणमूर्ति ने बकायदा खत लिखकर इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों अधिकारियों के वेतन में कटौती की गई थी। इसी के बाद से सिक्का लगातार नाराज चल रहे थे।

पढ़ें- इंफोसिस विवाद: कंपनी के कामकाज से नाखुश फाउंडर्स ने लिया शेयर्स बेचने का फैसला

इंफोसिस के सह-संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति ने एक बिजनेस चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि 2014 में इंफोसिस को छोड़ना उनकी सबसे बड़ी भूल थी। उन्होंने बताया कि कंपनी के कई सहकर्मियों ने उन्हें कंपनी न छोड़ने के लिए मना किया था। 

हालांकि इंफोसिस के मौजूदा सीईओ विशाल सिक्का के साथ विवादों को लेकर हाल के दिनों में चर्चित रहे मूर्ति ने कहा कि वह कैंपस को मिस नहीं करते। उन्होंने कहा कि उन्हें कंपनी छोड़ने का बेहद दुख है। निजी और व्यवसाय जीवन में की गलतियों पर उन्होंने कहा कि उनके कई फांउडर साथियों ने उन्हें 2014 में कंपनी को छोड़ने को मना किया था।

सहकर्मियों का कहना था कि मुझे कुछ सालों तक चेयरमैन के पद पर बने रहना चाहिए। उन्होंने इंटरव्यू में आगे कहा कि वे खुद को आमतौर पर बेहद भावुक मानते हैं और उनके ज्यादातर फैसले आदर्शवाद पर आधारित होते हैं उन्होंने ये भी कहा कि संभवत: उन्हें उन लोगों की सलाह के बारे में भी सोचना चाहिए।

बता दें कि मूर्ति कंपनी के सीओओ प्रवीण राव की सैलरी बढ़ाने से भी नाखुथ थे। दरअसल, नारायणमूर्ति कंपनी में चल रहे मनमानी के माहौल से नाराज हैं। उन्होंने इसके खिलाफ कई बार आवाज भी उठाई थी। प्रवीण की सैलरी के मामले में उनकी सैलरी बढ़ाकर 4.60 करोड़ कर दी गई।

उन्होंने कहा कि ये बढ़ोत्तरी इंफोसिस की निष्पक्षता के खिलाफ है। जहां सामान्य कर्मचारियों को 6-7 फीसदी ही वृद्धि मिली ऐसे में कंपनी के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति को इतनी वृद्धि देना सही नहीं है। मूर्ति ने 33 साल पहले छह लोगों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की थी और 2014 में विवाद के चलते कंपनी से इस्तीफा दे दिया। 

सैलरी में हुआ था भारी नुकसान

N.R Narayan Murthy
N.R Narayan Murthy
इससे पहले, इंफोसिस की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के सीईओ विशाल सिक्का को सैलरी में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। इंफोसिस को मौजूदा कारोबारी साल में नुकसान का असर उसके सीईओ की सैलरी पर भी पड़ा था। उन्हें इस साल के लिए 16.01 करोड़ का पैकेज मिला, जो पिछले साल 48.73 करोड़ से काफी कम था। खास बात ये है सिक्का की पहली बढ़ी सैलरी पर इंफोसिस के संस्‍थापक नारायणमूर्ति इशारों इशारों में आपत्ति जता चुके थे।

जिसके बाद विशाल सिक्का की सालाना कमाई में इस तरह 67% की कमी आई। उन्हें इस साल सैलरी के तौर पर 1 मिलियन डॉलर यानि 6 करोड़ 47 लाख रुपए से अधिक मिले थे। पिछले साल उन्हें 0.9 मिलियन डॉलर तनख्वाह के तौर पर मिले। उनके बोनस में इस साल भारी गिरावट आई है। उन्हें पिछले साल 2.88 मिलियन डॉलर बतौर बोनस मिले थे, पर इस साल बोनस के तौर उन्हें सिर्फ 0.82 मिलियर डॉलर की धनराशि मिली है।

वैसे, सिक्का को मिलने वाली नकद धनराशि में भले ही भारी कटौती हुई हो, पर बोनस और ग्रांट स्टॉक के तौर पर मिलने वाले फायदे में सिर्फ 7प्रतिशत की ही कटौती हुई है। उन्हें पिछले साल 48.41 करोड़ की तुलना में इस साल 45.11 करोड़ का फायदा हुआ।

सिक्का को पिछले साल 2.88 मिलियन डॉलर के परफॉर्मंस बेस्ड स्टॉक इंसेंटिव के तौर पर मिले थे, पर इस साल ये आंकड़ा 2 मिलियन का है। वैसे, सिक्का की तनख्वाह में भले ही भारी कटौती हुई हो, पर बाकी के सीनियर अधिकारियों की सैलरी में बढ़ोतरी ही हुई है। इंफोसिस के सीओओ यू बी प्रवीन रॉव की टोटल सैलरी 8.14 करोड़ से बढ़कर 11.80 करोड़ हो गई है।
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और बजट 2020 से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00