सिक्का ने दिया Infosys के सीईओ पद से इस्तीफा, एन मूर्ति के दखल को बताया वजह
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इस्तीफे के बाद सिक्का ने तीन पेज का खत लिखते हुए कंपनी के कर्मचारियों और अधिकारियों को संबोधित किया था। जिसमें उन्होंने अपने काम में नारायणमूर्ति के बढ़ते हस्तक्षेप को लेकर आरोप लगाया था कि इसके कारण काम करना अब मुश्किल होता जा रहा है। वहीं सिक्का के यह आरोप सामने आने के बाद कंपनी ने भी इस संबंध में अपना बयान जारी कर दिया। कंपनी के को चेयरमैन आर वेंकटेशन ने कहा हमें काफी दुख के साथ उनका इस्तीफा स्वीकार करना पड़ रहा है।
I have no interest in being the next CEO, not in contention for the position: #Infosys Co-chairman Ravi Venkatesan pic.twitter.com/S9waNt2uMF
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) August 18, 2017
वहीं नारायणमूर्ति ने सिक्का के आरोपों के संबंध में कहा कि मैं उचित मंच और उचित वक्त पर इन बेबुनियाद आरोपों का जवाब दूंगा।
Below my dignity to respond to such baseless insinuations;Will reply to allegations at appropriate time on right forum: Narayana Murthy
— ANI (@ANI) August 18, 2017
बता दें कि यह सारा विवाद उस समय शुरू हुआ था जब कुछ समय पहले कंपनी की परफारमेंस खराब रहने पर इंफोसिस के पूर्व चेयरमैन नारायणमूर्ति ने नाराजगी जताई थी। उनकी नाराजगी इस बात को लेकर ज्यादा थी कि खराब परफारमेंस में जहां कंपनी के बाकी कर्मचारियों के वेतन में मात्र 6-7 फीसदी तक की वृद्िध की गई वहीं कंपनी के सीओओ प्रवीण राव का वेतन बेतहाशा बढ़ाया गया। इसके अलावा कंपनी के सीईओ विशाल सिक्का के वेतन में भी अच्छी खासी वृद्धि हुई थी। नारायणमूर्ति ने बकायदा खत लिखकर इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों अधिकारियों के वेतन में कटौती की गई थी। इसी के बाद से सिक्का लगातार नाराज चल रहे थे।
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इंफोसिस के सह-संस्थापक एन आर नारायणमूर्ति ने एक बिजनेस चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि 2014 में इंफोसिस को छोड़ना उनकी सबसे बड़ी भूल थी। उन्होंने बताया कि कंपनी के कई सहकर्मियों ने उन्हें कंपनी न छोड़ने के लिए मना किया था।
हालांकि इंफोसिस के मौजूदा सीईओ विशाल सिक्का के साथ विवादों को लेकर हाल के दिनों में चर्चित रहे मूर्ति ने कहा कि वह कैंपस को मिस नहीं करते। उन्होंने कहा कि उन्हें कंपनी छोड़ने का बेहद दुख है। निजी और व्यवसाय जीवन में की गलतियों पर उन्होंने कहा कि उनके कई फांउडर साथियों ने उन्हें 2014 में कंपनी को छोड़ने को मना किया था।
सहकर्मियों का कहना था कि मुझे कुछ सालों तक चेयरमैन के पद पर बने रहना चाहिए। उन्होंने इंटरव्यू में आगे कहा कि वे खुद को आमतौर पर बेहद भावुक मानते हैं और उनके ज्यादातर फैसले आदर्शवाद पर आधारित होते हैं उन्होंने ये भी कहा कि संभवत: उन्हें उन लोगों की सलाह के बारे में भी सोचना चाहिए।
बता दें कि मूर्ति कंपनी के सीओओ प्रवीण राव की सैलरी बढ़ाने से भी नाखुथ थे। दरअसल, नारायणमूर्ति कंपनी में चल रहे मनमानी के माहौल से नाराज हैं। उन्होंने इसके खिलाफ कई बार आवाज भी उठाई थी। प्रवीण की सैलरी के मामले में उनकी सैलरी बढ़ाकर 4.60 करोड़ कर दी गई।
उन्होंने कहा कि ये बढ़ोत्तरी इंफोसिस की निष्पक्षता के खिलाफ है। जहां सामान्य कर्मचारियों को 6-7 फीसदी ही वृद्धि मिली ऐसे में कंपनी के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति को इतनी वृद्धि देना सही नहीं है। मूर्ति ने 33 साल पहले छह लोगों के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना की थी और 2014 में विवाद के चलते कंपनी से इस्तीफा दे दिया।
सैलरी में हुआ था भारी नुकसान
इससे पहले, इंफोसिस की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी के सीईओ विशाल सिक्का को सैलरी में बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। इंफोसिस को मौजूदा कारोबारी साल में नुकसान का असर उसके सीईओ की सैलरी पर भी पड़ा था। उन्हें इस साल के लिए 16.01 करोड़ का पैकेज मिला, जो पिछले साल 48.73 करोड़ से काफी कम था। खास बात ये है सिक्का की पहली बढ़ी सैलरी पर इंफोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति इशारों इशारों में आपत्ति जता चुके थे।
जिसके बाद विशाल सिक्का की सालाना कमाई में इस तरह 67% की कमी आई। उन्हें इस साल सैलरी के तौर पर 1 मिलियन डॉलर यानि 6 करोड़ 47 लाख रुपए से अधिक मिले थे। पिछले साल उन्हें 0.9 मिलियन डॉलर तनख्वाह के तौर पर मिले। उनके बोनस में इस साल भारी गिरावट आई है। उन्हें पिछले साल 2.88 मिलियन डॉलर बतौर बोनस मिले थे, पर इस साल बोनस के तौर उन्हें सिर्फ 0.82 मिलियर डॉलर की धनराशि मिली है।
वैसे, सिक्का को मिलने वाली नकद धनराशि में भले ही भारी कटौती हुई हो, पर बोनस और ग्रांट स्टॉक के तौर पर मिलने वाले फायदे में सिर्फ 7प्रतिशत की ही कटौती हुई है। उन्हें पिछले साल 48.41 करोड़ की तुलना में इस साल 45.11 करोड़ का फायदा हुआ।
सिक्का को पिछले साल 2.88 मिलियन डॉलर के परफॉर्मंस बेस्ड स्टॉक इंसेंटिव के तौर पर मिले थे, पर इस साल ये आंकड़ा 2 मिलियन का है। वैसे, सिक्का की तनख्वाह में भले ही भारी कटौती हुई हो, पर बाकी के सीनियर अधिकारियों की सैलरी में बढ़ोतरी ही हुई है। इंफोसिस के सीओओ यू बी प्रवीन रॉव की टोटल सैलरी 8.14 करोड़ से बढ़कर 11.80 करोड़ हो गई है।