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20,000 करोड़ नहीं लौटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 21 Feb 2014 12:31 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने आदेश के बावजूद निवेशकों को 20,000 करोड़ रुपये नहीं लौटाने के मामले में सहारा समूह के खिलाफ बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत राय को समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने बाजार नियामक सेबी को सहारा समूह की कंपनियों की संपत्तियां बेचकर रिकवरी करने की भी अनुमति दी है।
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सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की कंपनियों सहारा इंडिया रीयल एस्टेट कार्प लिमिटेड (एसआईआरईसी) और सहारा इंडिया हाउसिंग इनवेस्टमेंट कार्प लिमिटेड (एसएचआईसी) के निदेशकों रवि शंकर दूबे, अशोक रॉय चौधरी और वंदना भार्गव को भी 26 फरवरी को पेश होने का आदेश दिया है।
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जस्टिस केएस राधाकृष्णन और जस्टिस जेएस खेहर की खंडपीठ ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) से समूह की संपत्तियां, जिनकी सेल डीड उसके पास है, बेचकर 20 हजार करोड़ रुपये की वसूली करने को कहा है।
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खंडपीठ ने सेबी से कहा कि जिस संपत्तियों की सेल डीड उसके पास है, वह उन्हें बेच सकता है। पैसे की रिकवरी के लिए कोर्ट इसकी अनुमति देता है। यदि उन संपत्तियों पर कर्ज का बोझ हो, तो सेबी कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करा सकता है।
अदालत ने कहा कि सेबी संपत्तियों की नीलामी कर पैसे हासिल कर सकता है। पिछले करीब डेढ़ साल से अपने आदेश की अवहेलना को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के खिलाफ बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है।
सेबी ने कोर्ट के समक्ष कहा कि कंपनी को खुद ही अपनी संपत्तियां बेचकर पैसे जमा कराने दिया जाए, इस पर अदालत ने कहा कि संपत्तियां बेचने में क्या परेशानी है, इन्हें नीलाम कर पैसे हासिल करें। संपत्ति के मूल्य की चिंता न करें। हमारा ऐसा मानना है कि वह ऐसा नहीं करेंगे और हमें उन पर भरोसा नहीं है, इसलिए नियामक खुद ऐसा करे।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2012 को अपने फैसले में सेबी को सहारा समूह से पैसे की रिकवरी के लिए उनकी संपत्तियों को अटैच करने का आदेश दिया था।