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एस्सार स्टील को लगा हाईकोर्ट से झटका, खारिज की आरबीआई के खिलाफ दायर याचिका
amarujala.com- Presented by: अनंत पालीवाल
Updated Mon, 17 Jul 2017 04:02 PM IST
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भारतीय रिजर्व बैंक
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देश की प्रमुख स्टील कंपनियों में शुमार एस्सार स्टील को गुजरात हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के फैसले को चुनौती दी थी। आरबीआई ने एस्सार स्टील के मामले को कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी सीएलटी में भेज दिया था।
कंपनी ने लगाया था भेदभाव करने का आरोप
एस्सार स्टील ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर करके आरबीआई पर भेदभाव करने का आरोप लगाया था। एस्सार स्टील ने बैंकों से करीब 40 हजार करोड़ रुपये का लोन लिया था, जिसे वो चुका नहीं पाया था।
इसके बाद आरबीआई ने बैंकरप्सी एंड इनसॉल्वेंसी कोड के तहत कंपनी पर कार्रवाई की थी। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद एस्सार स्टील को अपना लोन चुकाना पड़ेगा, जो उसने कई बैंकों से लिया है।
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गुजरात हाई कोर्ट के फैसले से आरबीआई और एस्सार स्टील को लोन देने वाले बैंकों का पक्ष मजबूत हुआ है। एस्सार स्टील बैंकों का करीब 40,000 करोड़ रुपये का लोन नहीं चुका पाया है।
13 जून आरबीआई ने जारी किया था निर्देश
बैंकों के फंसे हुए कर्ज की समस्या का समाधान करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कार्रवाई तेज कर दी है। आरबीआई ने ऐसे 12 खातों की पहचान की है, जिनमें प्रत्येक पर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। कर्ज की यह राशि बैंकों के कुल एनपीए (फंसा कर्ज) का करीब 25 फीसदी है।
आरबीआई ने बैंकों से इन खातेदारों के खिलाफ दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। देश के बैंकों के कुल 8 लाख करोड़ रुपये एनपीए में तब्दील हो चुके हैं, इनमें से छह लाख करोड़ रुपये सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का है। 25 फीसदी के हिसाब से करीब दो लाख करोड़ रुपये की देनदारी महज 12 खाताधारकों पर है।
दरअसल, आरबीआई कर्ज न चुकाने वालों की पहचान कर रहा है। इसके तहत 500 डिफॉल्टरों में से शुरू में इन 12 की पहचान की गई है। आरबीआई के मुताबिक, ये 12 खाते तत्काल दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के तहत आते हैं। हालांकि केंद्रीय बैंक ने डिफॉल्टरों के नाम का खुलासा नहीं किया है।
रिजर्व बैंक ने एक आंतरिक सलाहकार समिति (आईएसी) गठित की थी। इसमें ज्यादा संख्या में स्वतंत्र बोर्ड सदस्यों को शामिल किया गया है। यह समिति आरबीआई को उन मामलों में सलाह देती है जिनमें दिवाला कानून के तहत कारवाई की जा सकती है।
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कंपनी ने लगाया था भेदभाव करने का आरोप
एस्सार स्टील ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर करके आरबीआई पर भेदभाव करने का आरोप लगाया था। एस्सार स्टील ने बैंकों से करीब 40 हजार करोड़ रुपये का लोन लिया था, जिसे वो चुका नहीं पाया था।
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इसके बाद आरबीआई ने बैंकरप्सी एंड इनसॉल्वेंसी कोड के तहत कंपनी पर कार्रवाई की थी। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद एस्सार स्टील को अपना लोन चुकाना पड़ेगा, जो उसने कई बैंकों से लिया है।
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गुजरात हाई कोर्ट के फैसले से आरबीआई और एस्सार स्टील को लोन देने वाले बैंकों का पक्ष मजबूत हुआ है। एस्सार स्टील बैंकों का करीब 40,000 करोड़ रुपये का लोन नहीं चुका पाया है।
13 जून आरबीआई ने जारी किया था निर्देश
बैंकों के फंसे हुए कर्ज की समस्या का समाधान करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने कार्रवाई तेज कर दी है। आरबीआई ने ऐसे 12 खातों की पहचान की है, जिनमें प्रत्येक पर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। कर्ज की यह राशि बैंकों के कुल एनपीए (फंसा कर्ज) का करीब 25 फीसदी है।
आरबीआई ने बैंकों से इन खातेदारों के खिलाफ दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। देश के बैंकों के कुल 8 लाख करोड़ रुपये एनपीए में तब्दील हो चुके हैं, इनमें से छह लाख करोड़ रुपये सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का है। 25 फीसदी के हिसाब से करीब दो लाख करोड़ रुपये की देनदारी महज 12 खाताधारकों पर है।
दरअसल, आरबीआई कर्ज न चुकाने वालों की पहचान कर रहा है। इसके तहत 500 डिफॉल्टरों में से शुरू में इन 12 की पहचान की गई है। आरबीआई के मुताबिक, ये 12 खाते तत्काल दिवाला और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) के तहत आते हैं। हालांकि केंद्रीय बैंक ने डिफॉल्टरों के नाम का खुलासा नहीं किया है।
रिजर्व बैंक ने एक आंतरिक सलाहकार समिति (आईएसी) गठित की थी। इसमें ज्यादा संख्या में स्वतंत्र बोर्ड सदस्यों को शामिल किया गया है। यह समिति आरबीआई को उन मामलों में सलाह देती है जिनमें दिवाला कानून के तहत कारवाई की जा सकती है।