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नियामक के रडार पर दागी कंपनियों से अचानक इस्तीफा देने वाली PwC समेत कई ऑडिट फर्म
Thu, 20 Aug 2020 01:40 PM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Thu, 20 Aug 2020 01:40 PM IST
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investigation
- फोटो : pixabay
नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (एनएफआरए) ने बीते महीनों में ऑडिटर्स के अचानक इस्तीफा देने के मामलों की जांच शुरू कर दी है। इस संदर्भ में विवादित फर्म रही प्राइसवाटरहाउसकूपर्स (पीडब्ल्यूसी) के साथ कुछ अन्य कंपनियां भी शामिल हैं। मालूम हो कि पिछले दो सालों में भारत के उद्योग जगत में कई वित्तीय फ्रॉड के मामले सामने आए हैं, जिसको ध्यान में रखते हुए एनएफआरए ने जांच शुरू की।
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13 अगस्त को प्राइसवाटरहाउस चार्टर्ड अकाउंटेंट एलएलपी ने जीवीके पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के वैधानिक ऑडिटर का काम छोड़ दिया था। प्राइसवाटरहाउस का आरोप था कि कंपनी मुंबई हवाई अड्डे के संचालन के ऑडिट कार्य में सहयोग नहीं कर रही है। ऑडिटर ने आरोप लगाया कि कई बार बात करने के बावजूद कंपनी ने उन्हें आवश्यक जानकारी प्रदान नहीं की। सीबीआई और ईडी पहले ही जीवीके पावर की जांच कर रहे हैं। एनएफआरए पीडब्ल्यूसी से जानना चाहती है कि क्या उसने इस्तीफा देने से पहले कंपनी में कुछ गड़बड़ियां उजागर की थीं।
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सीबीआई ने हाल ही में जीवीके समूह के चेयरमैन जीवीके रेड्डी, उनके बेटे संजय रेड्डी, उनकी कंपनी और नौ अन्य निजी कंपनियों के खिलाफ एक मामला दर्ज किया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट दायर किया है। यह रिपोर्ट पुलिस की प्राथमिक जांच रिपोर्ट (एफआईआर) के समतुल्य होती है। सितंबर 2017 में आयोजित कंपनी की वार्षिक आम बैठक में प्राइसवाटरहाउस चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एलएलपी को पांच साल के लिए विधायी ऑडिटर नियुक्त किया गया था।
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मालूम हो कि जब सत्यमेव घोटाला हुआ था, तब उसकी ऑडिटर पीडब्ल्यूसी थी। उस समय सीबीआई ने कहा था कि ऑडिटर्स ने सही मानकों का पालन नहीं किया और घोटाला होने दिया।
सेबी ने साल 2018 में प्राइसवाटरहाउस पर दो साल का प्रतिबंध लगाया था, लेकिन सैट ने कहा था कि यह अधिकार सिर्फ आईसीएआई के पास है और फिर सेबी का आदेश पलट दिया गया था।
इतना ही नहीं, पिछले साल पीडब्ल्यूसी से रिलायंस कैपिटल के ऑडिट मामले में भी पूछताछ हुई थी। रिलायंस कैपिटल ने पीडब्ल्यूसी के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी। प्राइसवाटरहाउस पर फेमा का उल्लंघन करने के मामले में ईडी ने सितंबर 2019 में 230.40 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।