इंफोसिस ने अपने कर्मचारियों को किया मालामाल, दिए 3500 करोड़ रुपये के शेयर
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देश की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस ने अपने पांच करोड़ कर्मचारियों को मालामाल कर दिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि वो अपने कर्मचारियों को शेयर देगी। हालांकि यह कंपनी के कुल पूंजीकरण का केवल 1.15 फीसदी हिस्सा होगा।
1995 से दे रही है शेयर
इंफोसिस 1995 से लगातार अपने कर्मचारियों को शेयर दे रही है। स्टॉक ओनरशिप प्रोग्राम के तहत ऐसे कर्मचारियों को शेयर दिए जाते हैं, जो कि अच्छा कार्य करते हैं। हालांकि कर्मचारी सात साल बाद ही इसको भुना सकते हैं।
कर्मचारियों को होगा 3700 करोड़ रुपये का लाभ
इंफोसिस ने कहा है कि उसके इस कदम से फिलहाल पांच करोड़ कर्मचारियों को लाभ होगा। हालांकि इसके लिए कंपनी शेयरधारकों से वार्षिक आम सभा में अनुमोदन लेकर के ऐसा करेगी।
कर्मचारी हैं सबसे बड़ी संपत्ति
इंफोसिस के सीईओ सलिल पारेख ने कहा कि उनके लिए कर्मचारी ही सबसे बड़ी संपत्ति हैं। स्टॉक ऑप्शन देकर के कंपनी लंबे समय तक कर्मचारियों को अपने साथ जोड़े रखना चाहती है। इससे कंपनी को भी लाभ पहुंचेगा।
सलिल पारेख को मिले 10 करोड़ के शेयर
इंफोसिस ने कंपनी के सीईओ सलिल पारेख और सीओओ यूबी प्रवीण राव को भी स्टॉक ऑप्शन दिए हैं। सलिल को जहां 10 करोड़ रुपये के ईसोप्स दिए गए हैं, वहीं यूबी प्रवीण राव को चार करोड़ रुपये के शेयर दिए गए हैं।
इतना है सलिल पारेख का वेतन
सलिल पारेख ने जब 2018 में इंफोसिस की कमान संभाली थी, तब कंपनी ने उनके वेतन का भी खुलासा किया था। पारेख को कुल 16.25 करोड़ रुपये तक सैलरी मिलेगी। पीटीआई के मुताबिक कंपनी पारेख को वेतन के तौर पर 6.5 करोड़ रुपये की निश्चित रकम देगी और वित्त वर्ष 2018-19 के आखिर में 9.75 करोड़ रुपये वेरियेबल सैलरी के रूप में देगी।
पारेख को रिस्ट्रिक्टेड स्टॉक यूनिट्स के तौर पर 3.25 करोड़ रुपये भी मिलेंगे। बतौर वार्षिक प्रदर्शन इक्विटी अनुदान 13 करोड़ रुपये भी मिलेगा। पारेख को 9.75 करोड़ रुपये का वन टाइम इक्विटी ग्रांट (अनुदान) भी मिलेगा।
स्टॉक मुआवजे के तौर पर मिलने वाली राशि पारेख की कार्य अवधि के दौरान तय होगी। पारेख को पांच सालों के लिए नियुक्त किया गया है। पारेख के कॉन्ट्रैक्ट में उन्हें दिए जाने वाली रकम भी स्पष्ट तौर पर बता दी गई है, अगर वे कंपनी के तय न्यूनतम लक्ष्यों को नहीं हासिल कर पाते हैं।
कंपनी के कहा है कि कंपनी छोड़ने के छह महीनों तक वे किसी अन्य प्रतिद्वंद्वी कंपनी में काम नहीं करेंगे। इंफोसिस ने कहा है कि वे कंपनी छोड़ने के बाद उन ग्राहक कंपनियों के साथ या उनके लिए भी काम नहीं करेंगे जिनको इंफोसिस में नौकरी के आखिरी 12 महीनों के दौरान उन्होंने सेवाएं दी हैं।