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मालिकों के बीच में लड़ाई से नौ फीसदी गिरा इंडिगो का शेयर

Thu, 16 May 2019 07:55 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Thu, 16 May 2019 07:55 PM IST
सार

  • 54 शहरों के लिए उड़ान भरते हैं विमान देश में। 
  • 17 विदेशी शहरों के लिए भी हैं इसकी उड़ानें। 
  • 10 साल से लगातार मुनाफे में हैं।
  • 10 साल से लगातार मुनाफे में है कंपनी 
  • 1 विमान से एयरलाइन की शुरुआत की थी। 
  • 225 विमान हैं अब एयरलाइन के पास। 
  • 46.9% मार्केट शेयर मार्च 2019 में। 

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इंडिगो

विस्तार

जेट एयरवेज के संकट के बीच एविएशन सेक्टर को देश की सबसे फायदेमंद एयरलाइन इंडिगो के दो प्रमोटरों और सह-संस्थापकों राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच मतभेद की खबर से एक और झटका लगा है। विवाद सुलझाने के लिए दोनों लॉ फर्म के पास पहुंचे हैं। इस बीच इंडिगो के सीईओ रोनो दत्ता ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया है कि एयरलाइन की ग्रोथ स्ट्रेटजी में कोई बदलाव नहीं है। इसे लागू करने में इंडिगो के मैनेजमेंट को कंपनी के बोर्ड का पूरा समर्थन प्राप्त है।

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दत्ता ने इसी साल जनवरी में एयरलाइन के सीईओ का पद संभाला था। सूत्रों के मुताबिक इन दोनों के बीच मतभेद तब उभरे, जब भाटिया को लगा कि गंगवाल एयरलाइन में अपनी टीम बढ़ा रहे हैं, ताकि उनका कंट्रोल कंपनी पर ज्यादा हो सके। अब उन्होंने विवाद को सुलझाने के लिए लॉ फर्म जेएसए लॉ और खेतान एंड कंपनी की सेवाएं ली हैं।
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विवाद की खबर के बाद बीएसई में गुरुवार को इंडिगो की कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में 9.82% तक गिरावट देखने को मिली। 1,450.50 रुपए का निचला स्तर छूने के बाद कंपनी के शेयर 8.82% नुकसान के साथ 1,466.60 रुपए पर बंद हुए। इंडिगो को पहले विमान की डिलीवरी 28 जुलाई 2006 को हुई। 4 अगस्त 2006 से कंपनी ने अपनी उड़ान शुरू की।
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14 साल पहले 100 एयरबस विमान खरीदनेे का ऑर्डर देकर इंडिगो चर्चा में आई थी। 2004 में इंडिगो ने लाइसेंस हासिल किया। लेकिन 2006 तक कंपनी उड़ान नहीं भर पाई थी। किंगफिशर, स्पाइसजेट और जेट एयरवेज तक दिक्कत का सामना कर रही थीं। 2005 के ऐसे विपरीत माहौल में इंडिगो ने पेरिस एयर शो में 100 एयरबस विमान खरीदने का ऑर्डर दिया। जेब में सिर्फ 100 करोड़ रु. थे। गंगवाल की साख काम आई। एयरबस ने इतने कम एडवांस पर बड़ा ऑर्डर लिया।

राहुल भाटिया : ऑपरेशनल एक्सपर्ट 

इंडिगो में 38% हिस्सेदारी है। 58 वर्षीय भाटिया इंटरग्लोब एविएशन के ग्रुप एमडी हैं। इनकी नेटवर्थ 21,700 करोड़ रुपए है। भाटिया ऑपरेशनल कॉस्ट कम रखने में महारत रखते हैं। 1991 में उन्हें कारोबार से अलग होना पड़ा। 

राकेश गंगवाल : 30 साल का अनुभव 

इंडिगो में 37% हिस्सेदारी है। 66 वर्षीय गंगवाल अमेरिकी नागरिक और इंटरग्लोब एविएशन में नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर हैं। इनकी नेटवर्थ 25,200 करोड़ रुपए है। एविएशन इंडस्ट्री में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है।

मालिकाना हक को लेकर हुआ विवाद

पिछले कई महीने से हिचकोले खा रहे भारतीय विमानन क्षेत्र की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सस्ती विमानन सेवा देने वाली इंडिगो में मालिकाना हक को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में आशंका बढ़ गई है। कंपनी के सीईओ ने बृहस्पतिवार को बयान जारी कर कर्मचारियों को प्रबंधन को लेकर आश्वस्त किया है।  

इंडिगो का संचालन करने वाली कंपनी इंटरग्लोब के सीईओ रंजॉय दत्ता ने कहा कि प्रवर्तकों के बीच विवाद के बावजूद वृद्धि को लेकर हमारी रणनीति में कोई बदलाव नहीं आया है। एयरलाइन के प्रबंधन को कंपनी बोर्ड का पूरा सहयोग मिल रहा है। 

सीईओ ने लिखा ई-मेल

सीईओ ने कर्मचारियों को भेजे ई-मेल में कंपनी के प्रवर्तकों राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच बढ़ते विवाद पर भी स्थिति स्पष्ट की। कहा, मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारी वृद्धि योजनाओं में कोई बदलाव नहीं आया है और बोर्ड की ओर से प्रबंधन को पूरा सहयोग जारी है। मीडिया में आ रही प्रवर्तकों के बीच विवाद की रिपोर्ट को लेकर आप (कर्मचारी) बिलकुल भी आशंकित न हों। कंपनी सभी शेयरधारकों, उपभोक्ताओं, कर्मचारियों और अन्य संबद्ध लोगों के प्रति अपने मूल्यों को बढ़ाने पर पूरा जोर दे रही है। 

ऐसे शुरू हुआ विवाद

सूत्रों के अनुसार, दोनों प्रमोटरों के बीच उस समय मतभेद हुए जब भाटिया को लगा कि गंगवाल एयरलाइन में अपनी टीम बढ़ा रहे हैं, ताकि उनका कंपनी पर ज्यादा नियंत्रण हो सके। विवाद बढ़ने पर दोनों ने अपनी हिस्सेदारी तय करने के लिए जेएसए लॉ फर्म और खेतान एंड कंपनी लॉ फर्म की मदद ली है। गंगवाल की एयरलाइन में करीब 37 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि भाटिया के पास 38 फीसदी हिस्सा है। 2003-04 में गंगवाल और भाटिया ने भारत में साथ मिलकर इंडिगो एयरलाइन की नींव रखी थी।

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