'भारत एक करोड़ टन दाल आयात करेगा तब जाकर घटेंगी कीमतें'
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घरेलू स्तर पर दाल के उत्पादन व दाल की खपत के अंतर को पाटने के लिए सरकार को एक करोड़ टन दाल का आयात करना पड़ेगा। कमजोर मानसून की वजह से इस साल दाल का उत्पादन 170 लाख टन रहने का अनुमान है जबकि पिछले साल दाल का उत्पादन 172 लाख टन था। औद्योगिक संगठन एसोचैम के एक अध्ययन में इस बात का खुलासा किया गया है।
अध्ययन के मुताबिक इस साल दाल की मांग में बढ़ोतरी से एक करोड़ टन दाल के आयात करनी पड़ेगी। एसोचैम का मानना है कि वैश्विक स्तर पर दाल की आसान आपूर्ति नहीं होने की वजह से इस साल दाल की मांग व आपूर्ति के अंतर को पाटना कठिन होगा। दाल के भाव में लगातार बढ़ोतरी जारी रहने पर इसका प्रभाव महंगाई दरों पर दिखने लगेगा।
देश में खरीफ दाल का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य महाराष्ट्र है। महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक, राजस्थान, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश का नंबर आता है। खरीफ फसल के दौरान दाल उत्पादन में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 24.9 फीसदी है वहीं कर्नाटक व राजस्थान की हिस्सेदारी क्रमश: 13.5 व 13.2 फीसदी तो मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 10 व 8.4 फीसदी है।
राज्यों की हिस्सेदारी में कमी आई
एसोचैम के मुताबिक खरीफ के दाल उत्पादन में इन पांच राज्यों की हिस्सेदारी 70 फीसदी है और इन सभी राज्यों में इस साल मौसम की मार पड़ी है। औद्योगिक संगठन एसोचैम के मुताबिक अधिक मात्रा में दाल के आयात से आयात बिल पर बोझ बढ़ेगा। वहीं आयातित दाल को देश के सभी हिस्सों में समान रूप से पहुंचाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
संगठन का मानना है कि क्षेत्रिय स्तर पर सप्लाई चेन की उचित व्यवस्था नहीं होने से दाल की आपूर्ति में दिक्कत आएगी। संगठन के अध्ययन में कहा गया है कि दाल उत्पादन में पूर्ण सक्षम बनने के लिए सरकार को किसानों को इंसेंटिव देने की जरूरत है।