घोटाले रोकने के लिए सरकार का प्लान, कंपनी के निदेशकों को पास करनी होगी परीक्षा
कंपनियों में हो रहे वित्तीय घोटालों को रोकने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। कंपनियों के बोर्ड में शामिल लोगों को अब निदेशक बनने से पहले एक एग्जाम पास करना होगा।
ऑडिट कंपनियों पर लगेगा बैन
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार ऑडिट कंपनियों डेलॉयट और केपीएमजी पर सरकार पांच साल के लिए प्रतिबंध लगाने जा रही है। कंपनियों में नियुक्त होने वाले स्वतंत्र निदेशकों को नियुक्ति से पहले एक एग्जाम पास करना जरूरी होगा।
कॉर्पोरेट मंत्रालय में उच्च अधिकारी इंजेती श्रीनिवास ने बताया कि कंपनियों में लगातार वित्तीय घोटाले बढ़ते जा रहे हैं। ऑडिटर भी घोटाले में इन कंपनियों के अधिकारियों का साथ दे रहे हैं। ऐसे में वित्तीय शुचिता लाने के लिए ऐसा करना जरूरी होता जा रहा है।
अभी तक यह हो चुके हैं वित्तीय घोटाले
देश में पीएनबी, आईएलएंडएफएस जैसे दो बड़े वित्तीय घोटाले पिछले पांच साल में हो चुके हैं। इसके अलावा वीडियोकॉन, आईसीआईसीआई बैंक और रोटोमैक में भी घोटाला हो चुका है।
ऑनलाइन होगा एग्जाम
यह एग्जाम पूरी तरह से ऑनलाइन होगा। इसमें निदेशकों से बेसिक जानकारी के बारे में पूछा जाएगा। कंपनी कानून, एथिक्स और शेयर बाजार के नियमों के बारे में सवाल होंगे। कंपनी में नए बन रहे निदेशकों को एक तय समय में यह एग्जाम पास करना होगा। फेल होने की दशा में वो पास होने तक कई बार परीक्षा दे सकते हैं।
कई साल से हैं बोर्ड में, तो मिलेगी छूट
हालांकि सरकार ने कहा कि जो लोग कई सालों से कंपनी के बोर्ड में शामिल हैं और उनको अनुभव भी है, उन्हें परीक्षा देने से छूट दी जाएगी। लेकिन उनको सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे एक डाटाबेस में अपने आप को रजिस्टर कराना होगा।
फिलहाल के नियमों के अनुसार प्रत्येक कंपनी में एक-तिहाई स्वतंत्र निदेशक होने चाहिए। इनका मुख्य कार्य छोटे शेयरधारकों के हितो की रक्षा करना और कंपनी की बाहर से निगरानी करना शामिल है।
एक साल के लिए ईवाई की कंपनी पर बैन
देश के कई बैंक अभी भी घोटाले के असर में है। आरबीआई ने ईवाई की सहयोगी कंपनी एसआर बाटिलबोई एंड कंपनी पर बैंकों का ऑडिट करने से एक साल के लिए रोक लगा दी है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी डेलॉयट भी आईएलएंडएफएस में घोटाले को पकड़ नहीं पाई थीं।
दो महीने में लागू होगा यह नियम
केंद्र सरकार अगले दो महीने में यह नियम लागू कर देगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे कंपनियों में वित्तीय प्रबंधन के मामले में शुचिता देखने को मिलेगी और घोटालों पर रोक लगने की संभावना है।