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DHFL: पीरामल कैपिटल के नियंत्रण में जाने के बाद समाप्त हो सकती है डीएचएफएल के शेयरों की बाजार से सूचीबद्धता

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Tue, 08 Jun 2021 10:03 AM IST

सार

सूत्रों का कहना है कि डीएचएफसी का अधिग्रहण होने के बाद उसके शेयरों की बाजार से सूचीबद्धता समाप्त हो सकती है।
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dhfl - फोटो : Amar ujala
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विस्तार

कर्ज बोझ में दबी आवास वित्त पोषण सेवा कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के शेयर पीरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस द्वारा उसका अधिग्रहण पूरा कर लिए जाने के बाद शेयर बाजार से हट सकते हैं। सूत्रों ने इस तरह की योजना के संकेत दिए हैं। डीएचएफएल के लिए बोली लगाने वाली कंपनियों में पीरामल कैपिटल सफल रही है।
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ऋणदाता समूह ने दी बोली को थी मंजूरी 
दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) प्रक्रिया के तहत डीएचएफएल के अधिग्रहण की बोली लगाने वालों में पीरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस की बोली को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई वाले ऋणदाता समूह ने मंजूरी दी थी।


अधिग्रहण होने के बाद समाप्त होगी सूचीबद्धता 
सूत्रों का कहना है कि आईबीसी के दिशानिर्देशों और सेबी के सूचीबद्धता समाप्त करने के नियमों के मुताबिक डीएचएफसी का अधिग्रहण होने के बाद उसके शेयरों की बाजार से सूचीबद्धता समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा सूत्रों का कहना है कि कंपनी खुद को डीएचएफएल में ही विलय कर सकती है। इसके लिए सभी विधायी, नियामकीय मंजूरियों के बाद ही कदम आगे बढ़ाया जा सकता है।

राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने डीएचएफएल के लिए पीरामल समूह की बोली को सोमवार को सशर्त मंजूरी दे दी। एच पी चतुर्वेदी की अध्यक्षता वाले न्यायाधिकरण ने कहा कि उसकी मंजूरी इस संबंध में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) और कंपनी के पूर्व प्रवर्तक कपिल वधावन की याचिका पर उच्चतम न्यायालय के फैसले पर निर्भर करेगी।

मालूम हो कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही गैर बैंकिंग वित्तीय सेवा कंपनी डीएचएफएल के लिए सोमवार को कुछ शर्तों के साथ पीरामल समूह की बोली को अपनी मंजूरी दी। न्यायाधिकरण की एच पी चतुर्वेदी और रविकुमार दुरईसामी की अध्यक्षता वाली मुंबई पीठ ने कहा कि यह मंजूरी कपिल वधावन मामले में राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के अंतिम निर्णय और मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के अधीन है।

इससे पहले एनसीएलएटी ने 25 मई को एनसीएलटी के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें डीएचएफएल के ऋणदाताओं से वधावन के प्रस्ताव पर विचार करने को कहा गया था। अपीलीय न्यायाधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया था कि सीओसी द्वारा चुनी गई समाधान योजना को मंजूरी देने के संबंध में उसका आदेश एनसीएलटी के आड़े नहीं आएगा।

14 हजार करोड़ का घोटाला
सीबीआई ने मार्च 2021 को प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) से जुड़े 14,000 करोड़ रुपये के घोटाले का भंडाफोड़ कर दिया था। साथ ही इस मामले में आर्थिक संकट में घिरी डीएचएफएल के प्रमोटरों कपिल वधावन और धीरज वधावन के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया था। सीबीआई के मुताबिक, कपिल और धीरज ने 14,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के ‘फर्जी व काल्पनिक’ गृह ऋण मंजूर किए। साथ ही इसके लिए पीएमएवाई के तहत सरकार से 1,880 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी भी हासिल कर ली। सीबीआई का कहना है कि दिसंबर, 2018 में डीएचएफएल ने अपने निवेशकों को पीएमएवाई के तहत 88,651 गृह ऋण जारी करने और इनके बदले सरकार से 539.4 करोड़ रुपये की ब्याज सब्सिडी हासिल करने की जानकारी दी।

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