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कोरोना संकट: लाखों लोग हो सकते हैं बेरोजगार, कंपनियां कर रही छंटनी

Tue, 26 May 2020 04:50 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Tue, 26 May 2020 04:50 PM IST
सार

  • लॉकडाउन की वजह से रेस्टोरेंट और ऑनलाइन फूड एग्रीगेटर को नुकसान हुआ है।
  • अगले साल तक रेस्टोरेंट बंद होने से सात लाख लोगों के बेरोजगार होने की संभावना है।
  • जापान का सॉफ्टबैंक को 17.7 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जो 39 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा है। 

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Coronavirus impact lakhs of people can be unemployed companies in loss
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

महामारी से पनपे संकट का सामना हर कोई कर रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर उद्योग धंधों पर पड़ा है। कोरोना वायरस महामारी का असल खतरा अब धीरे-धीरे सामने आने लगा है। लॉकडाउन की वजह से रेस्टोरेंट और ऑनलाइन फूड एग्रीगेटर को जो नुकसान हुआ है, उसका खामियाजा इन कंपनियों के कर्मचारियों को उठाना पड़ रहा है। लाखों कर्मचारियों की नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है।

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जापान का सॉफ्टबैंक, जो ओला, पेटीएम, ओयो, पॉलिसी बाजार, ग्रोफर्स, आदि को फंड देता है, उसे 17.7 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। यह नुकसान कंपनी के 39 साल के इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा है। 
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अगले साल तक 25 से 50 फीसदी रेस्टोरेंट बंद हो सकते हैं, जिससे सात लाख लोगों के बेरोजगार होने की संभावना है। स्विगी, ओला, उबर और जोमैटो जैसी बड़ी कंपनियां छंटनी कर रही हैं।
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स्विगी में 1100 कर्मचारियों की छंटनी
हाल ही में स्विगी ने अपने कर्मचारियों की छंटनी करने का फैसला किया था। घर पर खाना डिलीवर करने वाली इस कंपनी को भी कोरोना वायरस की मार झेलनी पड़ी है। कंपनी ने करीब 1100 कर्मचारियों को निकालने का फैसला किया है। कंपनी ने इस संदर्भ में कहा कि कोरोना वायरस की वजह से उनके कारोबार पर काफी बुरा असर पड़ा है। 

जानकारी के मुताबिक स्विगी मुख्यालय समेत देशभर के कार्यालयों से कर्मचारियों की संख्या में कमी करेगा। कंपनी के सीईओ व सह संस्थापक हर्ष मजेटी ने एक ईमेल के जरिए छंटनी की जानकारी दी। श्रीहर्ष मजेटी ने कहा, 'आज स्विगी के लिए सबसे दुखद दिन है क्योंकि हमें कर्मचारियों की दुर्भाग्यपूर्ण छंटनी के दौर से गुजरना है।' उन्होंने कहा कि कोविड-19 ने कंपनी को तोड़कर रख दिया है और अभी भी सिर्फ अनिश्चितता बनी हुई है। इस वजह से उसे मजबूरन आगे के लिए कड़े कदम उठाने पड़ रहे हैं। हमें अपनी लागत कम करनी है और आगे की अनिश्चितताओं को देखते हुए किसी भी जोखिम से बचना है। अगले 18 महीने के दौरान व्यवसाय में उथल-पुथल की आशंका के चलते कंपनी अपने कारोबार का स्तर कम रही है। साथ ही जुड़े हुए अन्य कारोबार बंद कर रही है।

उन्होंने कहा, 'सभी प्रभावित कर्मचारियों को तीन-तीन महीने का वेतन दिया जाएगा। नोटिस पीरियड के अलावा भी हम अपने कर्मचारियों को एक-एक महीने का अतिरिक्त वेतन देंगे। साथ ही कर्मचारी अपने लैपटॉप को अपने साथ रख सकेंगे और अगले तीन महीने तक उनके मोबाइल का बिल भी कंपनी भरेगी।'

ओला ने भी लिखा कर्मचारियों को मेल
वहीं इससे पहले ओला ने घाटे से उबरने के लिए 1400 लोगों को निकालने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान उसकी कमाई में जबरदस्त गिरावट आई है। अपने कर्मचारियों को लिखे ईमेल में ओला के सीईओ भाविश अग्रवाल ने कहा है कि महामारी ने ओला की कमाई को जबरदस्त तरीके से नुकसान पहुंचाया है। पिछले दो महीने में उनकी कंपनी के रेवेन्यू में 95 फीसदी की गिरावट आई है, जिसके चलते कंपनी बुरी तरह से घाटे में है।

उन्होंने लिखा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस संकट ने देशभर में हमारे लाखों ड्राइवरों और उनके परिवारों की आजीविका के साथ हमारी अंतरराष्ट्रीय भौगोलिक स्थिति को प्रभावित किया है। 

भाविश अग्रवाल का कहना है कि महामारी के कारण पिछले दो महीनों में सवारी, वित्तीय सेवाओं और खाद्य कारोबार से उसकी आमदनी घटी है और इसके चलते कंपनी को कर्मचारियों को निकालने का फैसला लेना पड़ रहा है।

तीन महीने की दी जाएगी सैलरी
अग्रवाल ने यह साफ किया कि व्यापार का भविष्य ‘बेहद अस्पष्ट और अनिश्चित’ है और ‘निश्चित रूप से इस संकट का असर हम पर लंबे समय तक रहेगा।’ उन्होंने लिखा है कि प्रत्येक प्रभावित कर्मचारी को नोटिस अवधि के बावजूद उन्हें तीन महीने की निर्धारित सैलरी दी जाएगी। अग्रवाल ने कहा कि इस दौरान वे अनुसंधान और विकास में निवेश करेंगे। अपने ईमेल में वे आगे लिखते हैं कि जैसे-जैसे आर्थिक गतिविधि लौटती हैं, वैसे-वैसे मोबिलिटी की आवश्यकता होगी, लेकिन मानक बदल जाएंगे। इस संकट में डिजिटल कॉमर्स और क्लीन मोबिलिटी की मांग बढ़ेगी और हमारा व्यवसाय इन रुझानों का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

उबर ने भी किया छंटनी का फैसला
उबर इंडिया ने अपने 600 कर्मचारियों को नौकरी से बाहर करने की घोषणा की है। कंपनी ने कहा कि संक्रमण के चलते हम ऐसा करने के लिए मजबूर हैं। हालांकि कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए कुछ सुविधाएं दी हैं। 

कंपनी ने दी यह सुविधाएं
उबर कंपनी इन कर्मचारियों के लिए कुछ सुविधाएं भी उपलब्ध करा रही है। कंपनी ने इन्हें 10 से 12 सप्ताह की सैलरी और अगले छह महीनों के लिए चिकित्सा बीमा की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने को कहा है। बता दें कि उबर ही नहीं देश की कई जानी मानी कंपनियां वायरस के कराण आई परेशानी के चलते अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकाल रही हैं। 

जोमैटो में भी नौकरी जाने का खतरा
गुरुग्राम आधारित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जोमैटो ने कहा कि आने वाले समय में उसे अपने कर्मचारियों के लिए पर्याप्त काम न होने का अंदाजा लगा गया है। इसका परिणाम ये हुआ कि कंपनी ने अपने कुल चार हजार कर्मियों में से 13 फीसदी लोगों को नई नौकरी ढूंढने के लिए बोल दिया है। इससे करीब 500 लोगों की नौकरीयों पर संकट मंडरा रहा है।

अपने कर्मचारियों को लिखे गए एक मेल में कंपनी के सीईओ दिपांकर गोयल ने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से उनके व्यापार पर गहरा असर पड़ा है। एक बड़ी संख्या में रेस्टोरेंट पहले ही हमेशा के लिए बंद हो गए हैं। 

दीपांकर गोयल ने कहा कि उन्हें इस बात की पूरी संभावना दिखती है कि अगले छह से 12 महीनों में 25 से 40 फीसदी रेस्टोरेंट कम हो जाएंगे। आगे असल में क्या होगा, क्या अच्छा होगा, क्या बुरा होगा, ये किसी का भी अंदाजा हो सकता है।

देश की रेस्टोरेंट इंडस्ट्री का मानना है कि इंडस्ट्री में लगभग 73 लाख नौकरियों के जाने का खतरा मंडरा रहा है। इन नौकरियों में सप्लाई से लेकर मजदूर, स्किल्ड और नॉन स्किल्ड कर्मचारी, रियल एस्टेट से लेकर क्रेडिट तक, डिलिवरी कमीशन और रेंटल कॉन्ट्रैक्ट शामिल हैं। मालूम हो कि जोमैटो और स्विगी का कारोबार करीब 70 फीसदी तक प्रभावित हुआ है। 

ओयो रूम्स ने की कर्मचारियों की सैलरी में 25 फीसदी कटौती
लॉकडाउन से होटल इंडस्ट्री की कमर टूट गई है। ऐसे में होटल चेन कंपनी ओयो रूम्स ने भारत में सभी कर्मचारियों की सैलरी में 25 फीसदी की कटौती की घोषणा की है। 

चार महीने तक की जाएगी कटौती  
कंपनी द्वारा यह कटौती अप्रैल से चार महीने तक की जाएगी। रॉयटर्स के अनुसार, कंपनी ने अपने कुछ कर्मचारियों को लिमिटेड बेनिफिट्स के साथ छुट्टी पर भी भेज दिया है। ओयो ने अमेरिका में मार्च मध्य से अब तक सेल्स, बिजनेस डेवलपमेंट और एचआर की छंटनी की है। मालूम हो कि कर्मचारियों को अप्रैल के पहले हफ्ते में नौकरी से हटाया गया था।

इस संदर्भ में ओयो के सीईओ रोहित कपूर ने कर्मचारियों को ई-मेल में कहा कि, 'कंपनी भारत में कर्मचारियों की सैलरी में 25 फीसदी की कटौती करेगी। सैलरी में कटौती का असर सालाना पांच लाख रुपये से कम कमाने वाले कर्मचारियों पर नहीं होगा।' 

कर्मचारियों को भेजा जा रहा चार महीने की छुट्टी पर
आगे कपूर ने कहा कि, ओयो के कुछ कर्मचारियों को 4 मई से चार महीने के लिए छुट्टी पर भेजा जाएगा। छुट्टी पर जाने वाले कर्मचारी को मेडिकल इंश्योरेंस और पैटर्नल इंश्योरेंस, स्कूल फीस रिम्बर्समेंट की सुविधा जारी रहेगी। इतना ही नहीं, कंपनी ने यह भी कहा है कि अगर कोई अप्रत्याशित मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति किसी कर्मचारी के साथ आती है, तो मेडिकल इंश्योरेंस के अलावा भी मदद की जाएगी।

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