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शेयर गिरवी रख कर्ज नहीं ले पाएंगी कंपनियां, बैंकों ने कड़े किए नियम

Fri, 08 Mar 2019 05:54 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Fri, 08 Mar 2019 05:54 PM IST
सार

  • 2.30 लाख करोड़ रुपये के शेयर कर्ज के लिए गिरवी रखे हैं कंपनी संस्थापकों के
  • 01 लाख करोड़ रुपये की किस्त बकाया है कंपनियों पर गिरवी शेयरों के कर्ज का

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companies can't take loan by keeping shares as collateral, banks tightens norms

विस्तार

कॉरपोरेट जगत में कर्ज चूक के बढ़ते मामलों को देखते हुए बैंकों सहित अन्य वित्तीय कर्जदाताओं ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। इससे शेयर गिरवी रख कर्ज लेने वाली कंपनियों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थान न सिर्फ गिरवी रखे शेयरों को बेच रहे हैं, बल्कि नया कर्ज देना भी बंद कर दिया है।

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मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि कंपनियों के संस्थापकों में शेयर गिरवी रख कर्ज लेने की प्रकृति काफी बढ़ गई है। हाल में अनिल अंबानी की कंपनियों और एस्सेल समूह में कर्ज चूक के मामले सामने आने के बाद बैंकों ने इस तरह के कर्ज पर लगाम कस दी है।
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इस तरह के कर्ज में पहली बार छह महीने से ज्यादा का सूखा पड़ा है। विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के कर्ज का बकाया करीब 1 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें अब तेजी से गिरावट आ रही है। कंपनी के संस्थापकों ने कर्ज की राशि का उपयोग कारोबार बढ़ाने में किया लेकिन गिरवी रखे शेयरों में गिरावट की वजह से उन्हें ज्यादा महंगी शर्तों पर दोबारा फंड जुटाना पड़ा। इसका भारतीय बाजार की साख पर भी बुरा असर दिखा।

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कर्जदाताओं के सख्त कदम

कर्जचूक के बाद अनिल अंबानी की कंपनियों के शेयर गिरने लगे तो कर्जदाताओं ने उन्हें बेचना शुरू कर दिया। अंबानी ने इसे गैरकानूनी कदम बताते हुए इसका विरोध किया और कर्जदाता के खिलाफ अपील दायर की।


इसी तरह एस्सेल समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा ने गिरवी शेयरों को बचाने के लिए कर्जदाता के साथ एक करार किया, जिसमें समूह के शेयर 30 सितंबर, 2019 तक नहीं बेचे जाने की शर्त थी। दरअसल, जब कंपनी के शेयर चढ़ रहे होते हैं तो ऐसे लोन आसानी से मिल जाते हैं। वहीं, शेयरों में गिरावट आने पर कर्जदाता अपना घाटा पाटने के लिए कंपनी से और शेयर की मांग करते हैं, जो देना मुमकिन नहीं होता।

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सुधार की उम्मीद

इडलविज फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक, पिछले एक साल के मुकाबले गिरवी रखे शेयरों के बकाया भुगतान में 20 फीसदी की कमी आई है। आने वाले कुछ वर्षों में इसमें 30 से 40 फीसदी की गिरावट और आ सकती है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के कर्ज को देना पूरी तरह बंद नहीं किया जाना चाहिए। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, करीब 820 कंपनियों के संस्थापकों ने 2.30 लाख करोड़ रुपये के शेयर कर्ज के लिए गिरवी रखे हुए हैं।
 

कंपनियों को लेना होगा सबक
मुझे लगता है कि भारतीय कंपनियों को इससे सबक लेना चाहिए और शेयरों को गिरवी रख फंड जुटाने के तरीकों का इस्तेमाल आखिरी विकल्प के तौर पर किया जाना चाहिए।
-मनीष संथालिया, सीआईओ, मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट 

इन कंपनियों की बुरी स्थिति

                      
कंपनी     संस्थापकों का हिस्सा  गिरवी रखे शेयर (फीसदी में)
रिलायंस इंफ्रा            49.3 फीसदी 83.6
रिलायंस पॉवर  75  82.8
जीएमआर इंफ्रा 63.1                     82.7
जी-इंटरटेनमेंट 41.6                     59.4
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