गहरे संकट में दूरसंचार उद्योग, सरकार घटाए लाइसेंस शुल्क: COAI
दूरसंचार उद्योग के संगठन सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ( COAI ) ने सरकार से दूरसंचार कंपनियों पर सांविधिक बकाए के भुगतान की शर्तों को आसान करने को कहा है।
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इस संदर्भ में सीओएआई ने कहा है कि संकट में फंसे टेलीकॉम सेक्टर को उबारने के लिए सरकार द्वारा समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की देनदारियों को चुकाने को दूरसंचार कंपनियों को निचली दर पर कर्ज उपलब्ध कराए जाना जरूरी है। इसके अलावा न्यूनतम कीमतों का क्रियान्वयन भी तेजी से किया जाए।
गहरे संकट में फंसा है दूरसंचार उद्योग
दूरसंचार उद्योग इस समय गहरे संकट में फंसा है। एसोसिएशन ने इस बात पर चिंता जताई है कि बैंक क्षेत्र को लेकर जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। मामले में सीओएआई ने कहा है कि, 'बैंकों को इस बारे में स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि सरकार क्षेत्र के साथ खड़ी है।'
सीओएआई के महानिदेशक ने लिखा पत्र
मामले में 26 फरवरी को सीओएआई के महानिदेशक राजन मैथ्यूज ने दूरसंचार सचिव अंशु प्रकाश को पत्र लिखकर कहा कि, 'बैंक अभी दूरसंचार क्षेत्र के साथ जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं हैं। बैंक दूरसंचार कंपनियों को नई बैंक गारंटी जारी करने या बैंक गारंटी के नवीकरण से इनकार कर रहे हैं। दूरसंचार क्षेत्र से कहा जा रहा है कि वे अपना ऋण घटाएं।' पत्र में कहा गया है कि लाइसेंस शुल्क भुगतान के लिए वित्तीय बैंक गारंटी की अनिवार्यता को समाप्त किया जाना चाहिए। सीओएआई ने कहा कि यदि दूरसंचार विभाग को लगता है कि वित्तीय बैंक गारंटी जरूरी है तो इसे घटाकर लाइसेंस शुल्क का 25 फीसदी किया जाना चाहिए।
कम होना चाहिए लाइसेंस शुल्क
इसके साथ ही लाइसेंस शुल्क को तत्काल आठ फीसदी से घटाकर तीन फीसदी किया जाना चाहिए। साथ ही स्पेक्ट्रम प्रयोग शुल्क में भी कटौती की जानी चाहिए। आगे मैथ्यूज ने कहा कि, 'चीन, ब्राजील और रूस जैसे बाजारों की तुलना में भारत में प्रति ग्राहक औसत राजस्व (एआरपीयू) काफी कम है। इसलिए क्षेत्र को टिकाऊ बनाने के लिए न्यूनतम कीमत को लागू किया जाना जरूरी है।' 15 दूरसंचार इकाइयों पर कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये का सांविधिक बकाया है।