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यूपी-उत्तराखंड में 6,000 बोगस कंपनियों के लाइसेंस निरस्त, साल की दूसरी बड़ी कार्रवाई

Sat, 01 Sep 2018 09:41 AM IST
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 01 Sep 2018 09:41 AM IST
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6 thousand bogus companies license cancelled in up uttarakhand

रजिस्ट्रार ऑफ  कंपनीज (आरओसी) ने यूपी और उत्तराखंड में एक बार फिर करीब 6,000 कंपनियों पर बड़ी कार्रवाई की है। इन सभी के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए हैं। अब इन कंपनियों के नाम आरओसी की वेबसाइट से हटाने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही इन कंपनियों का अस्तित्व हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। साथ ही इनके निदेशकों को भी अयोग्य घोषित किया जाएगा।

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रजिस्ट्रार ऑफ  कंपनीज कार्यालय के सूत्र बताते हैं कि नोट बंदी के बाद वित्त मंत्रालय के कारपोरेट विभाग की ओर से बोगस (दिखावटी) कंपनियों के खिलाफ  चलाए गए अभियान का यह दूसरा चरण है। इससे पहले अक्तूबर-2017 में दो लाख 26 हजार बोगस कंपनियों के खिलाफ  कार्रवाई की गई थी। इसमें यूपी की 6,996 और उत्तराखंड की करीब एक हजार कंपनियों के नाम खत्म किए गए थे।
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ये कंपनियां कागजों में खुद को निष्क्रिय दिखाकर करोड़ों रुपये का कारोबार कर रही थीं। दूसरे चरण की कार्रवाई मार्च-2018 के बाद शुरू हो गई थी। इसमें अब तक देशभर में दो लाख से अधिक कंपनियों की पहचान हुई है। इस अभियान में रजिस्ट्रार ऑफ  कंपनीज के क्षेत्रीय कार्यालय लगे हुए हैं।
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कानपुर स्थित यूपी और उत्तराखंड के कार्य क्षेत्र वाले कार्यालय ने दूसरे चरण में करीब छह हजार और कंपनियों के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। इनमें से करीब करीब 5,200 कंपनियां उत्तर प्रदेश की और आठ सौ उत्तराखंड की हैं। ये ऐसी कंपनियां हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन तो था, लेकिन गतिविधियां कागजों में नहीं दिख रही थीं। इनकी ओर से दो या इससे अधिक वर्षों से फाइनेंशियल स्टेटमेंट भी दाखिल नहीं किए गए थे।

जब्त होंगी संपत्तियां

रजिस्ट्रार ऑफ  कंपनीज के सूत्र बताते हैं कि प्रतिबंधित कंपनियां अपनी संपत्तियों की बिक्री नहीं कर सकेंगी। सरकार कालेधन से तैयार की गई इन कंपनियों की संपत्तियों को जब्त करने पर विचार कर रही है। वित्त मंत्रालय से निर्देश मिलते ही आगे की कार्रवाई शुरू होगी।

कानपुर है शेल कंपनियों का गढ़

6 thousand bogus companies license cancelled in up uttarakhand

कानपुर शेल कंपनियों का गढ़ है। नोटबंदी के बाद यह बात पुख्ता भी हुई। खातों में भारी-भरकम रकम जमा होने के बाद रजिस्ट्रार ऑफ  कंपनीज ने यहां की करीब 400 कंपनियों को प्रतिबंधित किया है। आरओसी के सूत्र बताते हैं शहर में इतनी ही फर्जी कंपनियां विभाग के राडार पर हैं। यूपी और उत्तराखंड में प्रतिबंधित छह हजार कंपनियों में से 5,200 यूपी की हैं। इनमें से चार सौ कानपुर की हैं।

ये होती हैं बोगस कंपनियां

बोगस कंपनियां प्राय: कागजों पर चलती हैं। ये पैसे का भौतिक लेन-देन नहीं करतीं, लेकिन मनी लांड्रिंग का आसान जरिया बनती हैं। इन्हें मुखौटा या फर्जी कंपनियां भी कहते हैं। इनका अस्तित्व केवल कागजों पर होता है। इनका कोई आधिकारिक कारोबार भी नहीं होता।

ये कंपनियां न्यूनतम पेडअप कैपिटल के साथ काम करती हैं। डिविडेंड इनकम जीरो होता है। टर्नओवर और ऑपरेटिंग इनकम भी बहुत कम होता है। कहा जाता है कि काले धन को सफेद करने के लिए बड़े पैमाने पर शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता है।

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