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सत्यम घोटाला: राजू को सात साल का सश्रम कारावास

Fri, 10 Apr 2015 01:07 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 10 Apr 2015 01:07 AM IST
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10 accused found guilty in satyam scam

कॉरपोरेट दुनिया को हिला कर रख देने वाले सत्यम घोटाले के मुख्य अभियुक्त बी. रामलिंग राजू और उसके भाई  बी. रामा राजू को सात साल सश्रम कैद की सजा सुनाई गई है। दोनों को साढ़े पांच करोड़ रुपये का जुर्माना भी देना होगा।

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सत्यम् कंप्यूटर्स के खातों में गड़बड़ी के जरिये किए गए 7000 करोड़ रुपये के इस घोटाले में कंपनी के संस्थापक और पूर्व चेयरमैन बी. रामलिंग राजू और उसके भाई के खिलाफ एक विशेष अदालत ने सजा सुनाई है। छह साल पहले सामने आए इस घोटाले को कॉरपोरेट जगत का सबसे बड़ा अकाउंटिंग घोटाला तक कहा गया था।
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विशेष अदालत के जज बीवीएलएन चक्रवर्ती की अदालत ने बी. रामलिंग राजू और बी. रामा राजू के साथ कंपनी (सत्यम कंप्यूटर्स) के सीएफओ (चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर) वदलामणि, ऑ़डिट कंपनी प्राइस वाटरहाउस कूपर्स के ऑडिटरों सुब्रमणि गोपालकृष्णन और टी. श्रीनिवास को भी सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
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इन लोगों पर 25 लाख रुपये तक जुर्माना लगाया गया है। मामले में दस लोगों को आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी करने और अन्य अपराधों का दोषी करार दिया गया। सीबीआई ने इस पूरे घोटाले की जांच की थी।

अदालत ने एक वक्त आईटी से जुड़े सेवा उद्योग के पोस्टर ब्वॉय माने जाने वाले साठ वर्षीय बायराजू रामलिंग राजू और एक पूर्व कर्मचारी जी. रामाकृष्णा को भारतीय दंड संहिता की धारा 201 (अपराध का सुबूत मिटाने में भूमिका निभाने का अपराध) के तहत भी दोषी ठहराया गया है।

राजू के एक भाई बी. सूर्यनारायण राजू और कंपनी के आतंरिक चीफ ऑडिटर वी. एस, प्रभाकर गुप्ता को छोड़ कर सभी आठों आरोपियों को प्रतिभूतियों से जुड़ी धोखाधड़ी, कंपनी के खातों में हेरफेर और फर्जीवाड़े का दोषी ठहराया गया।

भारत के सबसे बड़े घोटाले का सच

10 accused found guilty in satyam scam

रामलिंग राजू और कंपनी के खातों में हेराफेरी करके 7000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था। इससे सत्यम कंप्यूटर्स के निवेशकों को लगभग 14,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। राजू और उसके साथियों ने इस पूरी हेराफेरी के जरिये 1900 करोड़ रुपये हड़प लिए थे।

रामलिंग राजू और उसके भाई और सत्यम् कंप्यूटर्स के पूर्व प्रबंध निदेशक बी. रामा राजू को भारतीय दंड संहिता की धारा 409 के तहत भी दोषी ठहराया गया। फैसला सुनाने के दौरान सभी दसों अभियुक्त मौजूद थे। लेकिन मीडिया को सुनवाई से दूर रखा गया।

सत्यम् घोटाला 7 जनवरी, 2009 को सामने आया थे। उस दौरान इसके संस्थापक और तत्कालीन चेयरमैन रामलिंग राजू ने स्वीकार कि या था उसने और उसके साथियों ने मिलकर कंपनी के खातों में हेरफेर किया था और वर्षों तक कंपनी का मुनाफा बढ़ा कर दिखाते रहे थे।

अपराध स्वीकार करने के दो दिन बाद ही आंध्र प्रदेश पुलिस की अपराध जांच शाखा ने रामलिंग राजू को उसके भाई रामा राजू और अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। रामलिंग राजू के खिलाफ छह साल तक चले मुकदमे में 3000 दस्तावेज और 226 गवाह पेश किए गए थे।

कौन है राजू और क्या था घोटाला?

10 accused found guilty in satyam scam

क्या था घोटाला
सत्यम् कंप्यूटर्स सर्विसेज 6 जनवरी, 2009 तक शेयरधारकों की पसंदीदा कंपनी थी। मजबूत ब्रांड, अच्छी तिमाही नतीजे और तरक्की के लक्षण, सब कुछ बहुत बढ़िया था। लेकिन जैसे ही कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन बी. रामलिंग राजू ने 7 जनवरी, 2009 को हेराफेरी की बात कबूली, लाखों शेयरधारकों की दुनिया उजड़ गई।

दरअसल राजू वर्षों से कंपनी की बैलेंसशीट में मुनाफे और राजस्व को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाता रहा था। इसने कंपनी के शेयरों की कीमतें बढ़ाई रखी और कंपनी का बाजार पूंजीकरण बढ़ता गया। लेकिन फर्जीवाड़े के पर्दाफाश होने तक निवेशकों के 14000 करोड़ रुपये डूब चुके थे।

कौन है राजू
किसान परिवार में जन्मे बैयाराजू रामलिंग राजू ने 1987 में सत्यम् कंप्यूटर सर्विसेज की शुरुआत करने से पहले होटल, स्पिनिंग मिल, और रियल एस्टेट (मेटॉस इंफ्रा) में भी किस्मत अजमाई, लेकिन सिक्का सत्यम कंप्यूटर्स से चला।

विजयवाड़ा के लोयल कॉलेज से बीकॉम और अमेरिका के ओह्यो विश्वविद्यालय(अमेरिका) से एमबीए राजू की कंपनी शेयर बाजार में 1992 में उतरी और जल्दी ही देश की बड़ी आउटसोर्सिंग कंपनियों में से एक हो गई।

राजू की तरक्की की कहानी राजनीति और कारोबार के गठजोड़ की भी कहानी रही है। एक समय में वह आंध्र के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू का करीबी रहा। कंपनी के खातों में फर्जीवाड़े की बात स्वीकार करने के बाद उसने कंपनी के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दे दिया था।

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