चिंता मनी-22 : पत्नी की वित्तीय सुरक्षा कैसे हो?
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सरकारी स्कूल से रिटायर होने के बाद राम सिंह को वित्तीय परेशानी नहीं हुई। पेंशन के अलावा उन्हें उनके घर के प्रथम तल से किराया मिलता है, और बैंक की उनकी बचत तथा अन्य निवेश उन्हें वित्तीय रूप से मजबूती देते हैं। मगर खुद उनका बिगड़ता स्वास्थ्य तथा पड़ोस में रहने वाले एक मित्र की कोरोना से हुई मौत ने उन्हें चिंतित कर दिया है। वह परेशान हैं कि यदि उन्हें कुछ हो गया, तो 42 साल से उनकी हमसफर उनकी 65 वर्षीय पत्नी को कोई वित्तीय परेशानी तो नहीं होगी। वह चाहते हैं कि उनकी अनुपस्थिति में भी उनकी पत्नी वित्तीय रूप से सुरक्षित रहे।
राम सिंह जी की तरह अनेक वरिष्ठ नागरिकों की यह साझा चिंता है। उनके दोनों बच्चे विदेश में जा बसे हैं और वह खुद समझ नहीं पा रहे हैं कि महामारी से उपजे संकट के कारण अगली बार कब वह उनसे मिलने विदेश जाएंगे या उनके बच्चे उनसे मिलने भारत आएंगे। आठ साल पहले रिटायर होने के बाद से वह अपनी पेंशन, मकान के किराये और अपनी बचतों से गुजर बसर कर रहे हैं। महंगाई के कारण उनकी बचत में सेंध लगी है।
वह खुद्दार किस्म के आदमी हैं और बच्चों पर निर्भर नहीं हैं। यहां तक कि दो साल में एक बार अपने बच्चों से मिलने के लिए अमेरिका जाने का खर्च भी वह खुद वहन करते हैं। वह खुश हैं कि सरकारी स्कूल में काम करते हुए जीवन में उन्हें वह सब मिला, जो वह चाहते थे। उनके मकान के प्रथम तल में रहने वाले युवा दंपत्ति के स्कूल जाने वाले दो छोटे बच्चे हैं, जिन्हें वह कभी-कभी गणित भी पढ़ाते हैं और खुद को व्यस्त रखते हैं।
मगर पिछले कुछ महीनों से बदले हालात में वह परेशान हो गए हैं। कोरोना की वजह से वह सावधानी बरत रहे हैं और अधिकतर घर पर ही रहते हैं। कोरोना ने उन्हें पत्नी को लेकर चिंतित कर दिया है।
शुरुआत इस तरह करें
अपनी वित्तीय विरासत और जिम्मेदारियों को आसान बनाने के लिए कुछ सरल नियम हैं, जिनका पालन करना चाहिए, ताकि आगे के जीवन में किसी तरह की तकलीफ न हो। राम सिंह जी को सबसे पहले अपने सभी बैंक खातों को ज्वाइंट अकाउंट में बदल देना चाहिए, जिसमें दूसरे खाताधारक को नॉमिनी बनाना चाहिए। इसी तरह से मकान का स्वामित्व यदि संयुक्त न हो, तो उसे संयुक्त स्वामित्व में बदलना चाहिए। उन्हें यही कवायद अपने अन्य निवेश और बचत के मामलों में भी करनी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि उनकी सारी वित्तीय संपत्तियां और चल-अचल संपत्तियां उनके तथा उनकी पत्नी के स्वामित्व में होंगी। सरकारी पेंशन के मामले में आप यह स्पष्ट कर सकते हैं कि आप पारिवारिक पेंशन को पत्नी को किस तरह स्थानांतरित करना चाहते हैं। बीमा पॉलिसी हों, तो उनमें भी पत्नी का नाम नॉमिनी के रूप में दर्ज करवाना चाहिए।
वसीयत तैयार करें
आपको अपनी वसीयत भी तैयार करनी चाहिए। अधिकांश लोग सोचते हैं कि वसीयत की वजह से कानूनी पचड़े हो सकते हैं और उससे परेशानी हो सकती है। लेकिन ध्यान रहे अधिकांश मामलों में ऐसा नहीं होता, बल्कि इससे सुविधा ही होती है। आपको सिर्फ यह करने की जरूरत होती है कि आप अपनी सारी वित्तीय संपत्तियों का ब्यौरा तैयार करें और लिखें कि आपकी मृत्यु होने पर इनका किस तरह से उपयोग हो। आप जो सूची तैयार करें, उसमें मकान हो, तो उसका पूरा पता, निवेश, बचत और बीमा पॉलिसी के ब्यौरे और आभूषणों की जानकारी हो। आपको स्पष्ट लिखना होगा कि आपके जाने के बाद इन्हें किन्हें स्थानांतरित करना है। वसीयत पर दो स्वतंत्र गवाहों के (जो कि रिश्तेदार न हों) हस्ताक्षर होते हैं और वसीयत की एक प्रति इन दो गवाहों में से किसी एक पास सुरक्षित भी रखनी होती है। यह ब्यौरा तैयार करते समय पत्नी को भी विश्वास में लें। अच्छा हो कि इसी तरह के दस्तावेज आप पत्नी की ओर से भी तैयार करवाएं।