चीन भी डाटा सुरक्षा संबंधित वैश्विक ई-कॉमर्स नियमों के खिलाफ
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डाटा सुरक्षा को लेकर भारत की तर्ज पर चीन भी इलेक्ट्रॉनिक व्यापार के मामले में वैश्विक नियमों के खिलाफ आ गया है। डाटा को देश में सुरक्षित रखने, सोर्स कोड की सुरक्षा और क्रॉस बार्डर जाने वाले डाटा के संरक्षण समेत विभिन्न मुद्दों पर पड़ोसी देश ने विकसित देशों के महत्वाकांक्षी नियमों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उसने कड़ी आपत्ति जताते हुए नियमों के बनाए जाने को संवेदनशील मुद्दा करार दिया है। चीन और भारत की राय इन नियमों को लेकर लगभग एक है।
ई-कॉमर्स के वैश्विक नियमों पर भारत ने भी 1998 के कार्य कार्यक्रम के तहत बातचीत किए जाने की वकालत की थी। इसके बावजूद अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत अन्य देश ई-कॉमर्स के महत्वाकांक्षी नियमों के विकास के लिए बहुपक्षीय कार्य कार्यक्रम को बढ़ाने और नीति को लेकर भारत जैसे देशों को नकार रहे हैं। भारत के साथ अब चीन भी डाटा सुरक्षा को लेकर चिंतित है।
हाल ही में केंद्र सरकार ने देश के नागरिकों के डाटा और निजता की सुरक्षा के लिए डाटा नीति पर एक मसौदा भी जारी किया था। यह मसौदा इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा गठित की गई जस्टिस श्रीकृष्णा समिति द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें विदेशी कंपनियों द्वारा देश में डाटा संरक्षित करने को भी कहा गया है। चीन द्वारा विरोध किए जाने से भारत के पक्ष को बल मिल गया है और पड़ोसी देश के अन्य करीबी देशों के साथ आने की उम्मीद भी बढ़ गई है।
1998 के कार्य कार्यक्रम तहत हो चर्चा
चीन ने इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य पहल के सदस्यों की एक बैठक के दौरान कहा है कि किसी भी सदस्य की भागीदारी पर बिना किसी पूर्व शर्त के और भविष्य की चर्चा में पूर्वाग्रह के बिना सदस्यों की स्थिति स्पष्ट हो। नतीजा पारदर्शी, समावेशी और समर्थक विकास का हो। साथ ही कहा कि ई-कॉमर्स पर व्यापार संबंधी चर्चा 1998 के कार्य कार्यक्रम के तहत ही होनी चाहिए।
याद रहे कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के नेतृत्व में कई विकासशील देशों ने बार बार यह कहा है कि ई-कॉमर्स पर किसी भी परिणाम की पवित्रता और अखंडता इस बात पर निर्भर करेगी कि सदस्य ई-कॉमर्स पर 1998 के कार्य कार्यक्रम के अनुसार कैसे आगे बढ़ते हैं।
विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीए) सदस्य विकसित देशों को चीन के इस रुख से झटका लगा है। हालांकि इलेक्ट्रॉनिक चीजों पर लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क के मुद्दे पर वह चुप रहा है। अब देखना यह है कि अगले हफ्ते होने वाली जनरल काउंसिल बैठक की चर्चा में वह भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्ताव पर वह क्या रुख व्यक्त करता है?
गौरतलब है कि भारत डाटा सुरक्षा के मुद्दे पर लगातार कदम इसलिए उठा रहा है, क्योंकि कुछ माह पहले ही कैंब्रिज एनालिटिका नाम की कंपनी ने फेसबुक के जरिए लोगों को चुनाव के दौरान प्रभावित करने का दावा किया था। इस मामले में आईटी मंत्रालय द्वारा सख्त कार्यवाही की गई थी।