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World Bank: 2023-24 के लिए भारत की वृद्धि दर का अनुमान 6.1 प्रतिशत पर स्थिर, इकोनॉमी में लचीलापन बरकरार

Tue, 03 Oct 2023 03:33 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 03 Oct 2023 03:33 PM IST
सार

World Bank: भारत में विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर अगस्टे तानो कौमे ने कहा, "प्रतिकूल वैश्विक माहौल अल्पावधि में चुनौतियां पेश करता रहेगा। उन्होंने कहा, 'सार्वजनिक खर्च का दोहन करने से भारत के लिए भविष्य में वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियां पैदा होंगी और इस तरह उच्च विकास हासिल होगा।"

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world bank - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को 6.3 प्रतिशत पर बरकरार रखा है और कहा है कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल की पृष्ठभूमि में देश ने अपने प्रदर्शन में लचीलापन दिखाना जारी रखा है। विश्व बैंक ने अप्रैल की अपनी रिपोर्ट में 2023-24 के लिए भारत की वृद्धि दर के अनुमान को पहले के 6.6 प्रतिशत से घटाकर 6.3 प्रतिशत कर दिया था।

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विश्व बैंक की मंगलवार को जारी ताजा भारत विकास अद्यतन (आईडीयू) के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान की प्रमुख छमाही रिपोर्ट में कहा गया है कि महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत 2022-23 में 7.2 प्रतिशत की दर से सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक रहा। 
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विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा, "भारत की वृद्धि दर जी-20 देशों में दूसरी सबसे अधिक और उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं के औसत से लगभग दोगुनी है। यह लचीलापन मजबूत घरेलू मांग, मजबूत सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निवेश और मजबूत वित्तीय क्षेत्र से प्रेरित था।
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चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश का बैंक ऋण 15.8 प्रतिशत बढ़ा जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसमें 13.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। भारत के सेवा क्षेत्र की गतिविधि 7.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मजबूत रहने की उम्मीद है और निवेश वृद्धि भी 8.9 प्रतिशत पर मजबूत रहने का अनुमान है।

भारत में विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर अगस्टे तानो कौमे ने कहा, "प्रतिकूल वैश्विक माहौल अल्पावधि में चुनौतियां पेश करता रहेगा। उन्होंने कहा, 'सार्वजनिक खर्च का दोहन करने से भारत के लिए भविष्य में वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियां पैदा होंगी और इस तरह उच्च विकास हासिल होगा।"

विश्व बैंक को उम्मीद है कि उच्च वैश्विक ब्याज दरों, भू-राजनीतिक तनाव और सुस्त वैश्विक मांग के कारण वैश्विक चुनौतियां जारी रहेंगी और तेज होंगी और परिणामस्वरूप, मध्यम अवधि में वैश्विक आर्थिक विकास भी धीमा होने वाला है। भारत में प्रतिकूल मौसम की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर विश्व बैंक ने रिपोर्ट में कहा कि खाद्य पदार्थों की कीमतें सामान्य होने और सरकार के उपायों से प्रमुख वस्तुओं की आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में धीरे-धीरे कमी आने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, 'हेडलाइन मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी से खपत अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है, लेकिन हमारा अनुमान है कि इसमें नरमी आएगी। विश्व बैंक के वरिष्ठ अर्थशास्त्री और रिपोर्ट के मुख्य लेखक ध्रुव शर्मा ने कहा, "कुल मिलाकर निजी निवेश के लिए परिस्थितियां अनुकूल रहेंगी। उन्होंने कहा, 'भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मात्रा भी बढ़ने की संभावना है क्योंकि वैश्विक मूल्य शृंखला का पुनर्संतुलन जारी है।

गेहूं और चावल जैसे खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के कारण भारत में हेडलाइन मुद्रास्फीति जुलाई में बढ़कर 7.8 प्रतिशत हो गई, जो बाद में अगस्त में घटकर 6.8 प्रतिशत हो गई। इसके अलावा, विश्व बैंक को उम्मीद है कि 2023-24 में राजकोषीय समेकन जारी रहेगा और केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 6.4 प्रतिशत से घटकर 5.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

सार्वजनिक ऋण के सकल घरेलू उत्पाद के 83 प्रतिशत पर स्थिर होने की उम्मीद है। बाह्य मोर्चे पर, चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 1.4 प्रतिशत तक कम होने की उम्मीद है, और इसे विदेशी निवेश प्रवाह और बड़े विदेशी भंडार द्वारा समर्थित पर्याप्त रूप से वित्तपोषित किया जाना है।

भारत दक्षिण एशिया की बड़ी आर्थिक शक्ति

विश्व बैंक के दक्षिण एशिया क्षेत्र की मुख्य अर्थशास्त्री फ्रांजिस्का ओहनसोर्गे ने कहा, "भारत दक्षिण एशिया की बड़ी आर्थिक शक्ति है, यह क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद का 70% हिस्सा है। बेशक, इस क्षेत्र में बहुत सारे आर्थिक रुझान या श्रम बाजार के रुझान भी भारत द्वारा संचालित होते हैं।"

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