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अमीरों में बढ़ी देश छोड़कर विदेश में बसने की चाहत, इस सूची में शीर्ष पर भारत
Sat, 13 Feb 2021 01:09 PM IST
डिंपल अलावाधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलावाधी
Updated Sat, 13 Feb 2021 01:09 PM IST
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भारतीय अमीरों में बढ़ी देश छोड़कर विदेश में बसने की चाहत
- फोटो : pixabay
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कोरोना वायरस महामारी ने भले ही लोगों की अंतरराष्ट्रीय यात्रा की योजनाओं को रद्द किया हो, लेकिन भारतीयों में देश छोड़कर विदेश में बसने की चाहत खत्म नहीं हुई है। पिछले साल दूसरे देश में बसने की चाहत को लेकर सबसे ज्यादा पूछताछ भारतीयों ने ही की है। हेनली एंड पार्टनर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस सूची में भारत के बाद अमेरिका, पाकिस्तान, साउथ अफ्रीका और नाइजीरिया का स्थान है।
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साल 2020 में, भारतीय अमीरों द्वारा ही सबसे अधिक बार 'निवेश के जरिए निवास' और 'निवेश के जरिए नागरिकता' कार्यक्रमों के बारे में पूछताछ की गई। एक जांच एजेंसी ने कहा कि 2019 के मुकाबले पिछले साल पूछताछ की संख्या बढ़ी है। चूंकि भारत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता है, इसलिए किसी अन्य देश में नागरिकता लेने के लिए भारत की नागरिकता छोड़नी होगी। ऐसे लोगों के लिए 'निवेश के जरिए नागरिकता' कार्यक्रम कारगर माना जाता है।
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2019 में 7000 भारतीयों ने छोड़ा देश
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दूसरे देशों में बसने की चाहत को लेकर 2019 के मुकाबले भारतीयों द्वारा पूछताछ में 63 फीसदी का उछाल आया है। साल 2019 में 7000 भारतीयों ने देश छोड़ा था। इसमें दो फीसदी उच्च नेटवर्थ वाले भारतीय शामिल हैं।
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हेनली पार्टनर्स के वैश्विक साउथ एशिया टीम के निदेशक निर्भय हांडा ने कहा कि, 'हमने 2019 की तुलना में 2020 में भारतीयों द्वारा की गई जांच में 62.6 फीसदी की वृद्धि देखी है। 2019 के लिए आधार 1,500 से अधिक पूछताछ का था।' निवेश से जुड़े प्रवासन कार्यक्रम सस्ते नहीं होते हैं। यूरोपीय संघ का कहना है कि यह परिवार की संपत्ति को कई न्यायालयों में फैलाने या एक क्षेत्र में बेहतर पहुंच प्राप्त करने जैसा है।
इन कार्यक्रम के बारे में की गई सबसे अधिक पूछताछ
हेनली एंड पार्टनर्स के अनुसार, शीर्ष निवेश से जुड़े निवास और नागरिकता कार्यक्रम, जिनके बारे में भारतीयों ने 2020 में पूछताछ की, वे कनाडा रेजीडेंसी, पुर्तगाल रेजीडेंसी, ऑस्ट्रिया रेजीडेंसी और ऑस्ट्रिया के नागरिकता कार्यक्रम, माल्टा नागरिकता और तुर्की नागरिकता हैं। ऐतिहासिक रूप से, अमेरिका, कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया भारतीयों के पसंदीदा रहे हैं।
हांडा ने बताया कि रईस लोग बेहतर लाइफस्टाइल के लिए इन प्रोग्राम को अपनाते हैं। इसके अलावा सेकेंड पासपोर्ट होने पर उन्हें वैश्विक ट्रैवलिंग में काफी राहत मिलती है। ऑस्ट्रिया के पासपोर्ट पर 187 देशों के लिए वीजा-फ्री ट्रैवल की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा माल्टा और ऑस्ट्रिया द्वारा प्रस्तावित नागरिकता कार्यक्रम के तहत यूरोपीय संघ में कहीं भी निवास करने का विकल्प मिलता है। मालूम हो कि दुबई, हांगकांग और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्त केंद्रों में पेशेवर एनआरआई की बड़ी आबादी है।