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Vrindavan: जाते-जाते डॉ. विशाखा त्रिपाठी जी कर गईं 14,000 जरूरतमंदों की सहायता
Thu, 05 Dec 2024 04:36 PM IST
अनिल वैश्य
वृंदावन
वृंदावन
Published by: अनिल वैश्य
Updated Thu, 05 Dec 2024 04:36 PM IST
सार
Vrindavan: डॉ. विशाखा त्रिपाठी जी की अध्यक्षता में जगद्गुरु कृपालु परिषद ने एक विशाल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसमें करीब 14,000 जरूरतमंदों को ठंड से बचने की और दैनिक जीवन में इस्तेमाल लायक चीजें दी गईं। यह आयोजन 19 से 22 नवंबर के बीच हुआ। दो दिन बाद 24 नवंबर 2024 को एक हादसे के बाद डॉ. त्रिपाठी जी ने अपना देह त्याग दिया।
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डॉ. विशाखा त्रिपाठी
- फोटो : amarujala.com
विस्तार
वृंदावन में हाल ही में डॉ. विशाखा त्रिपाठी जी की अध्यक्षता में जगद्गुरु कृपालु परिषद ने एक विशाल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान करीब 14,000 जरूरतमंदों को ठंड से बचने की और दैनिक जीवन में इस्तेमाल लायक चीजें दी गईं। इस कार्यक्रम का आयोजन बीते 19 से 22 नवंबर के बीच हुआ। लेकिन चार दिन के इस विशाल वितरण कार्यक्रम के दो दिन बाद 24 नवंबर 2024 की सुबह, एक दुःखद सड़क हादसे में डॉ. विशाखा त्रिपाठी जी ने अपना देह त्याग दिया।
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यह आयोजन श्री वृन्दावन धाम स्थित प्रेम मंदिर और बरसाना स्थित कीर्ति मंदिर में किया गया था। 19 और 20 नवंबर को श्री वृन्दावन धाम स्थित प्रेम मंदिर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में 5,000 गरीबों और 4,000 निराश्रित विधवा माताओं को राहत सामग्री दी गई। इस कार्यक्रम में जगद्गुरु कृपालु परिषद की अध्यक्ष डॉ. विशाखा त्रिपाठी जी ने इस सहायता सामग्री के वितरण का नेतृत्व किया।
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डॉ. विशाखा के साथ जगद्गुरु कृपालु महाराज की बेटियों और उनकी बहनों व जगद्गुरु कृपालु परिषद की दूसरी अध्याक्षों डॉ. श्यामा त्रिपाठी जी और डॉ. कृष्णा त्रिपाठी जी ने भी सामग्री वितरित की। जयघोष के बीच संपन्न हुए इस आयोजन में लाभार्थियों ने परिषद की सेवा भावना को सराहा और आभार जताया। यह वितरण समारोह हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के ठीक बाद आयोजित किया जाता है, ताकि ब्रजवासियों को ठंड के प्रकोप से बचाया जा सके और साथ ही साथ दैनिक उपयोग की सामग्री भी मुहैया कराई जा सके।
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कीर्ति मंदिर, बरसाना में 5,000 जरूरतमंदों को राहत
21 और 22 नवंबर को बरसाना स्थित कीर्ति मंदिर में 3,000 गरीबों और 2,000 निराश्रित विधवा माताओं को दैनिक जीवन में इस्तेमाल की चीजें बांटी गईं। इन आयोजनों की विशेषता यह थी कि जगद्गुरु कृपालु परिषत् की तीनों अध्यक्षों डॉ. विशाखा त्रिपाठी जी, डॉ. श्यामा त्रिपाठी जी और डॉ. कृष्णा त्रिपाठी जी ने खुद लाभार्थियों में चीजें बांटी। उपस्थित लाभार्थियों ने परिषद के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज और उनकी तीनों बेटियों के प्रति आभार जताया।
लाभार्थियों ने जताया आभार
प्रेम मंदिर और कीर्ति मंदिर के इन आयोजनों ने लाभार्थियों के दिलों में विशेष स्थान बनाया है। एक विधवा माता, पुष्पलता देवी ने कहा, “हम पिछले 10 वर्षों से प्रेम मंदिर आ रहे हैं। यहां से मिले सामान को लेकर ऐसा महसूस होता है कि दुनिया में कोई हमारी परवाह करता है। कृपालु महाराज और तीनों दीदियों पर राधा रानी की कृपा बनी रहे।"
गरीबों ने भी अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ठंड और अभाव में उनके लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होते हैं।
जगद्गुरु पिता को किया था याद
जगद्गुरु कृपालु परिषत् की अध्यक्षों ने अपने पिता, जगद्गुरु कृपालु महाराज, को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर डॉ। विशाखा त्रिपाठी ने अपने जगद्गुरु पिता श्री कृपालु जी महाराज के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम करते हुए उनका आभार जताया था। डॉ. विशाखा ने बताया था कि किस तरह श्री कृपालु जी महाराज ने ब्रजवासियों के सेवार्थ अनेक प्रकार की जन-कल्याणकारी योजनाएँ शुरू कीं और आज वे उन्हीं योजनाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भविष्य में भी इसी तरह जारी रहेंगे। सभी ब्रजवासी उनके लिए पूजनीय हैं। डॉ. श्यामा त्रिपाठी और डॉ. कृष्णा त्रिपाठी भी इस अवसर पर उपस्थित थीं।
जाते-जाते भी हज़ारों के दुःख हर गयीं डॉ. विशाखा जी
कहते हैं कि संत जीवों पर कृपा करने के लिए ही इस धरती पर अवतरित होते हैं। अपने गोलोक गमन के दो दिन पहले 14,000 निराश्रित ब्रजवासियों को सहायता सामग्री प्रदान करके डॉ. विशाखा त्रिपाठी जी ने यह सन्देश दिया कि उनके जन्म का बस यही लक्ष्य था- गुरु भक्ति एवं जीव सेवा। बीते 24 नवंबर को एक दुखद सड़क हादसे में डॉ. विशाखा जी ने अपना देह त्याग दिया। केशी घाट पर किये गए उनके अंतिम संस्कार से पहले प्रेम मंदिर से बांके बिहारी मंदिर होते हुए निकाली गई उनकी अंतिम यात्रा के दौरान, उनके प्रति ब्रज वासियों के सच्चे प्रेम की झलक देखने को मिली। जिस भी रास्ते से उनकी अंतिम यात्रा निकली, वहां आंखें नम दिखाई पड़ीं।