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ट्रंप के टैरिफ रद्द होने का भारत पर क्या असर: व्यापार समझौते में होगा बदलाव या घाटे में रहेगा हिन्दुस्तान?

Sat, 21 Feb 2026 03:28 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 21 Feb 2026 03:28 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से अलग-अलग देशों पर लगाए गए टैरिफ क्यों रद्द किए गए? इस फैसले का क्या असर होगा? ट्रंप अपने टैरिफ को लेकर आगे क्या कदम उठा रहे हैं? भारत-अमेरिका के बीच हाल ही में व्यापार समझौते को लेकर जो चर्चा हुई, उसके तहत तय टैरिफ दर का क्या होगा? आइये जानते हैं...
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US Tariffs Donald Trump Administration Supreme Court India America Trade Deal Framework Modi Government Q&A
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से टैरिफ रद्द, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पड़ सकता है असर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से अलग-अलग देशों पर टैरिफ लगाने के फैसले को रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने जिन शक्तियों को इस्तेमाल करते हुए वैश्विक स्तर पर टैरिफ लगाए, वह उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है। इस फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप सरकार बैकफुट पर आ गई। हालांकि, ट्रंप ने तुरंत अपनी आपात शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक बार फिर पूरी दुनिया से होने वाले व्यापार पर 10 फीसदी नए आयात शुल्क लगाने का दांव खेला। हालांकि, उनका यह फैसला सिर्फ अंतरिम तौर पर लागू होगा और लंबी अवधि में नए टैरिफ की वैधता भी खत्म हो जाएगी। 


ट्रंप के अलग-अलग देशों पर टैरिफ लगाने से लेकर सुप्रीम कोर्ट के इन आयात शुल्कों को अवैध करार दिए जाने और अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से एक बार फिर 10 फीसदी टैरिफ का एलान किए जाने के बाद भारत समेत पूरी दुनिया में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। दरअसल, भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देश ट्रंप के टैरिफ के असर को कम करने के लिए एक अंतरिम व्यापार समझौता कर चुके हैं या इस पर अंतिम मुहर लगने का इंतजार कर रहे हैं। इसके तहत अमेरिका के बढ़े हुए टैरिफ कई देशों पर लागू किए गए थे। ऐसे में सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप के टैरिफ के साथ उन अंतरिम समझौतों को भी खत्म कर देगा। आइये जानते हैं...

सवाल-1: ट्रंप के टैरिफ का सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

सवाल-2: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या होगा? 

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने न केवल पुराने टैरिफ को खत्म किया, बल्कि इसके तहत आयातकों ने विदेश से आने वाले उत्पादों पर जो अतिरिक्त भुगतान (पुराने टैरिफ के तहत करीब 130 अरब से 175 अरब डॉलर) किए थे, उन्हें भी वापस मिलने (रिफंड) का रास्ता खुल गया है। हालांकि, यह प्रक्रिया काफी जटिल हो सकती है और जानकारों का मानना है कि इसमें वर्षों लग सकते हैं।

अदालत ने अब इस मामले को वापस अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय (सीआईटी) भेज दिया है ताकि रिफंड के दावों को सुलझाया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व में (1998 के फैसले के बाद) रिफंड देने की प्रक्रिया में लगभग दो साल का समय लगा था।
 

सवाल-3: आयात शुल्क का बोझ उठाने वाले कैसे ले सकते हैं रिफंड?
  • न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने कानूनी विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि हर एक आयातक को रिफंड पाने के लिए अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय (कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड) सीआईटी) में व्यक्तिगत रूप से मुकदमा दायर करना पड़ सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि इस मामले में कोई- क्लास एक्शन सूट (सामूहिक मुकदमा) संभव होगा या नहीं।
  • रिफंड की प्रक्रिया के लिए आयातकों को सटीक और विस्तृत दस्तावेज जमा करने होंगे। यूं तो सरकार के पास हासिल किए गए आयात शुल्क के विस्तृत रिकॉर्ड हैं, लेकिन रिफंड का सही अनुमान और इसे वापस खातों में पहुंचाना एक बड़ी उलझन पैदा कर सकता है।
  • रिफंड केवल उसी इकाई को मिल सकता है, जिसे इम्पोर्टर ऑफ रिकॉर्ड माना जाता है, यानी वह कंपनी जो सीमा शुल्क चुकाने और नियमों के पालन के लिए जिम्मेदार थी। अगर टैरिफ का भुगतान किसी और कंपनी के जरिए किया गया है, तो पैसा किसे मिलेगा यह उनके आपसी कॉन्ट्रैक्ट पर निर्भर करेगा।

सवाल-4: पुराने टैरिफ हटाए जाने के बाद ट्रंप ने क्या किया?

  • ट्रंप प्रशासन ने पुराने टैरिफ को आधिकारिक तौर पर खत्म कर दिया। राष्ट्रपति ने एक नया कार्यकारी आदेश जारी किया। इसमें अब व्यापार कानून की धारा 122 जैसे अन्य कानूनी प्रावधानों को लागू किया गया और नए 10% टैरिफ लागू किए गए हैं। यह नई दरें 24 फरवरी से प्रभावी होंगी।
  • धारा 122 अमेरिकी राष्ट्रपति को अधिकतम 150 दिनों तक के लिए अलग-अलग देशों से होने वाले आयात पर अधिकतम 15 फीसदी की ड्यूटी लगाने की छूट देता है। इस नियम के तहत ट्रंप टैरिफ लगाने के लिए कोई प्रशासनिक जांच या नियामक कदम उठाने के लिए बाध्य नहीं हैं। हालांकि, 150 दिन बाद यह टैरिफ लागू नहीं रहेंगे और सिर्फ संसद ही इनकी अवधि बढ़ा सकती है।

ये भी पढ़ें: Trump: 'टैरिफ ले नहीं सकता, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर सकता हूं', कोर्ट के फैसले पर बोले ट्रंप

सवाल-5: भारत पर अब कितना टैरिफ लगेगा?

अदालत के फैसले के बाद लगभग 55 फीसदी भारतीय निर्यात अब 18% के आयात शुल्क से मुक्त हो गए और इन पर 10 फीसदी टैरिफ लगेगा। यह दर भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के तहत तय की गई दर से कम है। इसकी पुष्टि ट्रंप सरकार के अधिकारियों की तरफ से भी की गई है। जब व्हाइट हाउस के एक अधिकारी से पूछा गया कि क्या भारत को 10% टैरिफ देना होगा, तो उन्होंने पुष्टि में कहा- हां, 10% जब तक कि कोई अन्य अधिकार लागू न हो। 

सवाल-6: भारत के टैरिफ पर विश्लेषक-विशेषज्ञों का क्या कहना है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत पर अब सिर्फ मानक मोस्ट-फेवर्ड नेशन (एमएफएन) टैरिफ और इसके ऊपर 10 फीसदी टैरिफ लगेगा, जो कि ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लगाया। 

सवाल-7. फिर भारत पर टैरिफ को लेकर भ्रम क्यों?

भारत पर टैरिफ 10 फीसदी रहेगा या 18 फीसदी, इसे लेकर भ्रम की स्थिति राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान से उभरी। उन्होंने कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते में कुछ भी नहीं बदला है। उनका कहना है कि भारत टैरिफ का भुगतान कर रहा है, हमने बस एक छोटा सा बदलाव किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडिया डील ऑन है और इसे बस एक अलग कानूनी तरीके से लागू किया जाएगा।

सवाल-8: टैरिफ हटने के बाद भी भारत के किन क्षेत्रों को राहत नहीं?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुराने टैरिफ अवैध घोषित होने के बावजूद, कई क्षेत्रों और उत्पादों को राहत नहीं मिली है। 



ये भी पढ़ें: टैरिफ अवैध तो अब क्या: बौखलाए ट्रंप ने दुनियाभर पर लगाए अतिरिक्त शुल्क, भारत को राहत या कुछ और? समझिए पूरा खेल
 

एमएफएन जारी रहेंगे, कम मूल्य वाले शिपमेंट की राहत खत्म

  • नया 10% का वैश्विक टैरिफ अमेरिका के मौजूदा 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' शुल्कों के अतिरिक्त हैं। उदाहरण के लिए अगर किसी उत्पाद पर पहले से पांच फीसदी का मानक शुल्क है, तो अब उस पर कुल 15% (5% + 10%) शुल्क देना होगा।
  • इससे पहले कम मूल्य वाले पार्सल (बी2सी), जो पहले शुल्क-मुक्त होते थे, उन्हें अब राहत नहीं मिलेगी। प्रशासन ने इन पर शुल्क-मुक्त छूट को निलंबित कर दिया है और अब उन पर भी 10% का नया वैश्विक टैरिफ लगेगा।
  • कुल मिलाकर भारतीय निर्यात अब 18% के बजाय 10% टैरिफ के दायरे में आ गए हैं, लेकिन स्टील, एल्युमीनियम, तांबा और ऑटो पार्ट्स जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को पुराने उच्च शुल्कों से कोई राहत नहीं मिली है।
  • दवाएं और स्मार्टफोन जैसे उत्पाद, जो पहले से ही छूट के दायरे में थे उनके आगे भी टैरिफ मुक्त रहने की संभावना है।

सवाल-9: भारत-अमेरिका के व्यापार समझौते में जो दर तय, उसका क्या होगा?

गौरतलब है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता लागू करने पर चर्चाएं जारी हैं। इससे पहले 6 फरवरी को दोनों देशों ने व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क पर सहमति जता दी थी। यानी दोनों देशों ने यह तय कर लिया था कि व्यापार समझौते पर अगर हस्ताक्षर होते हैं तो दोनों देश कितना आयात शुल्क एक-दूसरे पर लागू करेंगे। इसके तहत भारत ने अधिकतर अमेरिकी उत्पादों पर शून्य टैरिफ करने पर सहमति जता दी थी। उधर अमेरिका ने अलग-अलग सेक्टर्स के लिए टैरिफ को 50 फीसदी (25 फीसदी नियमित टैरिफ+25 फीसदी रूस से तेल खरीद के लिए जुर्मान टैरिफ) से घटाकर 18 फीसदी करने पर हामी भरी थी। 

इसके बाद समझौते के कानूनी टेक्स्ट को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय अधिकारियों का एक दल 23 फरवरी से वॉशिंगटन में अपने समकक्षों से मिलने वाला है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, इस समझौते पर अगले महीने हस्ताक्षर होने की संभावना है। इसके बाद यह अप्रैल तक लागू हो जाएगा। 

चूंकि अब तक व्यापार समझौते के नियमों पर दोनों देशों के अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं और इन्हें भारत-अमेरिका की संसद की भी मंजूरी नहीं मिली है, इसलिए फिलहाल दोनों देशों के बीच ट्रेड डील लागू नहीं है। हालांकि, टैरिफ की दरों पर एक सहमति है, जिसे लेकर अब विशेषज्ञ भारत को समझौता करने की सलाह दे रहे हैं। 

सवाल-10: ट्रंप का टैरिफ को लेकर आगे क्या कदम उठाने पर विचार?


1. धारा 301 के तहत जांच का दिया आदेश
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने 'धारा 301' के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार की नई जांच शुरू करने की घोषणा की है। धारा 301 अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 का एक ताकतवर प्रावधान है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति व्यापारिक विवादों को सुलझाने और अमेरिकी वाणिज्य पर बोझ डालने वाली अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने के लिए करते हैं। न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्रंप अब इन शक्तियों के जरिए देशों को निशाना बना सकते हैं।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भी अभी सिर्फ उन टैरिफ को अप्रभावी किया है, जो कि आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए थे। धारा 301 के तहत पहले से लागू टैरिफ पूरी तरह से प्रभावी हैं और इस कानूनी बदलाव से उन पर कोई असर नहीं पड़ा है।

2. पहले क्यों नहीं इस्तेमाल की थी ये धारा?
बताया जाता है कि ट्रंप ने शुरुआत में आपात शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए टैरिफ लगाए थे, ताकि अलग-अलग व्यापारिक साझेदारों पर दबाव बनाया जा सके। हालांकि, अब इन टैरिफ के रद्द होने के बाद वे अंतरिम समझौते न मानने वाले देशों को धारा 301 के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार वाले देशों के वर्ग में ला सकते हैं। उन्होंने अपने प्रशासन को इस धारा के तहत नई जांच शुरू करने के आदेश भी दे दिए हैं। 

धारा 301 के तहत जांच की प्रक्रिया काफी लंबी होती है। इसलिए ट्रंप ने शुरुआत में इस धारा का इस्तेमाल नहीं किया। विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, इन जांचों को पूरा होने और नए टैरिफ लागू करने के लिए ठोस कानूनी आधार तैयार करने में आमतौर पर एक साल या उससे अधिक का समय लग सकता है। हालांकि, ये जांच स्थायी और विशिष्ट टैरिफ लगाने का कानूनी आधार देती है।

3. धारा 301 के तहत अब कौन से देश जांच के दायरे में?
हालांकि अभी सभी देशों की सूची स्पष्ट नहीं है, लेकिन प्रशासन ने संकेत दिया है कि चीन और ब्राजील के खिलाफ पहले से ही जांच चल रही है, और वियतनाम-कनाडा जैसे अन्य बड़े व्यापारिक साझेदार भी भविष्य में इसके दायरे में आ सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते में तय दरों पर फिर बातचीत हो सकती है। हालांकि, नए व्यापारिक समझौते को भविष्य में धारा 301 या धारा 232 (राष्ट्रीय सुरक्षा) जैसे कानूनों के ढांचे से सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती होगी।

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