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US tariffs: अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ से भारतीय उद्योगों पर दबाव, कंपनियां रणनीति बदलने पर कर रहीं काम

Wed, 27 Aug 2025 06:58 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नविता स्वरूप Updated Wed, 27 Aug 2025 06:58 PM IST
सार

बुधवार से भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लागू हो गया है। भारतीय निर्यातक नए बाजारों की तलाश करने पर जोर दे रहे। वहीं कंपनियां रणनीतिक रूप से अमेरिकी बाजार में अपनी उपस्थिति को पुनर्गठित कर रही हैं। क्रिसिल इंटेलिजेंस की एक शोध के अनुसार कपड़ा, केमिकल और समुद्री खाद्य और ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र में अमेरिकी टैरिफ से 19 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात प्रभावित होंगे।

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US 50 percent tariff puts pressure on Indian industries, companies are working on changing their strategy
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमेरिका के राष्ट्रपति ने रूसी तेल आयात की वजह से भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। यह बुधवार से लागू हो गया, जिससे भारत पर कुल टैरिफ दर 50 प्रतिशत हो गई। इसकी वजह से वे सेक्टर जो अमेरिका में सबसे अधिक निर्यात करते हैं, उनको उच्च टैरिफ दरों को चुकाना पड़ेगा। इसमें टैक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, वस्त्र और केमिकल उद्योग सहित फूटवियर, फर्नीचर मुख्य हैं। तिरुपुर के रेडीमेड परिधान निर्माता और सूरत के हीरा पॉलिश से लेकर केमिकल्स कंपनियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। 

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कंपनियां रणनीतिक रूप से स्थिति को पुनर्गठित कर रही 
वस्त्र उद्योग का कहना है कि हम नए बाजारों की तलाश करने पर जोर दे रहे। वहीं केमिलक कंपनियां रणनीतिक रूप से अमेरिकी बाजार में अपनी उपस्थिति को पुनर्गठित कर रही हैं। वे चुनौतियों से निपटने के लिए अपने संपूर्ण बाजार को प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं। जबकि जैम्स एंड ज्वेलरी उद्योग उन देशों जहां टैरिफ की दरें कम हैं, विशेषकर यूएई और मॉरिशस से अपने कारोबार की यूनिटों को शिफ्ट कर रही हैं।
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नए बाजार और उत्पादन की गुणवता पर जोर
क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुख्य सरंक्षक राहुल मेहता का कहना है कि कंपनियां अमेरिका के अलावा नए बाजारों की तलाश कर रही हैं। टैरिफ प्रभावों को कम करने के लिए सरकार को ब्रिटेन की तरह अन्य देशों के साथ व्यापार समझौता करने पर जोर देना होगा, जो कि कंपनियां कर रही हैं। वहीं नए बाजार जिसमें भारत के लिए जापान एक बड़ा बाजार हो सकता है, वहां ध्यान देना होगा। साथ ही उत्पादन की गुणवता को सुधारते हुए उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बनाने की जरूरत है।
 
इथोपिया से हो रहा 30 प्रतिशत कारोबार
रेमंड इंडस्ट्री ने हाल ही में अपने तिमाह परिणामों की घोषणा करते हुए बताया था कि कुल कारोबार में विशेषकर टैक्सटाइल क्षेत्र में अमेरिका का हिस्सा 50 से 55 प्रतिशत है। इसकी वजह से कारोबार पर प्रभाव पड़ेगा। रेमंड कंपनी के सीएफओ अमित अग्रवाल ने कहा कि कंपनी का 30 प्रतिशत कारोबार और मैन्युफेक्चरिंग इथोपिया में है, जहां टैरिफ की दरें 10 प्रतिशत हैं। भारत पर 50 प्रतिशत की टैरिफ लागू होने पर कंपनी इथोपिया के जरिए अपने कारोबार को आगे बढ़ाएंगी। साथ ही कंपनी बांग्लादेश और वियतनाम में अपनी सप्लाई को तेज करेगी।

रेडीमेड गारमेंट्स पर टैरिफ बढ़कर 61 प्रतिशत हुआ
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुशन शर्मा कहते हैं कि उच्च टैरिफ के कारण बढ़ी हुई उत्पाद कीमतों की वजह से कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ेगा। रेडीमेड गारमेंट्स क्षेत्र की कंपनियों को अमेरिका में अपनी पकड़ कमजोर होने की उम्मीद है। टैरिफ बढ़कर 61 प्रतिशत हो गया है, इसमें 50 प्रतिशत अतिरिक्त मूल्यानुसार शुल्क भी शामिल होता है, जबकि बांग्लादेश और वियतनाम में उनके समकक्षों के लिए टैरिफ 31 प्रतिशत है। तुरुपुर कल्स्टर जो भारत के रेडीमेड गारमेंट्स निर्यात का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है, गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है। इसका लगभग 30 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को होता है।

जेम्स एंड ज्वेलरी नए रास्तों से बढ़ाएगा कारोबार
टैरिफ से निपटने के लिए और इसका प्रभाव कारोबार पर कम करने के लिए जेम्स एंड ज्वेलरी उद्योग नए रास्तों के जरिए कारोबार को बढ़ाने की रणनीति तैयार कर रहा है। जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के अध्यक्ष किरिट भंसाली कहते हैं कि हम दूसरे विकल्पों को तैयार कर रहे हैं, इसके लिए हमने यूएई जहां 10 प्रतिशत टैरिफ है और मेक्सिको में 25 प्रतिशत की टैरिफ दर है, इन देशों के जरिए हम अमेरिका से कारोबार करेंगे। हम अपने उत्पादों को दूसरे देशों से री रूट करके अमेरिका भेजेंगे, जिसमें हम टैरिफ के प्रभाव को कम कर सकेंगे। उत्पादों को री रूट करने की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी होगी। वहीं तनिष्क भी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को मिडल ईस्ट में स्थापित करने पर काम कर रही है। भंसाली कहते हैं कि 50 प्रतिशत का टैरिफ उद्योग को बहुत बूरी तरह से प्रभावित करेगा। इसलिए उद्योग को बचाने के लिए नए रास्तों की तलाश की जा रही है।

19 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात पर पडे़गा असर
क्रिसिल इंटेलिजेंस की एक शोध के अनुसार कपड़ा, केमिकल और समुद्री खाद्य और ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र में अमेरिकी टैरिफ से 19 अरब डॉलर मूल्य के निर्यात प्रभावित होंगे। हालांकि इन क्षेत्रों के घरेलू बाजार में 10 अरब डॉलर की वृद्धि की उम्मीद है, इसलिए प्रभाव कुछ हद तक कम होने की भी उम्मीद हमें दिखाई देती है।

केमिकल कंपनियों पर दबाव अधिक
केमिकल कंपनी लक्ष्मी ऑग्रेनिक ने अपनी एक समीक्षा में बताया कि कंपनी का 30 प्रतिशत राजस्व अमेरिकी बाजार से आता है। कंपनी अपने राजस्व का एक बड़ा हिस्सा निर्यात से प्राप्त करती है, जो अमेरिका, यूरोप , जापान और चीन सहित बाजारों में आता है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियां काफी महत्वपूर्ण हो जाती हैं। कंपनी का कहना है अमेरिकी बाजार में उपस्थिति की वजह से टैरिफ में वृद्धि हमारे लाभप्रदता को प्रभावित कर सकती है। हम इसके लिए नई रणनीति पर काम कर रहे हैं। घरेलू बाजार पर ध्यान देते हुए कंपनी विकास को समर्थन देने और बाजार में अपनी  स्थिति में सुधार लाने के लिए बड़े स्तर पर पूंजीगत व्यय करने की योजना बना रही है। 

उत्पाद पोर्टफोलियों के साथ मूल्य निर्धारण जरूरी
केमिकल कंपनी आरती इंडस्ट्री के अनुसार कंपनी अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव का मूल्यांकन कर रही है। टैरिफ की वजह से कुछ उत्पादों की लागत बढ़ सकती है, खासतौर पर वे उत्पाद जो अमेरिका में अधिक मांग रखते हैं। ऐसे में मूल्यों को निर्धारित करने और ग्राहकों की मांग को बनाए रखने की चुनौती सबसे अधिक है। हम अपने उत्पाद पोर्टफोलियों के साथ मूल्य निर्धारण और मांग में उतार-चढ़ाव पर ध्यान देंगे।  साथ ही अन्य देशों के उत्पादों की तुलना में अपने उत्पादों को बेहतर बनाते हुए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने की योजना है। फिलहाल कंपनी अमेरिकी बाजार में अपने आप को एक बार फिर पुर्नगठित करेगी।

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