मंदी से ट्रक मालिकों पर डिफॉल्टर होने का खतरा, बैंकों और NBFC से लगाई गुहार
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अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती की वजह से ट्रक मालिकों पर डिफॉल्टर होने का खतरा बढ़ गया है। पिछले छह से सात महीने से पर्याप्त कारोबार को तरस रहे ट्रक मालिकों ने बैंकों और एनबीएफसी से अपने कर्ज का पुनर्गठन करने की गुहार लगाई है। इससे बैंकों का कर्ज एनपीए नहीं होगा और ट्रक मालिकों का सिबिल भी बरकरार रहेगा।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) के सदस्य इंदौर ट्रक ऑपरेटर्स एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सीएल मुकाती का कहना है कि ट्रक ऑपरेटर कारोबार पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बजट के बाद डीजल के दाम में करीब ढाई रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो गई है, जबकि मंदी के कारण किराया बढ़ा नहीं सकते। ऐसे में उनका लाभ बिल्कुल कम हो गया है और वह ट्रकों की ईएमआई समय से नहीं चुका पा रहे। उन्होंने बैंकों और एनबीएफसी से अनुरोध किया है कि जैसे उद्योग जगत के कर्ज का पुनर्गठन किया जाता है, उसी तरह उन्हें भी राहत दी जाए।
तिहाई घट गई माल ढुलाई
इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग (आईएफटीआरटी) के सीनियर फेलो एसपी सिंह का कहना है कि आर्थिक सुस्ती के माहौल में ट्रकों का माल ढुलाई के लिए उपयोग 30-40 फीसदी कम हो गया है। ऊपर से पिछले कुछ वर्षों में इतने नए ट्रक खरीदे गए कि बाजार में इसका ओवरसप्लाई हो गया। अब ट्रक मालिक दो-तीन साल पुराने वाहन या तो फाइनेंसर को सरेंडर कर रहे हैं या उसके कर्ज का पुनर्गठन करा रहे हैं। हालात यह है कि ट्रेलर को ट्रक को वापसी में माल भरने के लिए 10 दिन इंतजार करना पड़ता है।