RBI: व्यापारियों ने चेक क्लियरिंग का समय घटाने के लिए आरबीआई के प्रस्ताव का किया स्वागत, कारोबार होगा सुगम
Cheque Clearing Rules: भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) चेक समशोन में लगने वाले समय को कम करने का प्रस्ताव दिया है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी मौद्रिक नीति की समीक्षा की घोषणा करते हुए यह एलान किया। कारोबारियों ने केंद्रीय बैंक के इस फैसले पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।
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भारतीय रिजर्व के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लिए गए फैसलों का एलान किया। इस दौरान उन्होंने चेक समाशोनधन प्रक्रिया को तेज करने से जुड़े प्रस्ताव की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव चेक क्लियरिंग की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए लाया गया है। इसके जरिए ग्राहकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) की वर्तमान प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर कारोबारियों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका मानना है कि इससे कारोबार को काफी लाभ मिलेगा। हालांकि अब देश में कारोबारी डिजिटल भुगतान प्रणाली अपना रहे हैंपर इसके बावजूद 25 से 30 प्रतिशत तक का कारोबार चेक के जरिए किया जाता है। ऐसे में आरबीआई के इस फैसले से कारोबार में तेजी आने की उम्मीद है।
25 से 30 प्रतिशत कारोबार चेक के जरिए होते हैं
कॉन्फडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का कहना है कि वर्तमान समय में क्रेडिट पर माल देना, कारोबारियों को सरकारी पेमेंट करना और व्यापार से जुड़े विशेषकर आयात-निर्यात से जुड़े कारोबारी चेक देते पेमेंट करते हैं। वर्तमान समय में 25 से 30 प्रतिशत कारोबार चेक पेमेंट से किया जाता है और यह करोड़ रुपये का होता है, चेक के जरिए 1000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रतिदिन होता है। सरकारी खरीदारी करने के लिए भी चेक से पेमेंट किया जाता है। इसलिए आरबीआई का यह फैसला राहत प्रदान करता है। इससे कुछ घंटों में चेक क्लियर होने से क्रेडिट पर दिए गए माल का पेमेंट मिल जाएगा। दूसरा चेक बाउंस की समस्या भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। तीसरा बैंक जो दो से तीन दिन तक हमारे पैसों का इस्तेमाल करता था वह भी कम हो जाएगा।
चेक जल्दी क्लियर होने से कारोबार में होगी आसानी
भारत मर्चेंट चेंबर के राजीव सिंघल का कहना है कि बैंकों में चेक जमा करना और उसको क्लियर होने में एक से दो दिन का समय लग जाता है। ऐसे में यदि किसी को माल खरीदना है तो माल तब ही मिलेगा जब उसका चेक क्लियर होगा। ऐसे में चार से पांच दिन चले जाते हैं। हालांकि ऑनलाइन पेमेंट की वजह से इस प्रकार समस्या अब नहीं आ रही है। 80 प्रतिशत कारोबारी ऑनलाइन पेमेंट करते हैं। वे कहते हैं कि इसे लागू करने के बाद वर्तमान में हो रहे आरटीजीएस और एनईएफटी का इस्तेमाल थोड़ा कम होने की संभावनाएं बनती हैं। मुंबई में कालबादेवी के कपड़ा व्यापारी धर्मेश ठक्कर कहते हैं चेक क्लियरेंस कुछ ही घंटो में होने से कारोबार में आसानी तो होगी। बावजूद इसके ऑनलाइन पमेंट अधिक होता है, जो कि कारोबारियों के लिए सबसे फायदमेंद है। लेकिन चेक से भी लेनदेन कारोबारी करते हैं और इसका भी एक बड़ा हिस्सा कारोबार को प्रभावित करता है। इससे फैसले से कारोबार में तेजी आएगी और व्यापार बढ़ेगा।
ग्राहकों और कारोबारियों को होगी सुविधा
आरबीआई के इस फैसले से कारोबारियों और ग्राहकों दोनों को सुविधा मिलेगी। कारोबारी कहते हैं कि चेक जमा करने के बाद दो से तीन दिन तक इंतजार करना होता है, जो अब नहीं करना होगा। पहले की तुलना में बैंकों की छुट्टीयां अभी अधिक होने से चेक जमा होने के बाद भी छुट्टी होने की वजह से क्लियर नहीं होता है, कुछ घंटों में ही चेक क्लियर होने से यह समस्या भी नहीं रहेगी। चेक बाउसं होनी की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा क्योंकि चेक देने से पहले चुकाने वाले को अपने एकाउंट में बैलेंस रखना जरूरी होगा। इसे लागू करने के बाद आरटीजीएस और एनईएफटी का इस्तेमाल थोड़ा कम होने की संभावना है।
नई व्यवस्था में क्या है प्रस्ताव?
आरबीआई के अनुसार नई व्यवस्था में चेक को स्कैन किया जाएगा। इससे कुछ ही घंटो में इसकी क्लियरिंग हो जाएगी। फिलहाल अभी चेक क्लियर होने में एक से दो दिन लगते हैं। आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि इससे जुड़े दिशा निर्देशों की विस्तृत जानकारी जल्द ही जारी की जाएगी। इसके साथ ही आरबीआई ने बैंकों की तरफ से अपने ग्राहकों के बारे में क्रेडिट सूचना जो कि कंपनियों को दी जाने वाली रिपोर्ट अब हर पखवाड़े देने का प्रस्ताव दिया है। इससे ग्राहकों को अपने सिबिल स्कोर यानी क्रेडिट स्कोर की जानकारी मिलती रहेगी।