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रिपोर्ट: तेल की कीमतों में नरमी से भारत को व्यापार घाटे में मिलेगी राहत, सोने-चांदी के आयात ने बढ़ाई चिंता

Tue, 21 Apr 2026 04:50 AM IST
Nirmal Kant अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: Nirmal Kant Updated Tue, 21 Apr 2026 04:50 AM IST
सार

सोना-चांदी के ज्यादा आयात से देश का व्यापार अंतर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि निर्यात में बढ़ोतरी बहुत धीमी रही। अगर वैश्विक हालात सुधरते हैं और कच्चे तेल व अन्य कमोडिटी सस्ती होती हैं, तो आने वाले समय में आयात खर्च घटने और निर्यात बढ़ने से स्थिति बेहतर हो सकती है। हालांकि, तनाव और महंगी ऊर्जा कीमतें बनी रहीं तो चालू खाते पर दबाव बढ़ने का खतरा रहेगा। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में क्या कहा गया, पढ़िए-

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trade deficit to narrow on trade deal and oil price easing report
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

कई देशों के साथ व्यापार समझौते और कच्चे तेल की कीमतों में हालिया तेजी के बाद आने वाली नरमी से भारत को रिकॉर्ड व्यापार घाटे के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक रिपोर्ट में कहा, प्रमुख रूप से सोने और चांदी के आयात में वृद्धि से वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 333.3 अरब डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। अगर भू-राजनीतिक मोर्चे पर हालात नियंत्रित रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतें नीचे आती हैं, तो आने वाले महीनों में भारत के व्यापार घाटे में कमी आने की उम्मीद है।
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रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद उपजे वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के आर्थिक बुनियादी आधार स्थिर बने हुए हैं। भू-राजनीतिक बाधाएं जैसे-जैसे दूर होंगी और विभिन्न देशों से नए व्यापार समझौतों का समर्थन मिलेगा, भारत के बाहरी क्षेत्र के प्रदर्शन में काफी सुधार होने की उम्मीद है। इससे न सिर्फ देश का निर्यात बढ़ेगा, बल्कि कमोडिटी की कीमतों में नरमी से आयात बिल में कमी आएगी और व्यापार घाटे के मोर्चे पर राहत मिलेगी। हालांकि, अगर ये बाधाएं बनी रहती हैं एवं कच्चे तेल समेत कमोडिटी की कीमतें और ऊपर जाती हैं, तो देश के चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ सकता है। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 1.5 से 2 फीसदी के बीच रहने का अनुमान लगाया है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से 441.7 अरब डॉलर की वस्तुओं का निर्यात किया गया, जो सिर्फ 0.9 फीसदी की वृद्धि दिखाता है। 2024-25 में यह 0.2 फीसदी बढ़ा था। आयात भी 721 अरब डॉलर के मुकाबले बढ़कर 775 अरब डॉलर पहुंच गया। इस तरह, कुल व्यापार घाटा बढ़कर 333 अरब डॉलर के पार पहुंच गया।
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सेवाओं का निर्यात बढ़ने से कुल व्यापार घाटा (वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर) 119.3 अरब डॉलर रहा। 2024-25 में देश का कुल व्यापार घाटा 94.7 अरब डॉलर रहा था।

2025-26 के दौरान क्रूड का आयात 6.5 फीसदी कम हो गया, जबकि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण होर्मुज मार्ग बंद होने से तेल की कीमतें 58 फीसदी बढ़ गई थीं। 2025-26 के अप्रैल से फरवरी के बीच कच्चे तेल की कीमतों में सालाना आधार पर एक फीसदी की गिरावट आई, जिससे क्रूड आयात बिल पर पड़ने वाले पूरे साल के नुकसान को सीमित करने में मदद मिली।


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चीन से आयात 2024-25 के 11.5 फीसदी के मुकाबले 16 फीसदी बढ़ गया। अमेरिका से आयात भी 8.1 फीसदी से बढ़कर 15.9 फीसदी पहुंच गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतों में उछाल के कारण सोना और चांदी आयात बिल पर सबसे ज्यादा दबाव डालने वाले कारक बने रहे। सोने का आयात 2024-25 में 27 फीसदी बढ़ने के बाद 2025-26 में 26 फीसदी बढ़ गया। चांदी के आयात में बीते वित्त वर्ष के दौरान 151 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि 2024-25 में 11.3 फीसदी की गिरावट आई थी।

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