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रिपोर्ट में दावा: महामारी में बढ़ी अनुभव की अहमियत, युवाओं पर संकट ज्यादा
Wed, 23 Jun 2021 07:38 AM IST
देव कश्यप
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 23 Jun 2021 07:38 AM IST
सार
- बिना जान-पहचान के नौकरी खोजने और बचाए रखने में आ रही मुश्किल
- पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा चिंतित
- 30 फीसदी जेनरेशन जेड और 26 फीसदी मिलेनियल नौकरी की कमी से परेशान
- 43 फीसदी ज्यादा समय लग रहा है नौकरी तलाशने में 2019 के मुकाबले
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महिलाओं को नौकरी की चिंता (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : pixabay
विस्तार
महामारी की दूसरी लहर ने नौकरियों के मोर्चे पर महिलाओं और युवाओं की चिंता बढ़ा दी है। इन्हें न सिर्फ नौकरी ढूंढने में समस्या आ रही है, बल्कि अनुभव और जान-पहचान के बिना मौजूदा नौकरी में बने रहना भी मुश्किल हो रहा है।
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लिंक्डइन वर्कफोर्स कॉन्फिडेंस इंडेक्स की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि पुराने एवं अनुभवी साथियो के मुकाबले युवाओं की चिंता दोगुना बढ़ गई है। करीब 30 फीसदी जेनरेशन जेड (1997 के बाद जन्मे) पेशेवर, 26 फीसदी मिलेनियल (1981 से 1996 के बीच पैदा हुए) और 18 फीसदी बेबी बूमर्स (1946 से 1964 के बीच जन्मे) नौकरियों की कमी को लेकर परेशान हैं। नए स्नातकों के लिए नौकरी ढूंढने का औसत समय कोविडपूर्व से 43 फीसदी बढ़ गया है।
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पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा चिंतित
दूसरी लहर ने नौकरियों के मोर्चे पर महिलाओं के लिए ज्यादा असंतोष पैदा कर दिया है। नौकरी की उपलब्धता और ढूंढने में लगने वाले समय को लेकर पुरुषों के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा कामकाजी महिलाएं चिंतित है। यही वजह है कि महिला पेशेवरों का व्यक्तिगत सूचकांक (आईसीआई) मार्च के 57 से घटकर जून में 49 रह गया, जो कामकाजी पुरुषों के मुकाबले चार गुना कम है। हालांकि, कामकाजी पुरुषों के आईसीआई में भी गिरावट आई है।
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महिलाओं और युवाओं में आत्मविश्वास सबसे कम
मामूली सुधार के बावजूद कामकाजी महिलाओं और युवा पेशेवरों में आत्मविश्वास का स्तर मौजूदा श्रमबल में सबसे कम है। यही वजह है कि कामकाजी पुरुषों की तुलना में दोगुनी महिलाएं नौकरी की उपलब्धता को लेकर चिंतित हैं, जबकि 30 फीसदी जेनरेशन जेड पेशेवर नौकरी की कमी को लेकर परेशान हैं। -आशुतोष गुप्ता, कंट्री मैनेजर, लिंक्डइन इंडिया