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Cabinet: सरकार ने दिल्ली, हरियाणा व महाराष्ट्र से जुड़ी बड़ी रेल परियोजनाओं को दी मंजूरी, जानिए क्या है तैयारी

Sat, 14 Feb 2026 01:38 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Sat, 14 Feb 2026 01:38 PM IST
सार

कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने 18,509 करोड़ रुपये की लागत वाली रेल मंत्रालय की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से 389 किमी रेल नेटवर्क बढ़ेगा, कनेक्टिविटी मजबूत होगी। आइए विस्तार से जानते हैं। 

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The government has approved major rail projects in Delhi, Haryana and Maharashtra
मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने रेल मंत्रालय की तीन महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इनकी कुल लागत लगभग 18,509 करोड़ रुपये है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिन परियोजनाओं को स्वीकृति मिली। 

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इनमें ये लाइन शामिल हैं

  • कसारा- मनमाड तीसरी और चौथी लाइन, 
  • दिल्ली-अंबाला तीसरी और चौथी लाइन, 
  •  बल्लारी-होसपेटे तीसरी और चौथी लाइन 

परियोजनाओं का उद्देश्य क्या?

सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं से रेलवे की लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे यातायात सुगम होगा, परिचालन दक्षता बढ़ेगी और सेवाओं की विश्वसनीयता में सुधार आएगा। मल्टी-ट्रैकिंग के जरिए भीड़भाड़ कम करने और संचालन को अधिक सुव्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

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ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जिनका उद्देश्य मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को मजबूत करना है। इससे लोगों, माल और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।

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तीनों परियोजनाएं किन-किन राज्यों को कवर करेंगी?

  • तीनों परियोजनाएं दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 12 जिलों को कवर करेंगी और भारतीय रेल नेटवर्क में लगभग 389 किलोमीटर की वृद्धि करेंगी। इनसे करीब 3,902 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी, जिनकी कुल आबादी लगभग 97 लाख है।
  • सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, हम्पी (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल), बल्लारी किला, तुंगभद्रा बांध और अन्य धार्मिक व ऐतिहासिक स्थानों तक पहुंच बेहतर होगी।
  • साथ ही ये रूट कोयला, स्टील, लौह अयस्क, सीमेंट, खाद्यान्न, उर्वरक, कंटेनर और पेट्रोलियम उत्पाद जैसे प्रमुख माल परिवहन के लिए अहम हैं। क्षमता वृद्धि से अतिरिक्त 96 मिलियन टन प्रतिवर्ष माल ढुलाई की संभावना है।

क्या-क्या मिलेगा लाभ?

रेल मंत्रालय के मुताबिक, इन परियोजनाओं से लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी, तेल आयात में लगभग 22 करोड़ लीटर की बचत होगी और 111 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग चार करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। सरकार का मानना है कि ये परियोजनाएं क्षेत्रीय विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देंगी।

नोएडा मेट्रो रेल परियोजना को भी मिली मंजूरी

साथ ही नोएडा मेट्रो रेल परियोजना के सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक विस्तार को मंजूरी दे दी गई है। यह कॉरिडोर 11.56 किलोमीटर लंबा होगा और इसमें 8 एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाएंगे।

केंद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि इस विस्तार के चालू होने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सक्रिय मेट्रो नेटवर्क की कुल लंबाई 61.62 किलोमीटर हो जाएगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन और कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।

उन्होंने कहा कि सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक का यह कॉरिडोर शहर के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना बॉटनिकल गार्डन पर ब्लू और मैजेंटा लाइन से सीधा इंटरचेंज उपलब्ध कराएगी, जिससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

सरकार के अनुसार, यह कॉरिडोर प्रमुख व्यावसायिक, कॉर्पोरेट, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और मनोरंजन क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगा। इससे ट्रैफिक जाम और यात्रा समय में कमी आने के साथ ही स्वच्छ और कम उत्सर्जन वाले सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, इससे नोएडा और ग्रेटर नोएडा में आर्थिक गतिविधियों और शहरी गतिशीलता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इससे पहले, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शहरी विकास को गति देने के लिए अर्बन चैलेंज फंड (UCF) की शुरुआत को भी मंजूरी दी थी। केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपये की सहायता प्रदान करेगी, जिससे 2031 तक शहरी क्षेत्र में लगभग 4 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश को बढ़ावा मिलने का अनुमान है।

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