फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   The facts on Trump’s 2018 loosening of regulations on banks like SVB

SVB Crisis: क्या डोनाल्ड ट्रंप ले डूबे अमेरिकी बैंक, जानें पूर्व राष्ट्रपति की क्यों हो रही है आलोचना

Fri, 17 Mar 2023 12:50 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 17 Mar 2023 12:50 PM IST
सार

SVB Crisis: 2018 में ट्रंप सरकार ने इस कानून में बदलाव कर बैंकों को 50 बिलियन डॉलर की सीमा से मुक्त कर दिया गया। उस दौरान कई बैंकों ने तर्क दिया था कि यह अनावश्यक रूप से उन पर बोझ डाल रहा था। 

विज्ञापन
The facts on Trump’s 2018 loosening of regulations on banks like SVB
डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : amarujala.com

विस्तार

पिछले हफ्ते सिलिकॉन वैली बैंक के दिवालिया होने के बाद अमेरिका में बैंकों के धराशायी होने का एक सिलसिला शुरू हो गया। अमरिका के राजनीतिक हलकों में इस इस आर्थिक संकट के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया जाने लगा है।  वरमोंट के सेन बर्नी सैंडर्स ने तर्क दिया कि अमेरिकी बैंकों पर आए इस संकट का सबसे बड़ा कारण पूर्व  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से  हस्ताक्षरित 2018 एक "बेतुका" कानून है। ट्रंप ने उस दौरान एसवीबी के आकार के बैंकों से संबंधित नियामकीय नियमों में ढ़ील दे दी थी। 

विज्ञापन


हालांकि राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एसवीबी के पतन के लिए 2018 के रोलबैक (कानून वापस लेने) को सैंडर्स की तरह सीधे तौर पर तो दोषी नहीं ठहराया, लेकिन बैंकिंग प्रणाली पर अपनी सोमवार की टिप्पणियों में उन्होंने ट्रम्प शासन काल में लागू किए गए कानून की आलोचना की। 
विज्ञापन


इस बीच, ट्रम्प ने भी पलटवार किया है उन्होंने  एसवीबी गड़बड़ी में अपनी किसी भी भूमिका को खारिज कर दिया है। उनके प्रवक्ता ने डेमोक्रेट्स पर अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए जनता को धोखा देने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। आइए जानते हैं 2018 में ट्रंप शासनकाल में बैंकों से जुड़े कानूनों में जो बदलाव हुए उससे एसवीबी और सिग्नेचर जैसे बैंक कैसे प्रभावित हुए? ट्रंप काल के कानून ने सिलिकॉन वैली जैसे बैंको को कैसे खस्ताहाल किया?

विज्ञापन
विज्ञापन

The facts on Trump’s 2018 loosening of regulations on banks like SVB
एसवीबी - फोटो : amarujala.com

डोड-फ्रैंक एक्ट क्या है, 2018 में ट्रंप ने कानून में क्या बदलाव किया?
वर्ष 2007-08 की मंदी के दौरान बैकों को डूबने से बचाने के लिए कई कड़े नियम बनाए गए थे। 2010 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक कानून पर हस्ताक्षरण किया था, इसे व्यापक रूप से डोड-फ्रैंक के नाम से जाना जाता है। इस नियम के तहत ने कम से कम 50 बिलियन डॉलर की संपत्ति वाले बैंकों के लिए सख्त नियम बनाए थे। इन बैंकों, जिन्हें वित्तीय प्रणाली के लिए "व्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण" माना जाता था को वार्षिक फेडरल रिजर्व के "तनाव परीक्षण (Stress Test)" से गुजरना आवश्यक था।

ऐसा बैंक की पूंजी के कुछ स्तरों को बनाए रखने के लिए (नुकसान को झेलने में सक्षम होने के लिए) और तरलता (नकदी दायित्वों को जल्दी से पूरा करने में सक्षम होने के लिए), और यदि वे विफल हो जाते हैं तो उनके त्वरित और व्यवस्थित विघटन के लिए भविष्य की योजना बनाने की मकसद से किया गया था।  ये नीतियां वित्तीय प्रणाली को ढहने से रोकने के लिए बनाए गए थे। 2018 में ट्रंप सरकार ने 250 बिलियन डॉलर से कम की संपत्ति वाले बैंकों को इन नीतियों से मुक्त कर दिया था। ऐसे बैंकों में एसवीबी भी शामिल था। 

The facts on Trump’s 2018 loosening of regulations on banks like SVB
सिलिकन वैली बैंक संकट - फोटो : amarujala.com

कानून में बदलाव के पीछे क्या तर्क दिया गया? 
2018 में ट्रंप सरकार ने इस कानून में बदलाव कर बैंकों को 50 बिलियन डॉलर की सीमा से मुक्त कर दिया गया। उस दौरान कई बैंकों ने तर्क दिया था कि यह अनावश्यक रूप से उन पर बोझ डाल रहा था। कानून में बदलाव के बाद केवल वे बैंक नियामकीय दायरे में बचे थे जिनकी संपत्ति कम से कम 250 बिलियन डॉलर थी, ऐसे बैंकों की संख्या उस समय केवल एक दर्जन थी। 

रोलबैक कानून ने फेडरल रिजर्व को कम से कम 100 बिलियन डॉलर की संपत्ति वाले विशेष बैंकों पर नियमों को लागू करने का विकल्प चुनने का अधिकार दिया और यह कहा कि जो बैंक 100 बिलियन डॉलर की संपत्ति के दायरे में आते हैं, उन्हें अब भी "आवधिक" फेड तनाव परीक्षणों से गुजरना पड़ेगा। कानून में बदलाव का 50 बिलियन डॉलर से अधिक और 250 बिलियन डॉलर से कम संपत्ति वाले बैंकों को बड़ा फायदा हुआ और वे कड़े नियामकीय दायरे से बाहर हो गए। उस वक्त ट्रंप सरकार के रोलबैक को ऐसे बैंकों के लिए जीत के तौर पर देखा गया। ऐसे बैंकों की सूची में एसवीबी भी शामिल था, जिसके सीईओ ग्रेग बैकर ने कांग्रेस से 50 बिलियन डॉलर के दायरे को बढ़ाने की मांग मांग की थी। 

The facts on Trump’s 2018 loosening of regulations on banks like SVB
सिलिकॉन वैली बैंक (SVB) - फोटो : सोशल मीडिया

रोलबैक के समय एसवीबी ने कहा था उस पर कोई खतरा नहीं 
बेकर ने 2015 में कांग्रेस के सामने तर्क दिया था कि जब कोई बैंक 50 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच जाता है तो नियमों को लागू करने से एसवीबी जैसे बैंकों पर "अनावश्यक रूप से" बोझ पड़ेगा, जिसके पास तब 40 बिलियन डॉलर की संपत्ति थी।  उनका तर्क था कि बैंक को नियमों का पालन करने में अधिक समय और पैसा खर्च करने की आवश्यकता होती है। उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि एसवीबी अन्य "मध्यम आकार" बैंकों की तरह "प्रणालीगत जोखिम" से बाहर है। उस दौरान उन्होंने तर्क दिया था "हमारी गतिविधियों और व्यवसाय मॉडल के कम जोखिम प्रोफ़ाइल को देखते हुए डोड-फ्रैंक जैसे नियम हमारे ग्राहकों को क्रेडिट प्रदान करने की हमारी क्षमता को रोक देगा।"

The facts on Trump’s 2018 loosening of regulations on banks like SVB
Why biggest startups start in Silicon valley - फोटो : Istock

बैंकों ने रोलबैक पर दिए थे लोकलुभावन तर्क 
कांग्रेस में अन्य बैंकों और उनके समर्थकों ने भी इसी तरह के लोकलुभावन तर्क दिए थे। लेकिन कई कांग्रेस डेमोक्रेट्स और बैंकिंग विनियमन के अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी थी कि महत्वपूर्ण उधारदाताओं के लिए नियमों में ढील देना एक और संकट को आमंत्रित कर सकता है। विधेयक के पारित होने से पहले गैर-पक्षपातपूर्ण कांग्रेस के बजट कार्यालय ने लिखा था कि रोल बैंक से इस बात की "आशंका बढ़ जाएगी कि 100 बिलियन डॉलर से और 250 बिलियन डॉलर के बीच की संपत्ति वाले कई वित्तीय फर्म विफल हो जाएंगे।" फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन के अनुसार, एसवीबी के पास पिछले साल के अंत में 209 बिलियन डॉलर की संपत्ति थी।

The facts on Trump’s 2018 loosening of regulations on banks like SVB
एसवीबी बैंक संकट - फोटो : amarujala.com

रिपब्लिकन्स के साथ-साथ कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने भी दिया समर्थन 
मई 2018 में ट्रम्प की ओर से हस्ताक्षरित रोलबैक कानून को काफी हद तक द्विदलीय फैसले के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि कांग्रेस के रिपब्लिकन इसका भारी समर्थन कर रहे थे जबकि और अधिकांश कांग्रेस डेमोक्रेट्स इस बिल के विरोध में थे। सीनेट ने 67 के मुकाबले 31 मतों से विधेयक पारित किया। मतदान करने वाले सभी 50 रिपब्लिकन पक्ष में थे। वहीं डेमोक्रेटिक पक्ष के 31 सदस्यों ने नहीं मतदान नहीं किया जबकि 17 ने इसका समर्थन किया था। सीएनएन ने उस समय उल्लेख किया कि सीनेट में लगभग सभी डेमोक्रेटिक समर्थक इस बिल को लेकर चिंतित थे। वहीं ऊपरी सदन ने बिल को 159 के मुकाबले 258 वोटो से पास कर दिया था। सभी 225 रिपब्लिकन सांसदों ने रोलबैंक का समर्थन किया था और केवल एक वोट विरोध में पड़ा था। डेमोक्रेट्स में 33 ने रोलबैका समर्थन किया था जबकि 158 इसके विरोध में थे। अब कानून में किए गए इसी परिवर्तन को अमेरिका में एक के बाद बैंकों के धराशायी होने का कारण माना जा रहा है और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप विरोधियों के निशाने पर हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed