फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Tariff hit on GDP growth at 0.2-0.3 pc in FY26; GST reforms to negate impact: CEA

CEA: FY26 में जीडीपी वृद्धि दर पर टैरिफ का असर 0.2-0.3% रहने का अनुमान, सीईए बोले- जीएसटी सुधारों से असर घटेगा

Wed, 10 Sep 2025 02:18 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 10 Sep 2025 02:18 PM IST
सार

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने वी अनंत नागेश्वरन ने कहा है कि वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) सुधारों से अमेरिका की ओर से भारतीय माल पर लगाए गए 50 प्रतिशत के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि पर टैरिफ का शुद्ध प्रभाव 0.2-0.3 प्रतिशत रहेगा।

विज्ञापन
Tariff hit on GDP growth at 0.2-0.3 pc in FY26; GST reforms to negate impact: CEA
वी. अनंत नागेश्वरन, मुख्य आर्थिक सलाहकार - फोटो : ANI

विस्तार

कोविड के बाद भारत शायद जी20 का एकमात्र ऐसा देश रहा है जिसने पिछले चार वर्षों, 2021-22 से 2024-25 तक, लगभग समान दर से विकास किया है और यह आगे भी जारी रहेगा। एआईएमए के एक कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने यह बात कही। 

विज्ञापन


मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा है कि वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) सुधारों से अमेरिका की ओर से भारतीय माल पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि पर टैरिफ का शुद्ध प्रभाव 0.2-0.3 प्रतिशत रहेगा।

विज्ञापन

जुलाई से सितंबर तिमाही में भी मजबूत रहेंगे वृद्धि दर के आंकड़े

उन्होंने कहा कि जुलाई और अगस्त के आंकड़ों के आधार पर, दूसरी तिमाही के शुरुआती संकेत बताते हैं कि विकास के आंकड़े जुलाई से सितंबर की दूसरी तिमाही के लिए भी अच्छे रहेंगे। यह संभव है कि हम पिछले 11 वर्षों में इस सरकार के तहत पहले ही किए गए सभी संरचनात्मक सुधारों के प्रभाव को कम करके आंक रहे हों। 

विज्ञापन
विज्ञापन


चाहे वह भौतिक बुनियादी ढांचे में सुधार हो, डिजिटल बुनियादी ढांचे का निर्माण हो, छोटे और मध्यम उद्यमों मजबूत करने के लिए बीते वर्षों में उठाए गए कदम हों या ईज ऑफ डूइंग बिजनेस हो अपने देश में एक सजग आर्थिक माहौल बनाया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि इसके अलावा दिवाला संहिता, जीएसटी, रियल एस्टेट विनियमन अधिनियम, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग का पूंजीकरण और कंसोलिडेशन जैसे संरचनात्मक सुधार और निश्चित रूप से कोविड के बाद बनी स्थिति से निपटने में लक्षित, समयबद्ध और संतुलित रहे हैं। 

चार स्लैब वाले जीएसटी के ढांचे को दो स्लैब वाले ढांचे में बदला गया

उन्होंने कहा कि जीएसटी में हुए सुधार अमेरिका से जो निर्यात मांग पूरी नहीं हो पाएगी उसकी पूर्ति घरेलू मांग से करके अहम भूमिका निभाएंगे। जीएसटी परिषद ने पिछले हफ्ते कर व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत की चार स्लैब वाली जीएसटी संरचना को 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो स्लैब वाली संरचना में बदल दिया है। परिषद ने 40 प्रतिशत की नई जीएसटी दर बनाई है, जो अहितकर और विलासिता की वस्तुओं पर लगाई जाएगी।

22 सितंबर को नवरात्रि के पहले दिन से जीएसटी में बदलाव लागू होने पर साबुन से लेकर कार, शैंपू से लेकर ट्रैक्टर और एयर कंडीशनर तक लगभग 400 उत्पादों की कीमतें कम हो जाएंगी। एआईएमए की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधार घरेलू मांग पैदा करके दूसरे और तीसरे दौर के प्रभावों को कम करने में मदद करेंगे और इस प्रकार पूंजी निर्माण के रास्ते में आने वाली अनिश्चितता को दूर करेंगे।

टैरिफ पर तनातनी के बीच बीते पांच महीनों में अमेरिका को निर्यात आधा हुआ

उन्होंने कहा, "हालांकि आपको यह याद रखना चाहिए कि चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में अमेरिका को वस्तुओं का निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में लगभग आधा हो चुका है। दूसरे शब्दों में, इस वित्त वर्ष में प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित हो सकता है, जो कि किसी की धारणा पर निर्भर करता है, लेकिन अधिक महत्वपूर्ण बात टैरिफ की अनिश्चितता के दूसरे और तीसरे दौर के प्रभाव हैं, बशर्ते वे लंबे समय तक रहें।"

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि टैरिफ की स्थिति दीर्घकालिक न होकर क्षणिक और अल्पकालिक होगी। उन्होंने कहा, "लेकिन यदि यह हमारी अपेक्षा से अधिक समय तक जारी रहता है, विशेषकर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क, तो दूसरे और तीसरे दौर के प्रभाव अधिक स्पष्ट हो जाएंगे, जो कि निवेश, पूंजी निर्माण, अर्थव्यवस्था में समग्र भावना के संबंध में अनिश्चितता है।"



हालांकि, नागेश्वरन ने कहा कि जीएसटी सुधार से न केवल घरेलू खपत बढ़ेगी, बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह दूसरे और तीसरे दौर के टैरिफ प्रभाव का प्रतिकारक होगा।उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर, मेरा मानना है कि यदि आप जीएसटी को ध्यान में रखें, तो टैरिफ का प्रभाव और जीएसटी के क्षतिपूर्ति प्रभाव, दरों में कटौती और प्रक्रियागत सुधार से हमें सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर दबाव के संदर्भ में शुद्ध आधार पर 0.2-0.3 प्रतिशत की वृद्धि मिल सकती है, जो कि चालू वित्त वर्ष के लिए हमारे 6.3 से 6.8 प्रतिशत के अनुमान पर निर्भर है।"

 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed