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इस साल भी कड़वी रहेगी चीनी की मिठास, कम बारिश बनेगी बड़ा कारण

Wed, 15 May 2019 06:47 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 15 May 2019 06:47 PM IST
सार

  • लगातार दूसरे साल कम रह सकता है चीनी उत्पादन 
  • अमेरिकी कृषि विभाग ने जारी की देश में चीनी उत्पादन की रिपोर्ट, गन्ने में रिकवरी की दर में आएगी कमी
  • 8.4 फीसदी घटकर 3.03 करोड़ टन रह सकता है उत्पादन 2019-20 में
  • 2.85 करोड़ टन रहेगी खपत मामूली रूप से बढ़कर
  • गन्ना उत्पादन में संभावित कमी और एथेनॉल बनाने से पड़ेगा असर

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sugar prices may rise this year as cane production might hit due to less rainfall

विस्तार

इस बार लोगों के लिए चीनी की मिठास कड़वी रहने की उम्मीद है। गन्ना उत्पादक राज्यों में सूखे के आसार से उत्पादन कम होगा, जिससे चीनी खरीदने के लिए लोगों को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है। देश का चीनी उत्पादन अक्तूबर से शुरू होने वाले विपणन वर्ष 2019-20 में 8.4 फीसदी घटकर 3.03 करोड़ टन रहने का अनुमान है। 

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यह लगातार दूसरा साल है, जब चीनी उत्पादन में गिरावट देखने को मिलेगी। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि गन्ने के उत्पादन में संभावित कमी के कारण चीनी उत्पादन में कमी आएगी। चालू विपणन वर्ष 2018-19 (अक्तूबर-सितंबर) के दौरान चीनी उत्पादन 3.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 3.43 करोड़ टन के मुकाबले कम है। 
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यूएसडीए के मुताबिक, आगामी विपणन वर्ष में गन्ने में रिकवरी की दर में कमी आने के साथ उसके क्षेत्रफल में भी कमी आने का अनुमान है। इसके अलावा चीनी मिलों की ओर से सीधे गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने का असर भी चीनी उत्पादन पर पड़ेगा। आलोच्य अवधि में कुल 47 लाख हेक्टेयर रकबे में गन्ने का उत्पादन आठ फीसदी घटकर 35.5 करोड़ टन रहेगा। 

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पेराई के लिए कम मिलेगा गन्ना

यूएसडीए की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय औसत चीनी रिकवरी दर में शुद्ध कमी के साथ पिछले चीनी वर्ष के मुकाबले गन्ना उत्पादन कम रहने का अनुमान है। इस कारण चीनी के लिए पेराई का गन्ना कम मिलेगा, जिससे चीनी उत्पादन में कमी आएगी। इसके अलावा एथेनॉल के लिए गन्ने का रस/शीरा (बी-हेवी मोलासेस) की प्रतिबद्ध आपूर्ति से चीनी मिलें एथेनॉल उत्पादन की तरफ और ज्यादा प्रेरित होंगी क्योंकि इससे उन्हें ज्यादा नकदी की प्राप्ति होगी।  

इस बार भी यूपी में सबसे अधिक उत्पादन

यूएसडीए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन संकेतों के बावजूद इस बार भी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा चीनी उत्पादन होगा। वह पिछले चार साल में तीसरी बार ऐसा करने वाला राज्य होगा। हालांकि, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में इस दौरान उत्पादन में कमी आने का अनुमान है, लेकिन उत्तर प्रदेश में अधिक उत्पादन से कुछ हद तक भरपाई हो सकेगी। उधर, भारतीय चीनी व्यापार संघ का कहना है कि अब तक करीब 30 लाख टन चीनी निर्यात का अनुबंध किया जा चुका है। इसमें से 28.53 लाख टन चीनी मिलों से भेजी जा चुकी है। 

35 लाख टन निर्यात करने में सक्षम भारत

रिपोर्ट में बाजार की स्थितियां सामान्य रहने के अनुमान पर कहा गया है कि भारत 35 लाख टन चीनी का निर्यात कर सकता है। चीनी की खपत मामूली बढ़कर 2.85 करोड़ टन रहेगी। अगले सीजन से पहले कुल 1.7 करोड़ टन चीनी का पुराना स्टॉक उपलब्ध होगा, जिससे सात महीनों तक चीनी की खपत पूरी की जा सकती है। वहीं, एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (एएएस) के तहत कुल 10 लाख टन चीनी को फिर से निर्यात किया जाएगा, जबकि बाकी 25 लाख टन चीनी की वाणिज्यिक बिक्री होगी। 2018-19 में कुल 34 लाख टन चीनी निर्यात का अनुमान लगाया गया था। 

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