शेयर बाजार : 2025 में बनी रहेगी तेजी, होगी कमाई; लार्जकैप में फायदे की उम्मीद
साल 2024 दुनिया के शेयर बाजारों के लिए भले ही उतार-चढ़ाव वाला रहा हो, इसके बावजूद भारतीय बाजार ने जाते-जाते 8 फीसदी का रिटर्न दिया है। यह रिटर्न बहुत अच्छा नहीं है, लेकिन विपरीत वैश्विक स्थितियों में यह बेहतर है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि नया साल 2025 इससे भी बेहतर होगा।
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विस्तार
दुनियाभर में 2024 में जिस तरह की परिस्थितियां रही हैं, उस माहौल में किसी भी साधन से बेहतर रिटर्न की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। 2024 के शुरू में दुनिया में माहौल अलग था। देशों के बीच तनाव के साथ महंगाई और ब्याज दरों को शीर्ष पर रखने की होड़ थी। लेकिन, स्थितियां तब और बुरी हो गईं, जब दूसरी और तीसरी तिमाही की शुरुआत में हालात काफी खराब हो गए। कई देश युद्ध और महंगाई की चपेट में आ गए। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने निवेश के लिए बाजार बदल दिए। केंद्रीय बैंकों के गाइडेंस बदल गए। इसका असर यह हुआ कि अक्तूबर से लेकर दिसंबर में अब तक दुनियाभर के शेयर बाजारों का बुरा हाल रहा है।
अच्छी-खासी कमाई में आई गिरावट
सितंबर तक भारतीय बाजार ने तेजी भरी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 85,800 और निफ्टी 26,000 के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गया। इसका असर यह हुआ कि बाजार पूंजी भी 470 लाख करोड़ को पार कर गई। जनवरी की शुरुआत से देखें तो सितंबर तक हमारे बाजार ने 18 प्रतिशत रिटर्न दिया था। लेकिन वैश्विक माहौल बदलते ही यह सारा रिटर्न धुल गया। अब यह मुनाफा 50 फीसदी से ज्यादा घटकर 8 फीसदी पर आ गया है। हालांकि, जिस तरह का माहौल रहा है, उसमें यह मुनाफा भी बुरा नहीं है।
लार्जकैप में फायदे की उम्मीद
मिडकैप और स्मॉलकैप भले ही महंगे भाव पर कारोबार कर रहे हों, पर लार्जकैप का मूल्यांकन कम हो गया है। ऐसे में निवेशकों को मिडकैप और स्मॉलकैप की तुलना में लार्जकैप में ज्यादा निवेश करने की सलाह है। आईटी, हेल्थकेयर, बैंकिंग, फाइनेंस, सेवा और बीमा के साथ औद्योगिक व रियल एस्टेट में ठीक-ठाक रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
- भारतीय बाजारों को घरेलू और वैश्विक आर्थिक घटनाओं के संयोजन से महत्वपूर्ण प्रभाव का सामना करने की संभावना है। फरवरी, 2025 में आरबीआई की ओर से दर में कटौती की उम्मीद है।
- जनवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के शपथ ग्रहण के बाद व्यापार नीति में बदलाव के साथ अमेरिकी दर में कटौती की प्रगति से बाजार अस्थिर रह सकता है।
मुनाफा वसूली व अन्य कारणों से गिरावट
निरंतर वृद्धि के बाद बाजार पिछले दो महीनों में सार्वकालिक उच्च स्तर से 11% नीचे आ गया है। हाल ही में इस्राइल-ईरान, रूस-यूक्रेन और इस्राइल-फिलिस्तीन के बीच तनाव में वृद्धि के साथ-साथ अन्य कारकों के कारण बाजार में मुनाफावसूली हुई। कंपनियों की आय में कमी और मिडकैप व स्मॉलकैप में ऊंचे मूल्यांकन के साथ अमेरिका में ट्रंप की जीत के बाद डॉलर इंडेक्स में मजबूती के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से दूरी बनाई। ऐसे में वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कंपनियों की आय में 5 फीसदी की मामूली वृद्धि हो सकती है। यह पांच वर्षों में पहली बार होगा, जब कंपनियों की आय वृद्धि एक अंक में होगी। पहली छमाही की तुलना में दूसरी छमाही में कुछ सुधार की उम्मीद है। ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रामीण इलाके में खर्च में वृद्धि, शादियों का मौसम और सरकारी खर्च में बढ़ोतरी हो रही है।
निफ्टी के 27,000 पार जाने की उम्मीद
विश्लेषकों का अनुमान है कि 2025 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 27,000 के पार जा सकता है। यह अभी 23,600 से नीचे है। यानी 13 प्रतिशत के फायदे की उम्मीद है। गोल्डमैन सैश का अनुमान है कि अगले साल निफ्टी50 सूचकांक 27,000 के पार जा सकता है। अगले तीन महीने में यह 24,000 के पार जा सकता है।
- बाजार की तेजी में जो महत्वपूर्ण कारक होंगे, उनमें एक तो महंगाई घटने की उम्मीद है। दूसरा, कई देशों के बीच तनाव कम हो सकते हैं। कई देशों की नीतियों में बदलाव होगा। साथ ही भारत में अगले साल से ब्याज दरें घटने की उम्मीद है जिससे विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में वापसी कर सकते हैं।
आईपीओ का बना रहेगा आकर्षण
भारतीय बाजार में 2024 आईपीओ के लिहाज से भी बेहतर रहा है। इस दौरान कुल 90 कंपनियों ने 1.79 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं, जो अब तक का रिकॉर्ड है। विश्लेषकों की मानें तो अगले साल इससे ज्यादा पूंजी जुटाई जा सकती है। कुल 90 कंपनियों ने अभी बाजार में उतरने की योजना बनाई है। इसमें से 34 को सेबी की मंजूरी भी मिल चुकी है। ऐसे में अनुमान है कि अगले साल आईपीओ के जरिये 2.5 लाख करोड़ रुपये की रकम जुटाई जा सकती है। इस साल ह्यूंडई ने 27,000 करोड़ का रिकॉर्ड धन जुटाया है।