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Share Markets: जापान को पीछे छोड़ एशिया में भारत सबसे पसंदीदा शेयर बाजार, चीन तीसरे स्थान पर
Thu, 15 May 2025 08:50 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Thu, 15 May 2025 08:50 AM IST
सार
शेयर बाजार में आए दिन नए कीर्तिमान रचने वाला भारत अब निवेशकों की पसंद भी बनता जा रहा है। जापान को पीछे छोड़कर भारत का शेयर बाजार एशिया में सबसे पसंदीदा बाजार बनकर उभरा है। चीन तीसरे नंबर पर है।
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शेयर मार्केट
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
जापान को पीछे छोड़कर भारत एशिया में सबसे पसंदीदा शेयर बाजार बनकर उभरा है। बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) के ताजा सर्वे के अनुसार, 42 फीसदी फंड प्रबंधकों ने भारत को एशिया में निवेश के लिए सबसे बेहतर माना है। 39 फीसदी के साथ जापान दूसरे, 6 फीसदी के साथ चीन तीसरे और तीन फीसदी के साथ सिंगापुर चौथे स्थान पर रहा।
इससे पहले फरवरी में भारत दूसरा सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार रहा था। सर्वे के मुताबिक, टैरिफ के असर के बाद भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में परिवर्तन का सबसे बड़ा फायदा हो सकता है। सर्वे में 208 पैनलिस्ट्स शामिल थे। इनके पास कुल 522 अरब डॉलर की संपत्ति है।
निफ्टी-50 चार फीसदी बढ़त में, निक्केई 4.4% टूटा
जापान का निक्केई-225 इस साल अब तक 4.4 फीसदी गिर चुका है, जबकि भारत का निफ्टी-50 इंडेक्स चार फीसदी की बढ़त में है। सर्वे में कहा गया है कि लगातार बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत को अब एक स्थिर, भरोसेमंद और विकास केंद्रित बाजार के रूप में देखा जा रहा है। अगर यह रुझान जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में भारत में विदेशी निवेश एवं इक्विटी रिटर्न में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
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इससे पहले फरवरी में भारत दूसरा सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार रहा था। सर्वे के मुताबिक, टैरिफ के असर के बाद भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में परिवर्तन का सबसे बड़ा फायदा हो सकता है। सर्वे में 208 पैनलिस्ट्स शामिल थे। इनके पास कुल 522 अरब डॉलर की संपत्ति है।
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निफ्टी-50 चार फीसदी बढ़त में, निक्केई 4.4% टूटा
जापान का निक्केई-225 इस साल अब तक 4.4 फीसदी गिर चुका है, जबकि भारत का निफ्टी-50 इंडेक्स चार फीसदी की बढ़त में है। सर्वे में कहा गया है कि लगातार बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत को अब एक स्थिर, भरोसेमंद और विकास केंद्रित बाजार के रूप में देखा जा रहा है। अगर यह रुझान जारी रहता है, तो आने वाले महीनों में भारत में विदेशी निवेश एवं इक्विटी रिटर्न में और मजबूती देखने को मिल सकती है।
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