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SEBI अध्यक्ष बोले: क्वांटम कंप्यूटिंग के युग में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सेबी कर रहा तैयारियां

Wed, 08 Oct 2025 07:51 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: रिया दुबे Updated Wed, 08 Oct 2025 07:51 PM IST
सार

सेबी अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिक के आने से बड़ी सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। सेबी ने अपने द्वारा विनियमित सभी हितधारकों के लिए क्वांटम-सुरक्षित कंप्यूटिंग के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए एक ठोस कार्य योजना तैयार करना आवश्यक बताया है।

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SEBI Chairman said, SEBI is preparing to ensure security in the era of quantum computing
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे - फोटो : पीटीआई

विस्तार

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने बुधवार को मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 (GFF) में कहा कि क्वांटम कंप्यूटिक के आने से बड़ी सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। सेबी इसे अपनाए जाने से पहले ही सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर काम कर रहा है। क्वांटम कंप्यूटिंग में ऐसी तकनीक क्षमताएं हैं, जो दुर्भावनापूर्ण तत्वों के लिए पासवर्ड से छेड़छाड़ करना संभव बनाती है। जिसे लंबे समय से बहुत सुरक्षित माना जाता है और इसलिए इस मोर्चे पर सिस्टम को तैयार करना जरूरी है।

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क्वांटम कंप्यूटिंग का बढ़ता प्रभाव

पांडे ने कहा कि सेबी ने अपने द्वारा विनियमित सभी हितधारकों के लिए क्वांटम-सुरक्षित कंप्यूटिंग के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए एक ठोस कार्य योजना तैयार करना आवश्यक बताया है।जिसको लेकर अभी रिसर्च चल रही है, जो पारंपरिक कंप्यूटरों की क्षमताओं से कही अधिक जटिल और समस्याओं को हल करने के लिए क्वांटम सिस्टम के सिद्धांतों पर निर्भर करेगा।

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पांडे ने कहा हमारे पास क्वांटम-सुरक्षित कंप्यूटिंग (प्राथमिकता) है, जिसके लिए 2028 या 2029 की तारीख (जब क्वांटम आएगा) रखी गई है। हम एक उद्योग के रूप में खुद को क्वांटम-सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी के लिए कैसे तैयार करते हैं, यह एक कार्य योजना पर आधारित है, जहां हम खोज करते हैं फिर तैयारी करते हैं और फिर अगले दो-तीन-चार वर्षों के भीतर इस पर काम करते है।


उन्होंने प्रौद्योगिकी तटस्थता के बारे बोलते हुए कहा, मुझे नहीं लगता कि एक ऐसी प्रणाली में, जो बहुत पहले ही विभौतिकीकरण में परिवर्तित हो चुकी है, शेयरों को कागजी रूप में लंबे समय तक रखना संभव होगा। तकनीकी तटस्थता की अवधारणा, जो एक बेहद विवादास्पद मुद्दा है। उन्होंने कहा, तकनीकी तटस्थता वास्तव में संभव नहीं है।  उन्होंने आगे कहा कि शेयरों की केवल कागजी होल्डिंग से चिपके रहना फायदेमंद नहीं होगा और हमें उपलब्ध तकनीकी को अपनाना होगा। कंप्यूटरों के पूरे नेटवर्क को जोड़ने वाले प्रोटोकॉल के बिना इंटरनेट संभव नहीं होता। एक नियामक के रूप में, मेरा मानना है कि हमें अपनी और अपने निवेशक समुदाय की भलाई के लिए एक तकनीक को अपनाना चाहिए।

पांच वर्षों में निवेशकों की भागीदारी बढ़कर 134 मिलियन हुई

सेबी अध्यक्ष ने कहा कि सेबी द्वारा ई-केवाईसी (नो योर कस्टमर), आसान तरीकों की वजह से ऑनबोर्डिंग और मोबाइल फर्स्ट निवेश प्लेटफॉर्म जैसे डिजिटल बदलावों की वजह से पिछले पांच वर्षों में निवेशकों की भागीदारी बढ़कर 134 मिलियन हो गई है। साथ ही निवेशक जोखिम को कम करने और पूंजी बाजार में उनकी पहुंच को आसान बनाने के लिए कई एप और तकनीक आधारित पहलों की शुरुआत की गई है। इसमें सेबी के सारथी एप पर निवेशक सुरक्षित रूप से पू्ंजी बाजार में निवेश कर सकते हैं। इन पहलों ने निवेशकों को सुरक्षा और बाजार की दक्षता को मजबूत किया है और इससे होल्डिंग्स लेनदेन इतिहास, ई-वोटिंग और प्रॉक्सी सलाहाकार सिफारिशों तक समेकित पहुंच संभव हुई है। उन्होंने कहा कि निवेशकों को सुरक्षित डिजिटल लॉकर और उन्नत सेबी शिकायत निवारण प्रणाली के जरिए समाधान देने के लिए भी सुव्यवस्थित किया गया है।

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