SBI का दावा: स्टील, टेलीकॉम और निर्माण क्षेत्र को उबरने में समय लगेगा, इन क्षेत्रों पर असर कम
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कॉरपोरेट जगत में जिन कंपनियों की बैलेंस शीट मजबूत है, उन पर कोविड-19 महामारी का असर कम होगा और ये कंपनियां आर्थिक झटकों से जल्द उबर जाएंगी। एसबीआई ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में बताया है कि स्टील, टेलीकॉम, चीनी और निर्माण उद्योग को उबरने में समय लगेगा जबकि ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी और उपभोक्ता वस्तुओं से जुड़े क्षेत्र आर्थिक झटकों से जल्द संभल जाएंगे।
एसबीआई ने शोध रिपोर्ट इकोरैप में बताया कि कोविड-19 का असर सभी क्षेत्रों पर पड़ा है। यह अपवाद का समय है और कंपनियों की मजबूती का आकलन लाभ-हानि की गणना पर नहीं किया जा सकता। अभी मजबूत बैलेंस शीट कंपनियों में सुधार का सबसे बड़ा आधार है।
इसका आकलन शेयरों के अनुपात में कर्ज (डीई) और ब्याज भुगतान की क्षमता (आईएससीआर), नकदी व बैंक जमा राशि जैसे मानकों पर किया जाता है। जिन कंपनियों का डीई ज्यादा होता है और आईएससीआर कम, उनकी बैलेंस शीट कमजोर होती है।
इस लिहाज से ऑटोमोबाइल क्षेत्र का डीई 0.20 और आईएससीआर 5.56 है, उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र का डीई भी 0.25 जबकि आईएससीआर 4.77 है। यानी इन क्षेत्रों की बैलेंस शीट मजबूत है। इसके विपरीत चीनी, कपड़ा और निर्माण क्षेत्र का शेयर के अनुपात में कर्ज 1.58 जबकि ब्याज भुगतान का औसत 1.52 के आसपास है।
3 हजार कंपनियों की रेटिंग गिरी
एसबीआई ने बताया कि महामारी के दौरान 2020-21 के लिए अधिकतर कंपनियों की रेटिंग में गिरावट आई है। निर्माण, कपड़ा, स्टील, रियल एस्टेट, ऑटो उपकरण, रत्न एवं आभूषण क्षेत्र से जुड़ी 2,996 कंपनियों की रेटिंग घटी है, जबकि सिर्फ 182 कंपनियों ने ही बेहतर प्रदर्शन के बूते रेटिंग में इजाफा किया है। रेटिंग में कमी का सबसे बड़ा कारण इन कंपनियों की कमजोर बैलेंस शीट है। सिर्फ कैपिटल गुड्स और इंजीनियरिंग क्षेत्र की 870 कंपनियों की रेटिंग में गिरावट आई है।
डिस्कॉम को मिल सकता है 1.25 लाख करोड़ का पैकेज
सरकार भारी-भरकम बकाए से जूझ रही बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का राहत बढ़ाकर 1.25 लाख करोड़ रुपये कर सकती है। मई में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 90 हजार करोड़ की मदद का एलान किया था।
मामले से जुड़े सूत्रों ने बताया कि ऊर्जा मंत्रालय ने इस राशि को 1.25 लाख करोड़ करने की सिफारिश की है। राज्य सरकारें अपने डिस्कॉम के लिए पहले 93 हजार करोड़ का कर्ज मांग चुकी हैं। मार्च तक ही इनका कुल बकाया 94 हजार करोड़ था, जो लॉकडाउन में और बढ़ सकता है। लिहाजा राहत पैकेज की राशि भी बढ़ाई जानी चाहिए।