SBI के एफडी खातों से मिनटों में उड़े 10 लाख रुपये, नौकरी दिलाने के नाम पर की व्यक्ति से ठगी
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अब बैंक ग्राहकों के एफडी खातों में रकम भी सुरक्षित नहीं रही है। साइबर ठगी करने वाले हैकर्स की नजरें अब लोगों के इन खातों पर पड़ गई है। छोटी सी गलती से भी बैंक के एफडी खातों में मोबाइल नंबर के जरिए सेंध लगाकर के ऐसा हो रहा है।
ग्राफिक डिजाइनर से की ठगी
साइबर ठगों ने नौकरी के नाम पर देहरादून के एक ग्राफिक डिजाइनर से 10 लाख रुपये ठग लिए हैं। ग्राफिक डिजाइनर ने साइबर थाने में कंपनी और बैंक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। साइबर थाने की पुलिस मामले की जांच कर रही है।
कोलकाता निवासी मलिन चंद्र दास देहरादून के सहस्त्रधारा रोड, आईटी पार्क स्थित नॉलेज पोडियम सिस्टम प्राइवेट कंपनी में एक्सपर्ट ग्राफिक डिजाइनर हैं। दास ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि गत छह नवंबर को जॉबरेस्क्यूडॉटकॉम की ओर से किसी स्वाति नाम की महिला ने 9540656091 और 7834831661 नंबर से फोन किया। उसने नौकरी दिलाने के नाम पर 10 रुपये नेटबेंकिंग से ट्रांसफर कर पंजीकरण करने को कहा, जिस पर उन्होंने पहले एचडीएफसी और फिर केनरा बैंक का नेटबैंकिंग को इस्तेमाल करते हुए पंजीकरण करने की कोशिश की। हालांकि इन पर ओटीपी न आने पर रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया।
खाते से उड़े 22 हजार रुपये
इसके बाद उनके केनरा बैंक के बचत खाते से 22 हजार रुपये उड़ गए। फिर अगले दिन फोन पर पता चला कि वो पैसा स्वाति की कंपनी के पास चला गया है। ठगों ने उनसे कहा कि वो पैसा गलती से आ गया है, जिसे वो 24 घंटे के भीतर वापस कर देंगे। लेकिन वो पैसा वापस नहीं मिला। इसके बाद उनको एसबीआई खाते से पंजीकरण कराने के लिए कह दिया।
दास ने बताया कि कोलकाता स्थित एसबीआई की शाखा में सात और तीन लाख रुपये की दो एफडी खाते खुलवा रखे हैं। यह दोनों एफडी क्रमशः दिसंबर और फरवरी में मेच्योर्ड होनी है। नौ नवंबर को मोबाइल पर मैसेज आया कि उनकी दोनों एफडी तोड़ दी गईं हैं और बचत खाते में पैसा ट्रांसफर कर दिया गया है। इसके बाद अलग-अलग स्थानों से इस पैसे को निकाल लिया गया और शॉपिंग भी की गई है।
बैंक, साइबर पुलिस से नहीं मिल रही मदद
बैंक और साइबर अपराध पुलिस से भी दास को किसी तरह की मदद नहीं मिल रही है। दास ने बताया कि नौ नवंबर को उनके साथ यह हुआ और 14 नवंबर तक पुलिस उस फोन नंबर को भी बंद नहीं कर सकी है। इस बारे में आरबीआई से लेकर के स्थानीय पुलिस के उच्च अधिकारियों से भी शिकायत दर्ज कर चुके हैं।