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INR vs USD: डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में लगातार तीसरे दिन गिरावट, नए सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंचा
Fri, 08 Nov 2024 09:55 PM IST
निर्मल कांत
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 08 Nov 2024 09:55 PM IST
सार
Indian Rupee: विदेशी मुद्रा के कारोबारियों का कहना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्जाय दरों में कटौती का फैसला वित्तीय स्थिति में बदलाव का संकेत दे रहा है। इसके अलावा, नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कर और व्यापार नीतियों के असर से भी वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव हो सकता है, जिसका असर रुपये पर पड़ रहा है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Istock
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विस्तार
भारतीय रुपये की कीमत में लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज पांच पैसे गिरकर 84.37 के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट विदेशी निवेशकों के लगातार पैसे निकालने और घरेलू शेयर बाजार में गिरावट के कारण रुपये पर यह दबाव आया है।
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विदेशी मुद्रा के कारोबारियों का कहना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक के ब्जाय दरों में कटौती का फैसला वित्तीय स्थिति में बदलाव का संकेत दे रहा है। इसके अलावा, नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कर और व्यापार नीतियों के असर से भी वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव हो सकता है, जिसका असर रुपये पर पड़ रहा है।
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इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 84.32 पर खुला था। इसके बाद रुपये 84.31 का उच्चतम स्तर और 84.38 का न्यूनतम स्तर को छुआ। आखिर में रुपया पांच पैसे गिरकर 84.37 पर बंद हुआ। इससे पहले गुरुवार को भी रुपये एक पैसा गिरकर 84.32 के नए निचले स्तर पर बंद हुआ था। पिछले तीन दिनों में रुपया 28 पैसे कमजोर हुआ है। इस गिरावट की वजहों में घरेलू शेयर बाजारों में लगातार गिरावट और विदेश निवेशकों की ओर से पैसे की निकासी शामिल हैं। कच्चे तेल की कीतमों में रातोंरात हुई बढ़ोतरी ने भी रुपये पर दबाव डाला है।
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हालांकि, अमेरिकी डॉलर की ताकत थोड़ी कमजोर होने से भारतीय रुपये को थोड़ा फायदा हुआ। फेडरल रिजर्व ने हाल ही में ब्जाय दरों में 0.25 फीसदी की कटौती की है, जिससे डॉलर की ताकत में कमी आई। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अब पहले से बेहतर है और कुछ खतरे कम हो गए हैं, जिससे डॉलर की कीमत थोड़ी नीचे आई और रुपये थोड़ा संभल पाया।
रुपये की स्थिति को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती और घरेलू बाजारों में गिरावट के कारण रुपये पर दबाव बने रहने की संभावान है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अगर दखल देता है तो रुपया थोड़ी स्थिरता दिखा सकता है। इसके अलावा, विदेश संस्थागत निवेशकों (एआईआई) ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार से 3,404.04 करोड़ रुपये की निकासी की, जिससे भी रुपये पर दबाव बना।