रिवर्स मॉर्गेज: घर को बनाएं कमाई का जरिया, इस योजना के एवज में बैंक एकमुश्त या हर महीने एक निश्चित रकम देता है
जीवन के अंतिम पड़ाव यानी रिटायरमेंट के बाद बुढ़ापे में खराब माली हालत से गुजर रहे लोगों के लिए रिवर्स मॉर्गेज स्कीम अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। इस योजना के तहत बैंक आपको घर के एवज में एकमुश्त या हर महीने एक निश्चित रकम देता है, जो रोजमर्रा के खर्चे और आपात जरूरतें पूरी करने में मददगार है।
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परिवार अब छोटे होते जा रहे हैं। बच्चों के अलग रहने पर कई ऐसे बुजुर्ग मिल जाएंगे, जिनकी माली हालत खराब है और उनके पास कमाई का कोई जरिया नहीं है। हालात तब और बदतर हो जाते हैं, जब पति-पत्नी घर में अकेले ही रहते हैं। परिवार में उनका ख्याल रखने वाला कोई नहीं होता। दरअसल, अधिकांश लोगों के पास रिटायरमेंट के बाद नियमित आय का साधन नहीं होता। जिन लोगों को रिटायरमेंट के बाद पेंशन मिलती है, उन्हें तो वित्तीय सुरक्षा मिल जाती है, लेकिन कई बार स्वास्थ्य संबंधी कुछ आपात जरूरतों के लिए वह भी नाकाफी साबित होती है। ऐसे लोगों के लिए रिवर्स मॉर्गेज स्कीम अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।
ले सकते हैं अधिकतम 15 लाख रुपये
यह योजना सामान्य होम लोन के एकदम उलट है। इसमें आपको किस्तें देने की बजाय आपके घर की कीमत के आधार पर किस्तें मिलती हैं, जो मासिक, तिमाही या वार्षिक हो सकती हैं। योजना के तहत अधिकतम मासिक भुगतान की किस्त 50,000 रुपये तक हो सकती है। आप पात्रता की 50 फीसदी तक राशि एकमुश्त भी ले सकते हैं, जो अधिकतम 15 लाख रुपये हो सकती है। रिवर्स मॉर्गेज से मिलने वाली राशि का उपयोग सिर्फ वास्तविक जरूरतों जैसे चिकित्सा आपात स्थिति, रोजमर्रा के खर्च, घर की मरम्मत, नवीनीकरण या उसी संपत्ति पर लिए गए होम लोन के पुनर्भुगतान के लिए कर सकते हैं। राशि का इस्तेमाल निवेश के लिए नहीं किया जा सकता। आसान भाषा में समझें तो जब हम बैंक से होम लोन लेते हैं तो प्रॉपर्टी खरीदने के लिए वह एकमुश्त राशि देता है। इसके एवज में वह प्राॉपर्टी के कागज अपने पास रख लेता है। लोन चुकाने के लिए हम हर महीने किस्त भरते हैं। दूसरी ओर, रिवर्स मॉर्गेज में बैंक घर को गिरवी रखकर एकमुश्त या हर माह एक निश्चित राशि देते हैं। साथ ही, आवेदक उसी घर में रह भी सकता है।
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रिवर्स मॉर्गेज की प्रमुख शर्तें...
व्यक्ति की उम्र 60 वर्ष या अधिक होनी चाहिए और वह उस संपत्ति का मालिक होना चाहिए, जिसमें वह रहता हो। संपत्ति खुद की खरीदी हुई होनी चाहिए। यानी विरासत या उपहार में मिली संपत्ति पर यह लोन नहीं मिलेगा। प्रॉपर्टी की बची हुई उम्र न्यूनतम 20 साल होनी चाहिए।
- दंपती योजना का लाभ लेना चाहते हैं, तो पति या पत्नी की उम्र कम से कम 60 वर्ष और दूसरे की 55 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। संपत्ति उनके नाम पर होनी चाहिए।
- किराये पर दी गई या व्यावसायिक संपत्ति पर रिवर्स मॉर्गेज लोन नहीं मिलता। संपत्ति पर पहले से कोई लोन है, तो उसे चुकाने के बाद ही इसका लाभ ले सकते हैं।
- पैन कार्ड, कानूनी उत्तराधिकारियों की सूची, पंजीकृत वसीयत, संपत्ति की लागत व क्षेत्र का विवरण देना होगा।
- वसीयत बनाना और उसे पंजीकृत करना अनिवार्य है। वसीयत में बदलाव पर बैंक को सूचित करना होगा।
सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही सुविधा
रिवर्स मॉर्गेज का लाभ सिर्फ भारतीय नागरिकों को ही मिलता है। अगर आप अकेले हैं तो आपकी आयु न्यूनतम 60 साल होनी चाहिए। संयुक्त रूप से कर्ज ले रहे हैं तो जीवनसाथी की न्यूनतम आयु 55 साल होनी चाहिए। आमतौर पर यह कर्ज 20 साल तक के लिए मिलता है, जो घर के मूल्य का 75 से 90 फीसदी तक का हो सकता है।
- लोन तभी मिलेगा, जब घर बेहतर स्थिति में हो और आवेदक का उस पर पूरा मालिकाना हक हो। कमर्शियल प्रॉपर्टी पर लोन नहीं मिलेगा।
लोन की अवधि, ब्याज दर और पुनर्भुगतान
रिवर्स मॉर्गेज किसी भी अनुसूचित बैंक, राष्ट्रीय आवास बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से ले सकते हैं। लोन की अधिकतम अवधि 20 वर्ष हो सकती है, जिसमें मालिक को नियमित भुगतान मिलता रहेगा। इसके बाद भी मालिक घर में रह सकता है और उनकी मृत्यु के बाद उनके पति/पत्नी भी बिना लोन चुकाए रह सकते हैं।
- ब्याज दरें बैंक के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। लोन फिक्स्ड या फ्लोटिंग ब्याज दर पर उपलब्ध है, जिसकी ब्याज दर रेपो दर से 3 फीसदी तक अधिक हो सकती है।
- अगर संपत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि बकाया लोन रकम से कम हैं तो बैंक आपको बाकी की रकम चुकाने के लिए नहीं कह सकता हैं। लोन लेने वाले व्यक्ति की मौत के बाद कानूनी उत्तराधिकारी चाहे, तो बकाया लोन चुका सकते हैं।
- अगर कानूनी उत्तराधिकारी इस मामले में पहल नहीं करता है, तो बैंक उस घर को बेचकर बकाया वसूल कर सकते है. बाकी रकम कानूनी उत्तराधिकारी को वसीयत के हिसाब से दी जाएगी। बैंक इस योजना के तहत एन्युटी खरीदकर भी दे रहे हैं, जिसके जरिये जीवनभर पेंशन मिलती रहेगी।