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RBI: 'बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट्स की मदद ली जाएगी...', केवाईसी से जुड़ी दिक्कतों पर आरबीआई का बयान
Fri, 23 May 2025 09:45 PM IST
निर्मल कांत
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 23 May 2025 09:45 PM IST
सार
RBI: आरबीआई ने कहा है कि केवाईसी अपडेट में आ रही परेशानियों को कम करने के लिए बैंक अपने अधिकृत बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट की मदद ले सकते हैं। साथ ही, ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में नियमित केवाईसी अपडेट के लिए शिविर और अभियान चलाने की योजना भी बनाई जा रही है।
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भारतीय रिजर्व बैंक
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ग्राहकों की ओर से लगातार आ रही केवाईसी संबंधी शिकायतों के बीच शुक्रवार को कहा कि वह इस समस्या का समाधान निकालने के लिए बैंकों को बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट (बीसी) की मदद लेने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट वह व्यक्ति या संस्था होती है, जिन्हें बैंक की ओर से अधिकृत किया जाता है, ताकि वे गांवों या दूरदराज के इलाकों में लोगों तक बैंक सेवाएं पहुंचा सकें।
केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि वह बैंकों के अधिकृत बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट को बंद पड़े खातों को दोबारा चालू कराने में मदद करने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। शुक्रवार को जारी किए गए केवाईसी अपडेट/नियमित अपडेट से जुड़े एक मसौदा परिपत्र में आरबीआई ने कहा कि उसने देखा है कि केवाई के नियमित अपडेट में काफी काम लंबित हैं। इसमें वे खाते भी शामिल हैं जो सरकार की योजनाओं के तहत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) और इलेक्ट्रॉनिक बेनिफिट ट्रांसफर (ईबीटी) के लिए खोले गए थे।
यह भी देखा गया है कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले गए खातों में भी परेशानियां आ रही हैं। आरबीआई को यह शिकायतें भी मिल रही हैं कि ग्राहकों को अपने केवाई के नियमित अपडेट में काफी दिक्कतें हो रही हैं। इस मसौदा परिपत्र में कहा गया, ग्राहकों की सुविधा के लिए प्रक्रिया को और आसान बनाने के उद्देश्य से केवाईसी के अपडेट/नियमित अपडेट से जुड़ी निर्देशों में बदलाव किए जा रहे हैं, जिसमें खासतौर पर बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट को केवाईसी और केवाईसी अपडेट में मदद करने की अनुमति दी जाएगी।
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ये भी पढ़ें: वैश्विक मांग के चलते सोना फिर चमका, चांदी के भाव में 2000 रुपये की गिरावट, जानें आज का रेट
लोग इस पर अपने सुझाव या टिप्पणियां छह जून तक दे सकते हैं। आरबीआई एक और प्रस्ताव पर भी विचार कर रहा है जिसमें बैंकों से कहा जाएगा कि वे उन ग्रामीण और अर्ध-शहरी शाखाओं में शिविर लगाएं और जोरदार अभियान चलाएं, जहां शाखाओं में जहां केवाई के नियमित अपडेट लंबित हैं। आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वे इस मामले में सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाएं।
भुगतान प्रणालियों के नियमन, पर्यवेक्षण के लिए छह-सदस्यीय बोर्ड बनाएगा आरबीआई
रिजर्व बैंक के गवर्नर की अगुवाई वाला छह सदस्यीय 'भुगतान विनियामक बोर्ड' (पीआरबी) अब देश में भुगतान प्रणालियों का विनियमन एवं पर्यवेक्षण करेगा। इसमें केंद्र सरकार के तीन नामित व्यक्ति भी होंगे। आरबीआई ने एक अधिसूचना में यह जानकारी दी है। इसके मुताबिक, नया निकाय भुगतान एवं निपटान प्रणाली नियमन एवं पर्यवेक्षण बोर्ड (बीपीएसएस) की जगह लेगा।
पांच सदस्यीय बीपीएसएस की कमान भी आरबीआई गवर्नर के ही पास होती है लेकिन इसमें कोई सरकारी नामित व्यक्ति नहीं होता है। रिजर्व बैंक ने 21 मई को 'भुगतान विनियामक बोर्ड विनियम, 2025' को अधिसूचित कर दिया है।
ये भी पढ़ें: आरबीआई का बड़ा फैसला, वित्त वर्ष 2025 के लिए 2.68 लाख करोड़ अधिशेष हस्तांतरण को दी मंजूरी
अधिसूचना के मुताबिक, भुगतान विनियामक बोर्ड (पीआरबी) की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर करेंगे जबकि भुगतान और निपटान प्रणाली के प्रभारी डिप्टी गवर्नर, केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित आरबीआई के एक अधिकारी और केंद्र सरकार द्वारा नामित तीन व्यक्ति इसके अन्य सदस्य होंगे। हरेक सदस्य के पास एक वोट होगा। आरबीआई गवर्नर, डिप्टी गवर्नर और केंद्रीय बैंक के अधिकारी बोर्ड के ‘पदेन’ सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।
पीआरबी भुगतान एवं निपटान प्रणाली, सूचना प्रौद्योगिकी और कानून के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को स्थायी या तदर्थ आमंत्रित सदस्य के तौर पर बैठक में आमंत्रित कर सकता है जबकि आरबीआई के प्रमुख कानूनी सलाहकार बैठकों में स्थायी आमंत्रित सदस्य होंगे। बोर्ड की आम तौर पर साल में कम-से-कम दो बैठकें होंगी।
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केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि वह बैंकों के अधिकृत बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट को बंद पड़े खातों को दोबारा चालू कराने में मदद करने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। शुक्रवार को जारी किए गए केवाईसी अपडेट/नियमित अपडेट से जुड़े एक मसौदा परिपत्र में आरबीआई ने कहा कि उसने देखा है कि केवाई के नियमित अपडेट में काफी काम लंबित हैं। इसमें वे खाते भी शामिल हैं जो सरकार की योजनाओं के तहत डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) और इलेक्ट्रॉनिक बेनिफिट ट्रांसफर (ईबीटी) के लिए खोले गए थे।
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यह भी देखा गया है कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोले गए खातों में भी परेशानियां आ रही हैं। आरबीआई को यह शिकायतें भी मिल रही हैं कि ग्राहकों को अपने केवाई के नियमित अपडेट में काफी दिक्कतें हो रही हैं। इस मसौदा परिपत्र में कहा गया, ग्राहकों की सुविधा के लिए प्रक्रिया को और आसान बनाने के उद्देश्य से केवाईसी के अपडेट/नियमित अपडेट से जुड़ी निर्देशों में बदलाव किए जा रहे हैं, जिसमें खासतौर पर बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट को केवाईसी और केवाईसी अपडेट में मदद करने की अनुमति दी जाएगी।
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लोग इस पर अपने सुझाव या टिप्पणियां छह जून तक दे सकते हैं। आरबीआई एक और प्रस्ताव पर भी विचार कर रहा है जिसमें बैंकों से कहा जाएगा कि वे उन ग्रामीण और अर्ध-शहरी शाखाओं में शिविर लगाएं और जोरदार अभियान चलाएं, जहां शाखाओं में जहां केवाई के नियमित अपडेट लंबित हैं। आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वे इस मामले में सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाएं।
भुगतान प्रणालियों के नियमन, पर्यवेक्षण के लिए छह-सदस्यीय बोर्ड बनाएगा आरबीआई
रिजर्व बैंक के गवर्नर की अगुवाई वाला छह सदस्यीय 'भुगतान विनियामक बोर्ड' (पीआरबी) अब देश में भुगतान प्रणालियों का विनियमन एवं पर्यवेक्षण करेगा। इसमें केंद्र सरकार के तीन नामित व्यक्ति भी होंगे। आरबीआई ने एक अधिसूचना में यह जानकारी दी है। इसके मुताबिक, नया निकाय भुगतान एवं निपटान प्रणाली नियमन एवं पर्यवेक्षण बोर्ड (बीपीएसएस) की जगह लेगा।
पांच सदस्यीय बीपीएसएस की कमान भी आरबीआई गवर्नर के ही पास होती है लेकिन इसमें कोई सरकारी नामित व्यक्ति नहीं होता है। रिजर्व बैंक ने 21 मई को 'भुगतान विनियामक बोर्ड विनियम, 2025' को अधिसूचित कर दिया है।
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अधिसूचना के मुताबिक, भुगतान विनियामक बोर्ड (पीआरबी) की अध्यक्षता आरबीआई गवर्नर करेंगे जबकि भुगतान और निपटान प्रणाली के प्रभारी डिप्टी गवर्नर, केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित आरबीआई के एक अधिकारी और केंद्र सरकार द्वारा नामित तीन व्यक्ति इसके अन्य सदस्य होंगे। हरेक सदस्य के पास एक वोट होगा। आरबीआई गवर्नर, डिप्टी गवर्नर और केंद्रीय बैंक के अधिकारी बोर्ड के ‘पदेन’ सदस्य के रूप में कार्य करेंगे।
पीआरबी भुगतान एवं निपटान प्रणाली, सूचना प्रौद्योगिकी और कानून के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को स्थायी या तदर्थ आमंत्रित सदस्य के तौर पर बैठक में आमंत्रित कर सकता है जबकि आरबीआई के प्रमुख कानूनी सलाहकार बैठकों में स्थायी आमंत्रित सदस्य होंगे। बोर्ड की आम तौर पर साल में कम-से-कम दो बैठकें होंगी।
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